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रोजा रख इबादत कर रहे बच्चे
Updated Mon, 21 May 2018 12:56 AM IST
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भदोही। रमजान को लेकर नन्हें-मुन्नों में भी बेहद उत्साह है। भीषण गर्मी के बावजूद बच्चे भी रोजा रखने में बड़े-बुजुर्गों से पीछे नहीं हैं। बहुत से बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने पहली बार रोजा शुरू किया है। अपने माता-पिता और भाई-बहनों के साथ ये बच्चे नमाज कर अल्लाह की इबादत कर रहे हैं। कुरआन पाक की तिलावत के साथ पांचों की वक्त की नमाज भी करते हैं।
जमुनीपुर कालोनी के मो. फसीह की आठ वर्ष की बेटी फजीला अंसारी, बाजार सलाबत खां के आफताब आलम की बेटी आठ वर्ष की माशूदा, पीरखांपुर के जावेद अंसारी की 10 वर्षीय बेटी नवेरा जावेद, नैरंग आलम खां के बेटे 10 वर्षीय मो.अनस खान, सभासद दानिश सिद्दीकी की नौ वर्षीय बेटी तायबा, काजीपुर के अरशद के बेटे 10 वर्षीय मो. इजान, जावेद अहमद के नौ वर्षीय बेटे जुनैद अहमद, फारूख अंसारी के नौ वर्षीय बेटे शाहिद अंसारी लगातार रोजे रखकर बड़ों को मात दे रहे हैं। जावेद अंसारी ने बताया कि उनकी बेटी रमजान के पहले से रोजा रखने की जिद कर रही थी। मो. फसीह का कहना था कि बच्चे अगर रोजा रखना चाहें तो उनकी बात पूरी करनी चाहिए। उधर, रोजा रखने के साथ ही बच्चे इबादत कर रहे हैं। कुरआन पाक की तिलावत के साथ पांचों की वक्त की नमाज उनकी दिनचर्या में शामिल है। इस बावत मौलाना अब्दुस्समद जेयाई कहते हैं कि हर बालिग मुसलमान पर रोजा फर्ज है। बच्चे चाहें तो रोजा रख सकते हैं। मां-बाप को लगे कि बच्चे रोजा पूरा कर लेंगे तो उन्हें रोकना नहीं चाहिए।
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जमुनीपुर कालोनी के मो. फसीह की आठ वर्ष की बेटी फजीला अंसारी, बाजार सलाबत खां के आफताब आलम की बेटी आठ वर्ष की माशूदा, पीरखांपुर के जावेद अंसारी की 10 वर्षीय बेटी नवेरा जावेद, नैरंग आलम खां के बेटे 10 वर्षीय मो.अनस खान, सभासद दानिश सिद्दीकी की नौ वर्षीय बेटी तायबा, काजीपुर के अरशद के बेटे 10 वर्षीय मो. इजान, जावेद अहमद के नौ वर्षीय बेटे जुनैद अहमद, फारूख अंसारी के नौ वर्षीय बेटे शाहिद अंसारी लगातार रोजे रखकर बड़ों को मात दे रहे हैं। जावेद अंसारी ने बताया कि उनकी बेटी रमजान के पहले से रोजा रखने की जिद कर रही थी। मो. फसीह का कहना था कि बच्चे अगर रोजा रखना चाहें तो उनकी बात पूरी करनी चाहिए। उधर, रोजा रखने के साथ ही बच्चे इबादत कर रहे हैं। कुरआन पाक की तिलावत के साथ पांचों की वक्त की नमाज उनकी दिनचर्या में शामिल है। इस बावत मौलाना अब्दुस्समद जेयाई कहते हैं कि हर बालिग मुसलमान पर रोजा फर्ज है। बच्चे चाहें तो रोजा रख सकते हैं। मां-बाप को लगे कि बच्चे रोजा पूरा कर लेंगे तो उन्हें रोकना नहीं चाहिए।
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