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बीएचयू ट्रामा सेंटर के कई फायर यंत्र एक्सपायर
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वाराणसी। बीएचयू ट्रामा सेंटर में व्यवस्थागत खामियां इस कदर हैं कि ओपीडी से लेकर सर्जरी वार्ड सहित अन्य वार्डों में भी एक्सपायरी डेट का अग्निशमन यंत्र लगाया गया है। अधिकारियों, चिकित्सकों से लेकर कर्मचारी भी रोज ट्रामा सेंटर में घूमते रहते हैं लेकिन किसी का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है। ऐसे में अगर आग लग गई तो स्थिति भयावह हो सकती है।
ट्रामा सेंटर में आने वाले मरीजों की सुविधा का दावा तो किया जाता है लेकिन हकीकत में बहुत सी ऐसी व्यवस्था है, जिसकी मानीटरिंग न करने से मरीजों को परेशानी हो रही है। इसमें जहां बेड की कमी से मरीज स्ट्रेचर पर पड़े रहते हैं, वहीं पेयजल की समुचित व्यवस्था न होने से पानी के लिए भी परेशानी करनी पड़ती है। इन सबके बीच अस्पताल में ओपीडी हाल से लेकर इमरजेंसी कक्ष, ऑपरेशन थिएटर के बाहर से लेकर अंदर वार्ड तक जहां भी अग्निशमन यंत्र लगे हैं, सब एक्सपायर हो गए हैं। कुछ 30 जनवरी 2019 तो कुछ 9 मई 2019 को एक्सपायर हो गए हैं। अगर पिछले साल की तरह कोई घटना घट जाए इन अग्निशमन यंत्र का इस्तेमाल करना भी ठीक नहीं होगा।
ट्रामा सेंटर में इस तरह की लापरवाही तब देखने को मिल रही है जब पिछले साल 17 अप्रैल 2018 को यूपीएस कक्ष में शार्ट सर्किट से आग लग गई थी। आग इतनी भयावह थी कि मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने में पसीने छूट गया थे, अफरातफरी मची थी सो अलग। उस समय अग्निशमन यंत्र से ही आग बुझाई गई थी, इसके बाद दमकल की तीन गाड़ियां पहुंची थीं।
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ट्रामा सेंटर में आने वाले मरीजों की सुविधा का दावा तो किया जाता है लेकिन हकीकत में बहुत सी ऐसी व्यवस्था है, जिसकी मानीटरिंग न करने से मरीजों को परेशानी हो रही है। इसमें जहां बेड की कमी से मरीज स्ट्रेचर पर पड़े रहते हैं, वहीं पेयजल की समुचित व्यवस्था न होने से पानी के लिए भी परेशानी करनी पड़ती है। इन सबके बीच अस्पताल में ओपीडी हाल से लेकर इमरजेंसी कक्ष, ऑपरेशन थिएटर के बाहर से लेकर अंदर वार्ड तक जहां भी अग्निशमन यंत्र लगे हैं, सब एक्सपायर हो गए हैं। कुछ 30 जनवरी 2019 तो कुछ 9 मई 2019 को एक्सपायर हो गए हैं। अगर पिछले साल की तरह कोई घटना घट जाए इन अग्निशमन यंत्र का इस्तेमाल करना भी ठीक नहीं होगा।
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ट्रामा सेंटर में इस तरह की लापरवाही तब देखने को मिल रही है जब पिछले साल 17 अप्रैल 2018 को यूपीएस कक्ष में शार्ट सर्किट से आग लग गई थी। आग इतनी भयावह थी कि मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने में पसीने छूट गया थे, अफरातफरी मची थी सो अलग। उस समय अग्निशमन यंत्र से ही आग बुझाई गई थी, इसके बाद दमकल की तीन गाड़ियां पहुंची थीं।
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