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परंपरा और आधुनिकता का समन्वय ही रामकथा

Tue, 26 Feb 2019 01:38 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 26 Feb 2019 01:38 AM IST
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परंपरा और आधुनिकता का समन्वय ही रामकथा
वाराणसी। बीएचयू के एकेडमिक स्टाफ कॉलेज में चल रहे व्याख्यान श्रृंखला में सोमवार को भारतीय भाषाआें में रामकथा के महत्व पर चर्चा हुई। भोजपुरी अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि रामकथा में राम अवांतर है और कथा प्रमुख है। परंपरा और आधुनिकता का समन्वय ही रामकथा की विशेषता है।
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‘संशय व संवाद के संदर्भ में रामकथा का विकास: बावला जी के भोजपुरी काव्य रामचरित्र के विशेष संदर्भ में’ विषय पर बोलते हुए प्रो. शुक्ल ने कहा कि बाल्मीकि से बावला तक की रामकथा सातत्यता और परिवर्तन की कथा है। बावला भोजपुरी भाषा की सांस्कृतिक जमीन के सबसे बड़े कवि हैं। वे बनवासी चेतना में विश्वास करते हैं। कहा कि बावला की रामकथा लोक जीवन से बहुत गहरे तक जुड़कर चलती है। निषाद राज, जटायु और शबरी की कथा के माध्यम से उन्होंने रामकथा में हाशिये के समाज की चर्चा की। उन्होंने कहा कि इन प्रसंगों में एक तरफ आख्यान की बहु पाठीयता है तो दूसरी तरफ पाठगत वर्चस्व को तोड़ने का प्रयास भी। यहां सामाजिक बहिष्करण व बौद्धिक आतंक दोनो से मुक्ति का प्रयास है। कार्यक्रम की अध्यक्षता भारत अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो. सदाशिव द्विवेदी, संचालन प्रो. चंपा सिंह और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रमोद कुमार पांडेय ने किया।
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