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कालीन नगरी में गहराया पेयजल संकट
Updated Thu, 19 Apr 2018 12:56 AM IST
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भदोही। शहर के आधा दर्जन वार्डों में पेयजल संकट गहरा गया है। इससे तकरीबन 30 हजार की आबादी भीषण गर्मी में पीने के पानी के लिए बेहाल है। ज्यादातर हैंडपंप खराब हैं या फिर उनका पानी पीने लायक नहीं है। कुछ मोहल्लों में दूषित और दुर्गंधयुक्त पानी आ रहा है। ऐसे में लोगों को निजी समर्सिबल पंपों का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां सुबह-शाम लंबी कतारें लगती हैं।
भदोही नगर पालिका क्षेत्र के छह वार्ड ऐसे हैं, जहां पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है। ऐसे में 30 हजार की आबादी पेयजल की दुश्वारियों से जूझ रही है। बाकी वार्डों में पांच दशक पुरानी और जर्जर पाइपलाइन से लोगों की प्यास बुझाने के भरसक प्रयास किए जा रहे हैं। इस समस्या के बीच शहर में लगे निजी सबमर्सिबल पंप लोगों के लिए सहायक सिद्ध हो रहे हैं। जब पालिका का पानी नहीं मिलता तो निजी पंप वाले मदद के लिए आते हैं। कई वार्डों में लोग हैंडपंप के भरोसे हैं, जबकि कुछ वार्डों में तो पाइपलाइन होते हुए भी दूषित जलापूर्ति के चलते लोग पानी का उपयोग नहीं करते। घमहापुर, नूरखांपुर, छेड़ीबीर, तकिया कल्लन शाह, बंधवा, जल्लापुर आदि ऐसे वार्ड हैं, जहां आज भी पेयजल के माकूल इंतजाम नहीं हैं। रजपुरा हरिजन बस्ती में, कुशियरां यादव और हरिजन बस्ती, सरैैयां में पाइपलाइन की व्यवस्था नहीं है। पूर्व सभासद विनोद कुमार सोनकर ने कहा कि हैंडपंप पानी की जरूरत पूरी नहीं कर पाता। शहरी क्षेत्र का मतलब होता है बुनियादी सुविधाएं होना, लेकिन यहां तो पानी भी उपलब्ध नहीं है।
मोहल्ला पीरखांपुर, काजीपुर में पांच दशक पुरानी पाइपलाइन से जलापूर्ति हो रही है। पीरखांपुर में दूषित जलापूर्ति के चलते लोग सप्लाई का पानी लेते तक नहीं। यह बात दीगर है कि वे लोग जल मूल्य और जलकर अदा कर देते हैं। जलमूल्य 150 रुपये से 375 रुपये प्रति वर्ष तक लिया जाता है। बसपा नेता बदरे आलम अंसारी ने कहा कि पालिका के पानी में दुर्गंध से पीना तो दूर नहाया भी नहीं जा सकता।
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घमहापुर में पाइपलाइन नहीं है। पुराना नया कुल 10 हैंडपंप होते हुए भी सात खराब चल रहे हैं। नूरखांपुर में कुल पांच हैंडपंप में से तीन खराब हैं। एक सबमर्सिबल पंप है, लेकिन उसका अधिकतर लोगों को लाभ नहीं मिल पाता। नगर पालिका चेयरमैन अशोक जायसवाल ने कहा कि जो व्यवस्था है, उसे और बेहतर बनाने की दिशा में काम हो रहा है। नगर को कम से तीन ओवरहैंड टैंक और पांच नलकूप की आवश्यकता है, जो शासन स्तर से प्रयास के बाद ही संभव है।
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भदोही नगर पालिका क्षेत्र के छह वार्ड ऐसे हैं, जहां पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है। ऐसे में 30 हजार की आबादी पेयजल की दुश्वारियों से जूझ रही है। बाकी वार्डों में पांच दशक पुरानी और जर्जर पाइपलाइन से लोगों की प्यास बुझाने के भरसक प्रयास किए जा रहे हैं। इस समस्या के बीच शहर में लगे निजी सबमर्सिबल पंप लोगों के लिए सहायक सिद्ध हो रहे हैं। जब पालिका का पानी नहीं मिलता तो निजी पंप वाले मदद के लिए आते हैं। कई वार्डों में लोग हैंडपंप के भरोसे हैं, जबकि कुछ वार्डों में तो पाइपलाइन होते हुए भी दूषित जलापूर्ति के चलते लोग पानी का उपयोग नहीं करते। घमहापुर, नूरखांपुर, छेड़ीबीर, तकिया कल्लन शाह, बंधवा, जल्लापुर आदि ऐसे वार्ड हैं, जहां आज भी पेयजल के माकूल इंतजाम नहीं हैं। रजपुरा हरिजन बस्ती में, कुशियरां यादव और हरिजन बस्ती, सरैैयां में पाइपलाइन की व्यवस्था नहीं है। पूर्व सभासद विनोद कुमार सोनकर ने कहा कि हैंडपंप पानी की जरूरत पूरी नहीं कर पाता। शहरी क्षेत्र का मतलब होता है बुनियादी सुविधाएं होना, लेकिन यहां तो पानी भी उपलब्ध नहीं है।
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मोहल्ला पीरखांपुर, काजीपुर में पांच दशक पुरानी पाइपलाइन से जलापूर्ति हो रही है। पीरखांपुर में दूषित जलापूर्ति के चलते लोग सप्लाई का पानी लेते तक नहीं। यह बात दीगर है कि वे लोग जल मूल्य और जलकर अदा कर देते हैं। जलमूल्य 150 रुपये से 375 रुपये प्रति वर्ष तक लिया जाता है। बसपा नेता बदरे आलम अंसारी ने कहा कि पालिका के पानी में दुर्गंध से पीना तो दूर नहाया भी नहीं जा सकता।
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घमहापुर में पाइपलाइन नहीं है। पुराना नया कुल 10 हैंडपंप होते हुए भी सात खराब चल रहे हैं। नूरखांपुर में कुल पांच हैंडपंप में से तीन खराब हैं। एक सबमर्सिबल पंप है, लेकिन उसका अधिकतर लोगों को लाभ नहीं मिल पाता। नगर पालिका चेयरमैन अशोक जायसवाल ने कहा कि जो व्यवस्था है, उसे और बेहतर बनाने की दिशा में काम हो रहा है। नगर को कम से तीन ओवरहैंड टैंक और पांच नलकूप की आवश्यकता है, जो शासन स्तर से प्रयास के बाद ही संभव है।