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कजरी गाकर दी गालियों की न्योछावर
Updated Thu, 30 Aug 2018 01:04 AM IST
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ज्ञानपुर। लोक परंपरा का महापर्व कजरी बुधवार को जिले में धूमधाम से मनाया गया। भोरी-महजूदा के ऐतिहासिक मेले में जहां दो गांवों की महिलाओं ने एकत्र होकर पारंपरिक ढंग से एक-दूसरे को गालियों से नवाजा, वहीं जगह-जगह मेले, कजरी और खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इससे समूची कालीन नगरी कजरी के परंपरागत उत्साह में सराबोर रही। भोरी-महजूदा के ऐतिहासिक कजरी मेले में परंपरा की इंद्रधनुषी छटा बिखरी। बड़ी संख्या में महिलाओं ने आमने-सामने होकर परंपरागत रूप से गालियां देकर रस्मअदायगी की तो मिठाई, चाट-फुल्की की दुकानों और झूले-सर्कस मेले का आकर्षण बढ़ाते रहे। ललकार कर गालियां न्योछावर कर रहीं महिलाओं की परंपरा और मेले का आनंद उठाने के लिए हजारों की तादाद में लोग पहुंचे थे। आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज के लोग भी भोरी-महजूदा की ऐतिहासिकता को समझने के लिए मेले में पहुंचे। मेले में गुड़हिया जलेबी और झूला खास आकर्षण रहा। सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। इसमें महिला और पुरुष जवानों के अलावा पीएसी भी लगाई गई थी। साथ ही पुलिस के बड़े अधिकारी भी मेला क्षेत्र का चक्रमण करते रहे। कजरी का उल्लास जिले के विभिन्न क्षेत्रों में छाया रहा। जंगीगंज: क्षेत्र के विभिन्न गांवों में कजरी के त्योहार को लेकर भारी उत्साह रहा। विभिन्न घरों की महिलाओं ने नियत स्थान (चौघट) पर एकत्रित होकर रात्रि जागरण के पश्चात अगले दिन तड़के सामूहिक रूप से गांव की परिक्रमा कर अपने मायके और ससुराल पक्ष के स्वास्थ्य और संपन्नता के लिए प्रार्थना की। परंपरा है कि गांव में ही तालाब किनारे पर स्थित देवी मंदिर पर सज संवर कर पूजा आदि के बाद मिट्टी की पिंडी में पहले रोपित जौ के बीजों के बेहन को तालाब में डुबकी लगाकर बेहन उखाड़ कर पुन: पूजा-पाठ के बाद उसको लेकर पिता चाचा और भाइयों के कानों पर बांधकर आशीर्वाद लेती हैं। इसके बदले में नेग स्वरूप धन और उपहार प्राप्त करती हैं। वर्षों से मनाए जाने वाले इस त्योहार को लेकर विवाहिताओं और युवतियों में उत्साह रहता है, जिसे मनाने के लिए वे ससुराल से मायके आ जाती हैं और पूरे उत्साह से त्योहार मनाती हैं। पुरुषों ने भी इकट्ठे होकर जगह जगह कबड्डी, कूड़ी आदि प्रतियोगिताओं का आयोजन कर जोर आजमाइश की। कौलापुर: क्षेत्र के धानापुर दक्षिणी गांव में कजली के दिन मेले का आयोजन किया गया। यहां भी दो गांवों की लड़कियां तालाब के किनारे आम की डाली लेकर एक-दूसरे को गाली देती हैं और कजरी के गीत गाती हैं। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग सभी भाग लेते हैं और मेले में मनपसंद की चीजों की खरीदारी करते हैं। बुजुर्गों का मानना है कि यह काफी दिनों से पूर्व से चली आ रही परंपरा है। लोगों का मानना है कि जो लड़की ससुराल जाने के बाद ससुराल से आ कर के कजरी खेलती है उसके जीवन में सुख-सौभाग्य बढ़ता है। घोसिया: औराई क्षेत्र के उपरौठ गांव में पहलवानबीर बाबा पर रमेश भवरा और कौशल्या के बीच जवाबी कजली मुकाबला हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्र के समाजसेवी विकास दूबे ने दोनों गायकों को पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया। हजारों के बीच दोनों गायकों का मुकाबला हुआ। इसमें मुख्य रूप से रामसहाय जायसवाल, रामधनी सरोज, सोपाल सरोज, राजेश सरोज, भुवर यादव, मोहन यादव, राकेश प्रजापति, कल्लू प्रजापति, छोटेलाल, चम्मन, विनोद, मंशाराम सरोज, छविनाथ, कमलेश तीजू बिंद आदि मौजूद थे। इसी तरह कजली के मौके पर चौरी क्षेत्र के दलापुर गांव में कबड्डी और कुश्ती प्रतियोगिता हुई। इसमें विभिन्न टीमों और पहलवानों ने जोर आजमाइश की।
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