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होटल कारोबारी पर शिकंजा, एसीएम ने किया मौका-मुआयना
Updated Tue, 06 Jun 2017 01:51 AM IST
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वाराणसी। अंतत: जिला प्रशासन ने मान लिया है कि डीएम आवास के पीछे भीम नगर में वरुणा नदी के किनारे कब्जा कर पाट दिया गया है। इस मामले में होटल एवं शराब कारोबारी हीरालाल जायसवाल पर प्रशासन ने शिकंजा भी कस दिया है। अब जायसवाल को नोटिस देने की तैयारी है। उनसे पूछा जाएगा कि नदी किनारे जमीन पाटने के लिए मिट्टी कहां से लाई गई और नदी के कितने क्षेत्र में कितनी मिट्टी पाटी गई है? दोनों मसलों पर जायसवाल पर जुर्माना भी लगाया जाना है। जुर्माने की राशि का आकलन जिला खनन विभाग कर रहा है।
सोमवार को अपर नगर मजिस्ट्रेट चतुर्थ त्रिभुवन ने भीम नगर स्थित जमीन का मौका-मुआयना किया। बताया, नदी किनारे किसी भी तरह के अतिक्रमण पर पाबंदी है। बावजूद इसके यहां न सिर्फ तलहटी तक जमीन पाट दी गई बल्कि दीवार बनाकर उस पर कब्जा भी जमा लिया गया। किन परिस्थितियों में ऐसा हुआ, इसकी जांच की जा रही है। बता दें कि भीम नगर में होटल बनाने के लिए नगर निगम की जमीन को अपने नाम विनिमय कराने के मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था। प्रकरण में डीएम ने विनिमय रद्द करने के साथ ही एएसडीएम बसंत कुमार गुप्ता के अधिकार छीनने के साथ ही उनके निलंबन की संस्तुति शासन से की है।
त्रिभुवन ने बताया कि नदी की तलहटी पाटने के लिए मिट्टी वैधानिक तरीके से लाई गई या फिर अवैध खनन के जरिए? इसकी भी जांच की जाएगी। कितने घन मीटर मिट्टी से नदी की जमीन को पाटा गया है, इसका भी आकलन कराया जा रहा है। इसी आधार पर जुर्माने की राशि तय होगी। यह जिम्मेदारी जिला खनन अधिकारी को दी गई है। जिला खनन अधिकारी अनिल कुमार सिंह ने कहा कि बताए गए बिंदुओं वह जांच कर रिपोर्ट जल्दी ही उच्चाधिकारियों को सौंपेंगे।
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सोमवार को अपर नगर मजिस्ट्रेट चतुर्थ त्रिभुवन ने भीम नगर स्थित जमीन का मौका-मुआयना किया। बताया, नदी किनारे किसी भी तरह के अतिक्रमण पर पाबंदी है। बावजूद इसके यहां न सिर्फ तलहटी तक जमीन पाट दी गई बल्कि दीवार बनाकर उस पर कब्जा भी जमा लिया गया। किन परिस्थितियों में ऐसा हुआ, इसकी जांच की जा रही है। बता दें कि भीम नगर में होटल बनाने के लिए नगर निगम की जमीन को अपने नाम विनिमय कराने के मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था। प्रकरण में डीएम ने विनिमय रद्द करने के साथ ही एएसडीएम बसंत कुमार गुप्ता के अधिकार छीनने के साथ ही उनके निलंबन की संस्तुति शासन से की है।
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त्रिभुवन ने बताया कि नदी की तलहटी पाटने के लिए मिट्टी वैधानिक तरीके से लाई गई या फिर अवैध खनन के जरिए? इसकी भी जांच की जाएगी। कितने घन मीटर मिट्टी से नदी की जमीन को पाटा गया है, इसका भी आकलन कराया जा रहा है। इसी आधार पर जुर्माने की राशि तय होगी। यह जिम्मेदारी जिला खनन अधिकारी को दी गई है। जिला खनन अधिकारी अनिल कुमार सिंह ने कहा कि बताए गए बिंदुओं वह जांच कर रिपोर्ट जल्दी ही उच्चाधिकारियों को सौंपेंगे।
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