{"_id":"59346bdd4f1c1b6e358b45bf","slug":"14966077216-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"धूल और धुएं के गुबार से हवा हुई जहरीली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धूल और धुएं के गुबार से हवा हुई जहरीली
Updated Mon, 05 Jun 2017 01:51 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। खोदी गई सड़कों पर दिन भर उड़ती धूल, जाम में वाहनों से बेतहाशा उड़ते धुएं के चलते काशी की हवा जहरीली हो गई है। शहर में रविवार को वायु प्रदूषण की मात्रा मानक से पांच गुना अधिक रिकार्ड की गई। वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंचने से त्वचा, फेफड़े और आंखों की बीमारी में इजाफा होने की आशंका है। काशी की बिगड़ती हवा को लेकर देश स्तर पर चिंता जताए जाने के बाद भी प्रदूषण नियंत्रण विभाग इस दिशा में हाथ पर हाथ धरे बैठा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस पर अंकुश नहीं लगाया गया तो हालात चिंताजनक हो सकते हैं।
बनारस की हवा में पार्टिक्यूलेट मैटर 2.5 माइक्रोग्राम (बारीक धूल कण) की मात्रा में तेजी से इजाफा हो रहा है। आरओबी के अलावा आईपीडीएस योजना के तहत खोद कर छोड़ी गई सड़कों पर इन दिनों धूल के गुबार उड़ने से वातावरण ज्यादा खराब हुआ है। इससे दिन -रात वातावरण में धूल कण उड़ रहे हैं। रविवार को पार्टिक्यूलेट मैटर 2.5 की मात्रा न्यूनतम 320 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर रिकार्ड की गई। सामान्य तौर पर हवा में इसकी सामान्य मात्रा 60 पार्टिक्यूलेट मैटर माइक्रोग्राम होनी चाहिए। हवा में बारीक धूल कणों के प्रदूषण की यह मात्रा सामान्य मानक से पांच गुना अधिक पहुंच गई है। पीएम-10 की भी मात्रा में पांच गुना से अधिक की वृद्धि रिकार्ड की गई है। गंगा के जल में खतरनाक प्रदूषकों की मात्रा में तेजी से इजाफा हो रहा है। बीएचयू की गंगा प्रयोगशाला के पूर्व कोआर्डिनेटर प्रो. यूके चौधरी का कहना है कि नालों के गंदे पानी का किनारों पर ठहराव होने से गंगा के जल में आक्सीजन की कमी हो गई है। प्रवाह न होने से यह संकट पैदा हुआ है। जब तक गंगा में प्रवाह नहीं बढ़ाया जाएगा, समस्या का समाधान नहीं निकल सकता।
विज्ञापन
बनारस की हवा में पार्टिक्यूलेट मैटर 2.5 माइक्रोग्राम (बारीक धूल कण) की मात्रा में तेजी से इजाफा हो रहा है। आरओबी के अलावा आईपीडीएस योजना के तहत खोद कर छोड़ी गई सड़कों पर इन दिनों धूल के गुबार उड़ने से वातावरण ज्यादा खराब हुआ है। इससे दिन -रात वातावरण में धूल कण उड़ रहे हैं। रविवार को पार्टिक्यूलेट मैटर 2.5 की मात्रा न्यूनतम 320 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर रिकार्ड की गई। सामान्य तौर पर हवा में इसकी सामान्य मात्रा 60 पार्टिक्यूलेट मैटर माइक्रोग्राम होनी चाहिए। हवा में बारीक धूल कणों के प्रदूषण की यह मात्रा सामान्य मानक से पांच गुना अधिक पहुंच गई है। पीएम-10 की भी मात्रा में पांच गुना से अधिक की वृद्धि रिकार्ड की गई है। गंगा के जल में खतरनाक प्रदूषकों की मात्रा में तेजी से इजाफा हो रहा है। बीएचयू की गंगा प्रयोगशाला के पूर्व कोआर्डिनेटर प्रो. यूके चौधरी का कहना है कि नालों के गंदे पानी का किनारों पर ठहराव होने से गंगा के जल में आक्सीजन की कमी हो गई है। प्रवाह न होने से यह संकट पैदा हुआ है। जब तक गंगा में प्रवाह नहीं बढ़ाया जाएगा, समस्या का समाधान नहीं निकल सकता।
विज्ञापन