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प्रेतकुंड में भटकती आत्माओं के नाम पिंडदान

Tue, 05 Sep 2017 02:07 AM IST
Updated Tue, 05 Sep 2017 02:07 AM IST
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प्रेतकुंड में भटकती आत्माओं के नाम पिंडदान

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वाराणसी। काशी में पतितपावनी गंगा के तटों से लेकर प्रमुख कुंडों और कूपों पर पूर्वजों के नाम पर तर्पण-अर्पण और श्राद्ध के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। वंशजों का रेला उमड़ने से पहले कुंडों से लेकर घाटों तक की सफाई शुरू करा दी गई है। पुरोहितों की चौकियां सजने लगी हैं तो कुशा, तिल, जौ, अक्षत, पुरवा का बाजार भी सज गया है। आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा गुरुवार से पितृपक्ष आरंभ होगा। इसी के साथ काशी में पूर्वजों के प्रति तर्पण-अर्पण और श्राद्ध शुरू हो जाएंगे।

भटकती आत्माओं की शांति के लिए पिशाचमोचन कुंड (बिमल तीर्थ) पर त्रिपिंडी श्राद्ध की भी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अकाल मृत्यु के चलते भटकने या फिर परेशान करने वाली आत्माओं की शांति के लिए पिशाचमोन कुंड पर विशेष कर्मकांड होंगे। पिशाचमोचन कुंड के कर्मकांडी पंडा मुन्ना लाल पांडेय ने बताया कि इस कुंड पर अशांत आत्माओं को तृप्त करने के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध किया जाएगा। पिशाचमोचन पर प्रेतकुंड में भटकती आत्माओं के नाम पर पिंडदान किया जाएगा। इस प्रेतकुंड में पिंडदान के साथ ही परिसर के पुराने वृक्ष में कीलें भी ठोंकी जाएंगी। भूतबाधा से परेशान महिलाओं, पुरुषों की भीड़ लगेगी और पिंडदान के साथ ही अन्य टोटके भी किए जाएंगे। पिशाचमोचन कुंड परिसर में टेंट-तंबू भी डाले जा रहे हैं। हालांकि पिशाचमोचन कुंड की इस बार रंगाई-पोताई भी नहीं कराई गई है, लेकिन कुंड परिसर से निकली नाली की सफाई नगर निगम ने शुरू करा दी है। महालया पर छह सितंबर से ही इस कुंड पर पिंडदान और श्राद्ध आरंभ हो जाएगा। मान्यता है कि यहां त्रिपिंडी श्राद्ध से पितरों को प्रेत बाधा और व्याधियों से मुक्ति मिल जाती है।
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