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बेसुरा और बे-ताल एजेंडा है विपक्ष का : सोनल मानसिंह
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वाराणसी। राज्यसभा सदस्य पद्मविभूषण सोनल मानसिंह वाराणसी के मतदाताओं को जागरूक करने शुक्रवार को काशी पहुंची। उन्होंने मतदाताओं का आह्वान किया कि अपना कर्म करो तभी कुछ हासिल होगा। लोकतंत्र का यह सबसे बड़ा उत्सव है और मतदान का अधिकार एक शक्ति है। आपके हाथ में जब शक्ति होती है तो उसका सदुपयोग करना चाहिए। इसलिए 19 मई को उठो, जागो, मत करो आलस, मतदान करो।
चुनावी भाषणों पर उन्होंने कहा कि विपक्ष का एजेंडा पूरी तरह से बेसुरा और बे-ताल है। किसी भी रूप में भाषा का दुरुपयोग सराहा नहीं जा सकता है। शब्दों का चयन बहुत ही गंभीरता से करना होता है। हालांकि चुनावी माहौल अलग ढंग का होता है। यह पहली बार नहीं है जब आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। पहले भी ऐसा होता रहा है। इस दौरान कुछ बातें ऐसी भी निकलकर सामने आई हैं जो लोगों को जानना जरूरी थीं। उनका पर्दाफाश हुआ है। वास्तव में भारत में लोकतंत्र है, बोलने की आजादी पर कोई लगाम नहीं है।
उन्होंने कहा कि मतदान के मामले में वाराणसी पूरे देश के सामने नजीर पेश करे। काशी की जनता मतदान के दिन घरों से निकलकर बूथों तक आए और अपनी शक्ति का इस्तेमाल करे। उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम पर कहा कि निर्माण और ध्वंस की प्रक्रिया तो सतत है जो अनादि काल से चलती आ रही है। शरीर तो बदलता रहता है, लेकिन आत्मा वही रहती है। इसके उपरांत उन्होंने पद्मभूषण पं. छन्नू लाल मिश्र से भी मुलाकात की।
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चुनावी भाषणों पर उन्होंने कहा कि विपक्ष का एजेंडा पूरी तरह से बेसुरा और बे-ताल है। किसी भी रूप में भाषा का दुरुपयोग सराहा नहीं जा सकता है। शब्दों का चयन बहुत ही गंभीरता से करना होता है। हालांकि चुनावी माहौल अलग ढंग का होता है। यह पहली बार नहीं है जब आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। पहले भी ऐसा होता रहा है। इस दौरान कुछ बातें ऐसी भी निकलकर सामने आई हैं जो लोगों को जानना जरूरी थीं। उनका पर्दाफाश हुआ है। वास्तव में भारत में लोकतंत्र है, बोलने की आजादी पर कोई लगाम नहीं है।
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उन्होंने कहा कि मतदान के मामले में वाराणसी पूरे देश के सामने नजीर पेश करे। काशी की जनता मतदान के दिन घरों से निकलकर बूथों तक आए और अपनी शक्ति का इस्तेमाल करे। उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम पर कहा कि निर्माण और ध्वंस की प्रक्रिया तो सतत है जो अनादि काल से चलती आ रही है। शरीर तो बदलता रहता है, लेकिन आत्मा वही रहती है। इसके उपरांत उन्होंने पद्मभूषण पं. छन्नू लाल मिश्र से भी मुलाकात की।
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