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एआरटीओ कार्यालय में व्यवस्थाएं दुरुस्त
Updated Wed, 14 Jun 2017 01:31 AM IST
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जौनपुर। एआरटीओ कार्यालय इस समय राइट टाइम हो गया है। डीएल से लेकर रजिस्ट्रेशन तक नियमों के तहत हो रहा है। वैसे दलाल कार्यालय का चक्कर पहले जैसे ही लगा रहे हैं। लेकिन इस समय जो सब टाइम के हिसाब से चल रहा है इसे एआरटीओ आरएस यादव पर हुई कार्रवाई के भय से जोड़कर देखा जा रहा है।
एआरटीओ कार्यालय में डीएल बनवाने के लिए 1500 से 2000 रुपये खर्च करने पड़ते थे। यह पैसे दलाल लोगों से बाहर ही ऐंठ लेते थे। नियम है कि आनलाइन डीएल के लिए 350 रुपये जमा किया जाए। उसके बाद फार्म कार्यालय में जमा कर फोटोग्राफी और कम्प्यूटर पर परीक्षा देना पड़ता है। पास होने पर ही लाइसेंस जारी होता है और उसे डाक के माध्यम से भेजा जाता है। इसमें तमाम तरह की शिकायतें आने के बाद डीएम और एसपी ने हाल में ही छापा मारा था लेकिन कोई खास कमी पकड़ में नही आई। जहां तक गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन का सवाल है, वह सीधे डीलर के कर्मचारी लेकर आते हैं और रजिस्ट्रेशन कराते हैं। पता प्रमाणित करने के लिए डाक से रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। वैसे कुछ अधिकारी इसमें भी घाल मेल करने में लगे हुए हैं। लेकिन उनकी दाल गल नही पा रही है।
अब तो स्थिति यह है कि परिवहन विभाग का कोई एआरटीओ, पीटीओ और लिपिक लेन देन की फोन पर न तो बात कर रहा है और न ही कार्यालय में पैसा ही पकड़ रहा है। उसे इस बात का भय है कि कहीं वह भी आरएस यादव जैसे प्रकाश में न आ जाए। जो भी हो विभाग के राइट टाइम होने से कुछ दलालों की आमदनी कम हो गई है। एआरटीओ प्रशासन अनिल कुमार राय का कहना है कि नियमों के तहत डीएल बन रहा है और रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है।
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एआरटीओ कार्यालय में डीएल बनवाने के लिए 1500 से 2000 रुपये खर्च करने पड़ते थे। यह पैसे दलाल लोगों से बाहर ही ऐंठ लेते थे। नियम है कि आनलाइन डीएल के लिए 350 रुपये जमा किया जाए। उसके बाद फार्म कार्यालय में जमा कर फोटोग्राफी और कम्प्यूटर पर परीक्षा देना पड़ता है। पास होने पर ही लाइसेंस जारी होता है और उसे डाक के माध्यम से भेजा जाता है। इसमें तमाम तरह की शिकायतें आने के बाद डीएम और एसपी ने हाल में ही छापा मारा था लेकिन कोई खास कमी पकड़ में नही आई। जहां तक गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन का सवाल है, वह सीधे डीलर के कर्मचारी लेकर आते हैं और रजिस्ट्रेशन कराते हैं। पता प्रमाणित करने के लिए डाक से रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। वैसे कुछ अधिकारी इसमें भी घाल मेल करने में लगे हुए हैं। लेकिन उनकी दाल गल नही पा रही है।
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अब तो स्थिति यह है कि परिवहन विभाग का कोई एआरटीओ, पीटीओ और लिपिक लेन देन की फोन पर न तो बात कर रहा है और न ही कार्यालय में पैसा ही पकड़ रहा है। उसे इस बात का भय है कि कहीं वह भी आरएस यादव जैसे प्रकाश में न आ जाए। जो भी हो विभाग के राइट टाइम होने से कुछ दलालों की आमदनी कम हो गई है। एआरटीओ प्रशासन अनिल कुमार राय का कहना है कि नियमों के तहत डीएल बन रहा है और रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है।
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