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13 को मनाई जाएगी महाशिवरात्रि
Updated Sat, 03 Feb 2018 02:16 AM IST
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वाराणसी। धर्मनगरी काशी में देवाधिदेव महादेव की आराधना का पर्व महाशिवरात्रि 13 फरवरी को मनाया जाएगा। दरअसल, महाशिवरात्रि की तिथि पर इस बार विद्वानों के साथ ही पंचांग में संशय की स्थिति को देखते हुए काशी विद्वत परिषद और बीएचयू के ज्योतिष विभाग ने संयुक्त रूप से यह निर्णय दिया है। ज्योतिष विभाग की गणना के अनुसार, निशीथ काल का समय 14 फरवरी के बजाय 13 फरवरी को मिल रहा है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भी महाशिवरात्रि 13 फरवरी को ही मनाई जाएगी।
बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में महाशिवरात्रि बेहद खास अंदाज में मनाई जाती है। दर्शन-पूजन और जलाभिषेक के साथ ही कई स्थानों से शिव बारात निकलती है। समूचा शहर बाराती बन इस उत्सव में शामिल होता है। इस बार महाशिवरात्रि की तिथि पर विद्वानों और पंचांग में संशय की स्थिति को देखते हुए बीएचयू के ज्योतिष विभाग ने बैठक की। ज्योतिष विभाग के प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि फाल्गुन कृष्णपक्ष की चतुर्दशी शिवरात्रि होती है। ईशान संहिता में वर्णित है कि ‘फाल्गुनकृष्णचर्तुदश्याम् आदि देवो महानिशि। शिवलिंगतयोद्भुत: कोटिसूर्यसमप्रभ:। तत्कालव्यापिनी ग्राह्या शिवरात्रिव्रते तिथि:।’ अर्थात फाल्गुन चतुर्दशी की मध्यरात्रि में आदिदेव भगवान शिव लिंगरूप में अमिटप्रभा के साथ उद्भूत हुए। इसलिए अर्धरात्रि से युक्त चतुर्दशी ही शिवरात्रि व्रत में मान्य है।
ज्योतिष संकाय प्रमुख प्रो. चंद्रमा पांडेय की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान तय किया गया कि धर्मशास्त्रीय वचन के अनुसार 13 फरवरी को चतुर्दशी का आरंभ रात्रि 10:22 बजे हो रहा है। इसकी समाप्ति 14 फरवरी की रात्रि 12:17 मिनट पर हो रही है। 13 फरवरी को निशीथ काल रात 11 बजकर 34 मिनट 30 सेकेंड से 12 बजकर 26 मिनट तक है, जबकि 14 फरवरी को 11 बज कर 35 मिनट 38 सेकेंड से शुरू होकर निशीथ काल 12 बजकर 27 मिनट दो सेकेंड तक है। 14 फरवरी को 12:17 बजे चतुर्दशी समाप्त हो जाने से पूर्ण निशीथ व्यापिनी नहीं मानी जा सकती।
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धर्मशास्त्रों के अनुसार 13 फरवरी को ही महाशिवरात्रि व्रतोत्सव है। काशी के महत्वपूर्ण पंचांगों में विश्व पंचांग एवं शिवमूर्ति हृषिकेश पंचांग में भी 13 फरवरी को ही महाशिवरात्रि का उल्लेख है। बीएचयू के ज्योतिष विभाग की बैठक में प्रो. विनय कुमार पांडेय, प्रो. चंद्रमौली उपाध्याय, आचार्य डॉ. शत्रुघभन त्रिपाठी, डॉ. सुभाष पांडेय, प्रो. धनंजय कुमार पांडेय, डॉ. राहुल मिश्रा शामिल रहे। उधर, काशी विद्वत परिषद के संगठन मंत्री पंडित ऋषि द्विवेदी ने बताया कि ज्योतिष गणना और पौराणिक मान्यताओं के हिसाब से 13 फरवरी को ही शिवरात्रि मनाई जाएगी।
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बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में महाशिवरात्रि बेहद खास अंदाज में मनाई जाती है। दर्शन-पूजन और जलाभिषेक के साथ ही कई स्थानों से शिव बारात निकलती है। समूचा शहर बाराती बन इस उत्सव में शामिल होता है। इस बार महाशिवरात्रि की तिथि पर विद्वानों और पंचांग में संशय की स्थिति को देखते हुए बीएचयू के ज्योतिष विभाग ने बैठक की। ज्योतिष विभाग के प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि फाल्गुन कृष्णपक्ष की चतुर्दशी शिवरात्रि होती है। ईशान संहिता में वर्णित है कि ‘फाल्गुनकृष्णचर्तुदश्याम् आदि देवो महानिशि। शिवलिंगतयोद्भुत: कोटिसूर्यसमप्रभ:। तत्कालव्यापिनी ग्राह्या शिवरात्रिव्रते तिथि:।’ अर्थात फाल्गुन चतुर्दशी की मध्यरात्रि में आदिदेव भगवान शिव लिंगरूप में अमिटप्रभा के साथ उद्भूत हुए। इसलिए अर्धरात्रि से युक्त चतुर्दशी ही शिवरात्रि व्रत में मान्य है।
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ज्योतिष संकाय प्रमुख प्रो. चंद्रमा पांडेय की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान तय किया गया कि धर्मशास्त्रीय वचन के अनुसार 13 फरवरी को चतुर्दशी का आरंभ रात्रि 10:22 बजे हो रहा है। इसकी समाप्ति 14 फरवरी की रात्रि 12:17 मिनट पर हो रही है। 13 फरवरी को निशीथ काल रात 11 बजकर 34 मिनट 30 सेकेंड से 12 बजकर 26 मिनट तक है, जबकि 14 फरवरी को 11 बज कर 35 मिनट 38 सेकेंड से शुरू होकर निशीथ काल 12 बजकर 27 मिनट दो सेकेंड तक है। 14 फरवरी को 12:17 बजे चतुर्दशी समाप्त हो जाने से पूर्ण निशीथ व्यापिनी नहीं मानी जा सकती।
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धर्मशास्त्रों के अनुसार 13 फरवरी को ही महाशिवरात्रि व्रतोत्सव है। काशी के महत्वपूर्ण पंचांगों में विश्व पंचांग एवं शिवमूर्ति हृषिकेश पंचांग में भी 13 फरवरी को ही महाशिवरात्रि का उल्लेख है। बीएचयू के ज्योतिष विभाग की बैठक में प्रो. विनय कुमार पांडेय, प्रो. चंद्रमौली उपाध्याय, आचार्य डॉ. शत्रुघभन त्रिपाठी, डॉ. सुभाष पांडेय, प्रो. धनंजय कुमार पांडेय, डॉ. राहुल मिश्रा शामिल रहे। उधर, काशी विद्वत परिषद के संगठन मंत्री पंडित ऋषि द्विवेदी ने बताया कि ज्योतिष गणना और पौराणिक मान्यताओं के हिसाब से 13 फरवरी को ही शिवरात्रि मनाई जाएगी।