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प्रधानों-सचिवों के संगठन के दबाव में आया प्रशासन
Updated Tue, 19 Sep 2017 01:51 AM IST
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सेवापुरी। जिले के आठों ब्लाकों के गांवों में लोकल स्ट्रीट एलईडी लाइट और सोलर लाइट लगवा कर ब्रांडेड से ढाई गुना ज्यादा भुगतान के मामले में जिला प्रशासन की सक्रियता कुछ दिन के बाद ही कम हो गई। प्रशासनिक कार्रवाई रुकने के पीछे प्रधानों और सचिवों के संगठनों का दबाव बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि जिला प्रशासन को डर है कि सचिवों और प्रधानों के खिलाफ कार्रवाई की गई तो ग्राम पंचायतों में शौचालयों के निर्माण के साथ ब्लाकों के कार्य भी रुक जाएंगे। वहीं इस घोटाले में जिले के कुछ अधिकारियों के साथ कई ब्लाकों के खंड विकास अधिकारियों, ब्लाकों के एडीओ पंचायत भी शामिल हैं। ऐसे में अगर प्रशासन कड़ा रुख अपनाता है तो यह लोग भी कार्रवाई की जद में आ जाएंगे। ब्लाक मुख्यालयों पर प्रधानों के धरना-प्रदर्शन के दौरान जन प्रतिनिधियों ने यह इरादे भी जताए थे कि अगर वह फंसेंगे तो बड़े-बड़ों के कच्चे चिट्ठे भी खोलकर रख देंगे।
गौरतलब है कि बड़े घोटाले के इस मामले में ब्लाक के ग्राम पंचायत बडौरा, बेसहुपुर के साथ चोलापुर ब्लाक के ग्राम पंचायत पहाड़पुर, मुनारी के ग्राम पंचायत अधिकारी और ग्राम विकास अधिकारी के साथ चारों ग्राम प्रधानों के खिलाफ जंसा तथा चोलापुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। प्रधानों के खाते भी सीज करा दिए गए थे।
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गौरतलब है कि बड़े घोटाले के इस मामले में ब्लाक के ग्राम पंचायत बडौरा, बेसहुपुर के साथ चोलापुर ब्लाक के ग्राम पंचायत पहाड़पुर, मुनारी के ग्राम पंचायत अधिकारी और ग्राम विकास अधिकारी के साथ चारों ग्राम प्रधानों के खिलाफ जंसा तथा चोलापुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। प्रधानों के खाते भी सीज करा दिए गए थे।
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