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घर-घर हुई नाग देवता की पूजा
Updated Fri, 17 Aug 2018 02:16 AM IST
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ज्ञानपुर। नाग देवता की उपासना का पर्व नाग पंचमी बुधवार को जिले में धूमधाम से मनाया गया। घर-घर नाग देवता की पूजा की गई। शिवालयों में नाग देव को दूध और लावा चढ़ाकर सुख सौभाग्य की कामना की गई। शिव मंदिरों पर सुबह से लेकर शाम तक दर्शन-पूजन चलता रहा। साथ ही कुश्ती, कबड्डी, भेड़ा दंग, घुड़सवारी आदि खेल प्रतियोगिताएं भी हुईं। नाग पंचमी नाग देवता की आराधना का पारंपरिक पर्व है। मान्यता है कि इस दिन नागदेव को दूध और लावा अर्पित करने से वह प्रसन्न होते हैं और घर में खुशियों का आगमन होता है। बुधवार को नागपंचमी के अवसर पर कालीन नगरी के शिवालयों पर हर-हर महादेव के जयकारे गूंज उठे। इस दौरान श्रद्धालुओं ने नाग देवता को दूध और लावा चढ़ाकर सुख सौभाग्य की कामना की। ज्ञानपुर नगर स्थित हरिहरनाथ धाम में भोर से ही नाग पंचमी के पूजन के लिए श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया। इसके साथ ही गांवों की गलियों, पगडंडियों और नुक्कड़ों पर नाग देव के लिए लावा दूध रखा गया। क्षेत्र के सभी शिवालयों पर श्रद्धालुओं की भीड़ पूरे दिन लगी रही। ज्ञानपुर नगर से सटे भिदिउरा गांव में ग्रामीणों ने शंकर और पार्वती के वेश में झांकी निकाली। इस दौरान वे भजन-कीर्तन करते चल रहे थे। शिवभक्तों ने पूरे गांव का भ्रमण किया। नाग पंचमी के अवसर पर घर-घर पकवान बने। बच्चों ने त्योहार का खूब आनंद लिया। नाग पंचमी के अवसर पर जगह-जगह खेल प्रतियोगिताएं हुईं। इनमें खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। मोढ़ संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के कस्तूरीपुर गांव में नागपंचमी के अवसर पर भेड़ा दंगल का आयोजन किया गया। इसमें दो दर्जन से अधिक भेड़ा स्वामी अपने-अपने भेड़ों के साथ पहुंचे थे। दूर दूर से आए भेड़ा स्वामियों ने दिन के करीब 11 बजे से भेड़ों की लड़ाई शुरू की। भेड़ा कुश्ती का आनंद लेने के लिए दूर-दराज से लोग आए थे। दंगल में बैरा गांव के सतलू का भेड़ा नंबर एक बना और चकचंदा के पृथ्वीराज के भेड़े को दूसरा स्थान मिला। इस मौके पर कुश्ती प्रतियोगिता के अध्यक्ष सूर्यमणि यादव, अमरनाथ यादव, मुरली यादव, प्रभु गौड़, दीना पाल, ज्ञानी पाल, करिया पाल के अलावा बड़ी संख्या में लोग रहे। इसी मैदान में घोड़ा रेस भी हुई।
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