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जिला जेल में नहीं है महिला गार्ड
Updated Wed, 07 Jun 2017 10:51 PM IST
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सोनभद्र। लंबी मशक्कत के बाद गुरमा स्थित जिला कारागार का संचालन तो शुरू हो गया लेकिन सात माह बाद भी कारागार की सुरक्षा के पुुख्ता इंतजाम नहीं हो सके हैं। एक भी महिला सुरक्षा गार्ड की तैनाती न होने से महिला मुलाकातियों की जहां तलाशी नहीं हो पा रही है। वहीं पुरुष गार्डों के लिए सृजित 133 पदों के मुकाबले अब तक महज 36 गार्ड ही तैनात हो पाए हैं। इसमें से छह को दूसरे जेलों से संबद्ध कर दिया गया है। उदासीनता की स्थिति यह है कि यह जेल सूबे का एकमात्र ऐसा जेल है, जिसे पूर्णकालिक अधीक्षक तक नहीं मिल सका है। ऐसे में नक्सल प्रभावित एरिया में स्थापित जेल के सुरक्षा की यह चूक किसी दिन बड़ी घटना का कारण बन सकती है।
पेयजल, रख-रखाव को लेकर पहले से समस्या का सामना कर रहे कारागार में अब सुरक्षा बड़ा मसला बन गया है। विभिन्न अपराधों में निरुद्ध एवं सजा पाए 574 बंदी/ कैदी यहां रखे गए हैं। विभागीय तौर पर एक कारागार अधीक्षक के अलावा पांच उप कारापार के पद का भी सृजन किया गया है। तैनाती की स्थिति यह है कि अभी भी यहां दो कारापाल तैनात हुए हैं।
वह भी दूसरे कारागार से जुड़े हुए हैं। यहां के लिए एक भी पूर्णकालिक कारापाल की तैनाती नहीं हुई है। यह हाल तब है जब, नक्सल प्रभावित जिले का कारागार होने के कारण, इसे अति संवेदनशील माना गया है। खुद विभाग के लोग भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि महिला गार्ड की तैनाती न होने से महिला मुलाकातियों की तलाशी नहीं हो पा रही है। किसी मामले में शक होने पर महिला मुलाकातियों से गहन पूछताछ भी संभव नहीं हो पा रही है। ऐसे में महिलाओं की आड़ लेकर इस जेल में कब कौन सा हथियार या सामान पहुंचा दिया जाए, कहना मुश्किल है।
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अगर जेल में किसी कारण कैदियों के उपद्रव की स्थिति बने तो उससे भी निबटने के लिए न तो संख्या बल है, ना ही कोई विशेष इंतजाम। उधर, जेलर रमाकांत कहते हैं कि एक तो जेल सुनसान इलाके है वहीं कम स्टाफ के चलते वह लोग खुद चिंतित हैं। स्टाफ की कमी को लेकर जिला प्रशासन के साथ ही शासन से कई बार पत्राचार कर चुके हैं।
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पेयजल, रख-रखाव को लेकर पहले से समस्या का सामना कर रहे कारागार में अब सुरक्षा बड़ा मसला बन गया है। विभिन्न अपराधों में निरुद्ध एवं सजा पाए 574 बंदी/ कैदी यहां रखे गए हैं। विभागीय तौर पर एक कारागार अधीक्षक के अलावा पांच उप कारापार के पद का भी सृजन किया गया है। तैनाती की स्थिति यह है कि अभी भी यहां दो कारापाल तैनात हुए हैं।
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वह भी दूसरे कारागार से जुड़े हुए हैं। यहां के लिए एक भी पूर्णकालिक कारापाल की तैनाती नहीं हुई है। यह हाल तब है जब, नक्सल प्रभावित जिले का कारागार होने के कारण, इसे अति संवेदनशील माना गया है। खुद विभाग के लोग भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि महिला गार्ड की तैनाती न होने से महिला मुलाकातियों की तलाशी नहीं हो पा रही है। किसी मामले में शक होने पर महिला मुलाकातियों से गहन पूछताछ भी संभव नहीं हो पा रही है। ऐसे में महिलाओं की आड़ लेकर इस जेल में कब कौन सा हथियार या सामान पहुंचा दिया जाए, कहना मुश्किल है।
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अगर जेल में किसी कारण कैदियों के उपद्रव की स्थिति बने तो उससे भी निबटने के लिए न तो संख्या बल है, ना ही कोई विशेष इंतजाम। उधर, जेलर रमाकांत कहते हैं कि एक तो जेल सुनसान इलाके है वहीं कम स्टाफ के चलते वह लोग खुद चिंतित हैं। स्टाफ की कमी को लेकर जिला प्रशासन के साथ ही शासन से कई बार पत्राचार कर चुके हैं।