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एक आरटीआई, दो जवाब, वो भी अधूरा
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वाराणसी। बीएचयू सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रामा सेंटर में एमटीएस (मल्टी टॉस्किंग स्टाफ) की तैनाती पर सवाल खड़ा होने लगे हैं। इसको लेक र गठित कमेटी की रिपोर्ट को आरटीआई के तहत मांगे जाने पर जो जवाब आया है, वह बेहद चौकाने वाला है। बीएचयू प्रशासन ने दो अलग-अलग जवाब दिए हैं। इसमें तैनाती पर गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट मांगी गई जिसमें एक अप्रैल को कुलसचिव कार्यालय ने जवाब दिया है कि कमेटी से जुड़े कागजात रिकार्ड में नहीं हैं जबकि चार अप्रैल को चिकित्सा अधीक्षक ने जवाब दिया है कि यह आरटीआई के दायरे में नहीं है।
अस्पताल और ट्रामा सेंटर में ओपीडी, वार्ड सहित अन्य कार्यालयों में करीब 500 से अधिक एमटीएस स्टाफ की तैनाती दो साल के भीतर हुई है। एक निजी सिक्योरिटी कंपनी के माध्यम से हुई तैनाती में सभी के लिए अलग-अलग मानदेय का निर्धारण किया गया है। किसी को आठ से दस हजार तो किसी को पंद्रह हजार रुपये तक मानदेय का निर्णय लिया गया था। इस बीच तैनाती पर सवाल उठने लगा तो अस्पताल प्रशासन ने चार सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया था, जिसकी रिपोर्ट भी दिसंबर 2018 के दूसरे सप्ताह में जमा हो गई है। 13 मार्च को राजवारी निवासी संजय कुमार सिंह ने आरटीआई के माध्यम से जांच कमेटी की प्रमाणित प्रति मांगी तो प्रशासन देने से कतरा रहा है।
जिस जांच कमेटी की रिपोर्ट के बारे में कुलसचिव कार्यालय कोई जानकारी न होने की बात कर रहा है, उसे अस्पताल प्रशासन के साथ ही कुलपति कार्यालय को भी दिया जा चुका है। सूत्रों की माने तो डॉ. डीके सिंह की अध्यक्षता वाली कमेटी ने इसमें तैनात एमटीएस स्टाफ की योग्यता पर सवाल खड़ा करने के साथ ही अपनों को लाभ दिए जाने का जिक्र किया है। इसके अलावा एक ही परिवार के चार-पांच लोगों के साथ ही अस्पताल के चिकित्सकों के नाम पर तैनाती का भी जिक्र है।
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अस्पताल और ट्रामा सेंटर में ओपीडी, वार्ड सहित अन्य कार्यालयों में करीब 500 से अधिक एमटीएस स्टाफ की तैनाती दो साल के भीतर हुई है। एक निजी सिक्योरिटी कंपनी के माध्यम से हुई तैनाती में सभी के लिए अलग-अलग मानदेय का निर्धारण किया गया है। किसी को आठ से दस हजार तो किसी को पंद्रह हजार रुपये तक मानदेय का निर्णय लिया गया था। इस बीच तैनाती पर सवाल उठने लगा तो अस्पताल प्रशासन ने चार सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया था, जिसकी रिपोर्ट भी दिसंबर 2018 के दूसरे सप्ताह में जमा हो गई है। 13 मार्च को राजवारी निवासी संजय कुमार सिंह ने आरटीआई के माध्यम से जांच कमेटी की प्रमाणित प्रति मांगी तो प्रशासन देने से कतरा रहा है।
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जिस जांच कमेटी की रिपोर्ट के बारे में कुलसचिव कार्यालय कोई जानकारी न होने की बात कर रहा है, उसे अस्पताल प्रशासन के साथ ही कुलपति कार्यालय को भी दिया जा चुका है। सूत्रों की माने तो डॉ. डीके सिंह की अध्यक्षता वाली कमेटी ने इसमें तैनात एमटीएस स्टाफ की योग्यता पर सवाल खड़ा करने के साथ ही अपनों को लाभ दिए जाने का जिक्र किया है। इसके अलावा एक ही परिवार के चार-पांच लोगों के साथ ही अस्पताल के चिकित्सकों के नाम पर तैनाती का भी जिक्र है।
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