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166 नहीं, अब तीन सौ भवनों का होगा अधिग्रहण!0
Updated Sat, 28 Apr 2018 02:28 AM IST
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वाराणसी। काशी विश्वनाथ मंदिर विस्तारीकरण योजना की जद में चौक से लेकर मणिकर्णिका घाट तक के तीन सौ भवन आएंगे। पहले चरण में मंदिर प्रशासन की ओर से 166 भवनों का सर्वे किया गया था और इसमें से 71 की रजिस्ट्री भी करा ली गई है। इस मामले में नगर निगम ने 134 भवनों की सूची वीडीए को सौंपी है। विभाग इन भवनों के सर्वे के बाद भौतिक सत्यापन कराएगा। इसके बाद इस मामले में आगे कार्रवाई की जाएगी।
निगम के कर्मचारियों की मानें तो इस दायरे में विशालाक्षी मंदिर समेत कई छोटे-बड़े मंदिर भी आएंगे। इस मामले में मंदिर प्रशासन ने अभी तक अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की और अभी तक कॉरिडोर योजना का ब्लूप्रिंट जनता के सामने नहीं रखा है। प्रोजेक्ट के लिए साढ़े छह सौ करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया है। इसमें से अभी तक 40 करोड़ रुपये मिल चुके हैं।
मंदिर प्रशासन ने इसमें से अधिकतर विवादित भवनों की ही खरीद-फरोख्त की है। सपा के एमएलसी शतरूद्र प्रकाश ने आरोप लगाया था कि मंदिर प्रशासन रिहाइशी भवनों को व्यावसायिक दिखाकर रजिस्ट्री करा रहा है। इसके अलावा मंदिर विस्तारीकरण के लिए जो जमीन खरीदी जा रही है उसे भी राज्यपाल के नाम से खरीदा जा रहा है। इसके अलावा तथ्यों को छुपाकर और शासनादेश के विरुद्ध जाकर भवनों की रजिस्ट्री कराई जा रही है।
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धरोहर समिति का कहना है कि विस्तारीकरण के नाम पर काशी की धरोहर से खिलवाड़ किया जा रहा है। धरोहर अधिनियम की बात करें तो विकास के नाम पर सौ साल पुराने शहर की डिजाइन से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है। ऐसे में काशी तो विश्व की सबसे प्राचीनतम नगरी है और जहां विकास की बात हो रही है वहां सैकड़ों साल पुराने मंदिर व धरोहरों को ध्वस्त करने का कुचक्र किया जा रहा है।
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निगम के कर्मचारियों की मानें तो इस दायरे में विशालाक्षी मंदिर समेत कई छोटे-बड़े मंदिर भी आएंगे। इस मामले में मंदिर प्रशासन ने अभी तक अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की और अभी तक कॉरिडोर योजना का ब्लूप्रिंट जनता के सामने नहीं रखा है। प्रोजेक्ट के लिए साढ़े छह सौ करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया है। इसमें से अभी तक 40 करोड़ रुपये मिल चुके हैं।
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मंदिर प्रशासन ने इसमें से अधिकतर विवादित भवनों की ही खरीद-फरोख्त की है। सपा के एमएलसी शतरूद्र प्रकाश ने आरोप लगाया था कि मंदिर प्रशासन रिहाइशी भवनों को व्यावसायिक दिखाकर रजिस्ट्री करा रहा है। इसके अलावा मंदिर विस्तारीकरण के लिए जो जमीन खरीदी जा रही है उसे भी राज्यपाल के नाम से खरीदा जा रहा है। इसके अलावा तथ्यों को छुपाकर और शासनादेश के विरुद्ध जाकर भवनों की रजिस्ट्री कराई जा रही है।
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धरोहर समिति का कहना है कि विस्तारीकरण के नाम पर काशी की धरोहर से खिलवाड़ किया जा रहा है। धरोहर अधिनियम की बात करें तो विकास के नाम पर सौ साल पुराने शहर की डिजाइन से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है। ऐसे में काशी तो विश्व की सबसे प्राचीनतम नगरी है और जहां विकास की बात हो रही है वहां सैकड़ों साल पुराने मंदिर व धरोहरों को ध्वस्त करने का कुचक्र किया जा रहा है।