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काट रहे थे मलाई, अब छूट रहे पसीने

Fri, 01 Dec 2017 02:06 AM IST
Updated Fri, 01 Dec 2017 02:06 AM IST
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काट रहे थे मलाई, अब छूट रहे पसीने
सेवापुरी। जिले के ग्राम पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों में गोलमाल पर अंकुश लगाने के लिए आईडी जनरेट के निर्देश के बाद ब्लाकों में हड़कंप मचा है। सीडीओ के खुद मानीटरिंग करने से अधिकारी और कर्मचारी दहशत में हैं। गुरुवार को सीडीओ चोलापुर ब्लाक पर पहुंचकर आईडी जनरेट का काम तेजी से करने की हिदायत दी। कहा कि इस काम में लापरवाही मिलने पर कार्रवाई तय है। वहीं लोग चर्चा कर रहे थे कि तब तो मलाई काट रहे थे अब पसीने छूट रहे हैं।
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अमर उजाला ने एलईडी स्ट्रीट लाइट, खड़ंजा व पीएम आवास में हुए घपलेबाजी की लगातार खबरें प्रकाशित होने पर प्रशासन हरकत आया था। जांच में कई गोलमाल के सामने आए थे। इस पर सीडीओ ने जिले के सभी खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वित्तीय वर्ष 2015-16, 2016-17, 2017-18 तक के सभी कार्यों के आईडी जनरेट हरहाल में कराएं। आईडी जनरेट कराने में किसी प्रकार की कोताही बरती गई तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी। ब्लाक पर लोग चुटकी लेकर चर्चा कर रहे थे कि तब तो मलाई काट रहे थे अब आईडी जनरेट करने में पसीने छूटने लगे हैं।
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सेवापुरी, आराजीलाइन, बड़ागांव के ब्लाकों में गुरुवार को नए और पुराने कार्यों की फाइल खंगालने में ब्लाक के अधिकारी और कर्मचारी जुटे रहे। सीडीओ के निरीक्षण के भय से अधिकारी व कर्मचारी तेजी से कार्यों में लग गए हैं। सीडीओ सुनील कुमार वर्मा बुधवार को बड़ागांव और बृहस्पतिवार को चोलापुर ब्लाक का औचक निरीक्षण कर आईडी जनरेट की जानकारी के साथ तेजी काम करने की हिदायत दी।
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जिले के सभी ब्लाकों में आईडी जनरेट करवाने के लिए मैं खुद औचक निरीक्षण कर रहा हूं। इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दास्त नहीं होगी। निरीक्षण के दौरान बड़ागांव व चोलापुर के बीडीओ को त्वरित गति से आईडी जनरेट कराने का निर्देश दिया गया है। सुनील कुमार वर्मा, सीडीओ

अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ ग्राम प्रधान भी दहशत में
पिछले तीन साल में हुए विकास कार्यों की आईडी जनरेट होने से कई गोलमाल सामने आएंगे। एक काम के कई बार भुगतान कराने के मामले तत्काल खुल जाएंगे। अधिकारियों और ग्राम प्रधानों की मिलीभगत से घपलेबाजी खुलकर सामने आ जाएगी। इससे अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ ग्राम प्रधान भी दहशत में हैं। उनको आभास हो गया है कि अब बचना मुश्किल है।
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