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महाकाव्य छत्रपति शिवाजी का विमोचन
Updated Wed, 07 Jun 2017 11:43 PM IST
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गाजीपुर। समकालीन सोच परिवार के गौतमबुद्ध स्थित कार्यालय पर मंगलवार की शाम राजेंद्र नाथ पांडेय की तरफ से रचित महाकाव्य छत्रपति शिवाजी का विमोचन एवं लोकार्पण किया गया। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. पीएन सिंह ने कहा कि राजेंद्रनाथ पांडेय के कार्य की प्रशंसा की जानी चाहिए। ग्रामीण क्षेत्र में रहकर उन्होंने महाकाव्य की रचना कर एक सराहनीय कार्य किया है।
उन्होंने कहा कि समाज में मानवीय एवं नैतिक मूल्यों का पतन हो रहा है। ऐसे में राजेंद्र नाथ पांडेय की महाकाव्य की प्रासंगिकता बन पड़ती है। रामनगीना कुशवाहा ने कहा कि यह भ्रम फैला दिया गया है कि शिवाजी मुस्लिम विरोधी थे। जबकि शिवाजी अन्याय एवं अत्याचार के विरुद्ध जीवन-पर्यंत लड़ते रहे। शिवाजी की सेना में बहुत से सैनिक मुसलमान थे। वरिष्ठ साहित्यकार रामनारायण तिवारी ने कहा कि राजेंद्रनाथ पांडेय अपनी रचनाओं में शिवाजी को इतिहास पुरुष से लोक पुरुष बनाने का काम कर रहे हैं। इस अवसर पर उमाशंकर यादव पथिक, अनिल कुमार शर्मा, धर्मदेव यादव, अनिलाभ, प्रमोद राय, रामनगीना कुशवाहा, जितेंद्र नाथ घोष, डॉ. बद्रीनाथ सिंह, अमितेश कुमार सिंह ने विचार व्यक्त किया। अध्यक्षता कनई राम प्रजापति तथा संचालन संतोष कुमार तिवारी ने किया।
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उन्होंने कहा कि समाज में मानवीय एवं नैतिक मूल्यों का पतन हो रहा है। ऐसे में राजेंद्र नाथ पांडेय की महाकाव्य की प्रासंगिकता बन पड़ती है। रामनगीना कुशवाहा ने कहा कि यह भ्रम फैला दिया गया है कि शिवाजी मुस्लिम विरोधी थे। जबकि शिवाजी अन्याय एवं अत्याचार के विरुद्ध जीवन-पर्यंत लड़ते रहे। शिवाजी की सेना में बहुत से सैनिक मुसलमान थे। वरिष्ठ साहित्यकार रामनारायण तिवारी ने कहा कि राजेंद्रनाथ पांडेय अपनी रचनाओं में शिवाजी को इतिहास पुरुष से लोक पुरुष बनाने का काम कर रहे हैं। इस अवसर पर उमाशंकर यादव पथिक, अनिल कुमार शर्मा, धर्मदेव यादव, अनिलाभ, प्रमोद राय, रामनगीना कुशवाहा, जितेंद्र नाथ घोष, डॉ. बद्रीनाथ सिंह, अमितेश कुमार सिंह ने विचार व्यक्त किया। अध्यक्षता कनई राम प्रजापति तथा संचालन संतोष कुमार तिवारी ने किया।
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