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दालमंडी में बेसमेंट निर्माण मामले में फैसला सुरक्षित
Updated Fri, 26 Jan 2018 02:41 AM IST
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वाराणसी। दालमंडी में अवैध बेसमेंट निर्माण के बहुचर्चित मामले की आयुक्त न्यायालय में चल रही सुनवाई गुरुवार को पूरी हो गई। मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। बेसमेंट सील कर चुके वीडीए को अब आगे की कार्रवाई के लिए फैसले का इंतजार है। तीन साल से यह मामला उनके न्यायालय में विचाराधीन था। फिलहाल, अवैध निर्माण से जुड़े वीडीए के 282 मामले आयुक्त न्यायालय में विचाराधीन हैं।
बिना किसी अनुमति और नक्शा पास कराए बेसमेंट बनाने का यह मामला 2013 में वीडीए के संज्ञान में आया था। तब वीडीए ने अवैध निर्माण सील कर उसके ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। इसके खिलाफ भवन स्वामी ने आयुक्त न्यायालय में अर्जी दाखिल की थी। तीन साल से चल रही मामले की सुनवाई गुरुवार को पूरी हो गई। आयुक्त न्यायालय का जो भी फैसला आएगा, उस अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
यह है मामला
दालमंडी में आठ हजार वर्ग मीटर के अवैध बेसमेंट का निर्माण फरवरी 2013 में शुरू कराया गया था। उस समय वीडीए ने निर्माण रोकने के लिए नोटिस जारी किया था। 14 फरवरी, 2013 को चौक थाने पर सूचना दी थी। 10 जुलाई, 2013 और जून, 2014 को तत्कालीन एसएसपी को वीडीए ने पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई का आग्रह किया। इसके बाद भी चोरी-छिपे निर्माण का सिलसिला न थमने पर जून, 2014 में वीडीए ने अवैध निर्माण को सील कर दिया गया और अगस्त में उसके ध्वस्तीकरण का आदेश दे दिया। इसके खिलाफ भवन स्वामी ने आयुक्त न्यायालय में अपील कर दी। मार्च, 2015 में आयुक्त न्यायालय को वीडीए ने अवैध निर्माण से जुड़ी पत्रावली उपलब्ध कराई। तब से आयुक्त न्यायालय में मामले की सुनवाई चल रही थी। फैसला न आने से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं हो पाई। अलबत्ता, अवैध निर्माण का दायरा बढ़ता चला गया।
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ऐसे सामने आया प्रकरण
बीते दिनों पुलिस टीम के साथ देर रात पैदल गश्त पर निकले एसएसपी आरके भारद्वाज जब दालमंडी पहुंचे तो घनी आबादी के बीच पुरानी इमारतों के नीचे बेसमेंट बनता देख चौंक गए। असुरक्षित तरीके से बेसमेंट बनाए जाने की जानकारी उन्होंने डीएम और वीडीए को दी। मामला सार्वजनिक होते ही वीडीए, नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। प्रशासनिक अमले के साथ ही वीडीए ने छानबीन के बाद अगले ही दिन बेसमेंट समेत तीन अवैध निर्माण सील किए। कई और अवैध निर्माणों को चिह्नित किया।
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बिना किसी अनुमति और नक्शा पास कराए बेसमेंट बनाने का यह मामला 2013 में वीडीए के संज्ञान में आया था। तब वीडीए ने अवैध निर्माण सील कर उसके ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। इसके खिलाफ भवन स्वामी ने आयुक्त न्यायालय में अर्जी दाखिल की थी। तीन साल से चल रही मामले की सुनवाई गुरुवार को पूरी हो गई। आयुक्त न्यायालय का जो भी फैसला आएगा, उस अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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यह है मामला
दालमंडी में आठ हजार वर्ग मीटर के अवैध बेसमेंट का निर्माण फरवरी 2013 में शुरू कराया गया था। उस समय वीडीए ने निर्माण रोकने के लिए नोटिस जारी किया था। 14 फरवरी, 2013 को चौक थाने पर सूचना दी थी। 10 जुलाई, 2013 और जून, 2014 को तत्कालीन एसएसपी को वीडीए ने पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई का आग्रह किया। इसके बाद भी चोरी-छिपे निर्माण का सिलसिला न थमने पर जून, 2014 में वीडीए ने अवैध निर्माण को सील कर दिया गया और अगस्त में उसके ध्वस्तीकरण का आदेश दे दिया। इसके खिलाफ भवन स्वामी ने आयुक्त न्यायालय में अपील कर दी। मार्च, 2015 में आयुक्त न्यायालय को वीडीए ने अवैध निर्माण से जुड़ी पत्रावली उपलब्ध कराई। तब से आयुक्त न्यायालय में मामले की सुनवाई चल रही थी। फैसला न आने से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं हो पाई। अलबत्ता, अवैध निर्माण का दायरा बढ़ता चला गया।
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ऐसे सामने आया प्रकरण
बीते दिनों पुलिस टीम के साथ देर रात पैदल गश्त पर निकले एसएसपी आरके भारद्वाज जब दालमंडी पहुंचे तो घनी आबादी के बीच पुरानी इमारतों के नीचे बेसमेंट बनता देख चौंक गए। असुरक्षित तरीके से बेसमेंट बनाए जाने की जानकारी उन्होंने डीएम और वीडीए को दी। मामला सार्वजनिक होते ही वीडीए, नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। प्रशासनिक अमले के साथ ही वीडीए ने छानबीन के बाद अगले ही दिन बेसमेंट समेत तीन अवैध निर्माण सील किए। कई और अवैध निर्माणों को चिह्नित किया।