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तीन पार्टियों से चार बार सांसद रह चुके हैं रमाकांत
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आजमगढ़। जिले के राजनीतिक गलियारों में रमाकांत यादव काफी चर्चित चेहरा हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में सपा मुखिया मुलायम सिंह को भाजपा प्रत्याशी के रुप में रमाकांत ने नाकों चने चबवाए थे। रमाकांत चार बार फूलपुर पवई सीट से विधायक रह चुके हैं। रमाकांत 1985 में पहली बार निर्दलीय लड़कर विधानसभा चुनाव जीते थे। 1989 में भाजपा के टिकट पर विधायक बने। 1991 में समाजवादी जनता पार्टी और 1993 में सपा के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचे।
1996 में सपा के टिकट पर रमाकांत यादव पहली बार लोकसभा पहुंचे। उन्होंने बसपा के रामकृष्ण यादव को हराया। 1998 में ये पुन: सपा के टिकट पर मैदान में उतरे लेकिन बसपा के अकबर अहमद डंपी के हाथों इन्हें हार का सामना करना पड़ा। 1999 के चुनाव में पुन: सपा के टिकट पर सांसद बने। 2004 में वह बसपा में शामिल हो गए और सपा प्रत्याशी दुर्गा प्रसाद यादव को हराया।
2009 में बसपा से इनका मोह भंग हुआ और वह भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने इन्हें आजमगढ़ से प्रत्याशी घोषित कर दिया। बसपा के अकबर अहमद डंपी को हरा कर रमाकांत चौथी पर सांसद चुने गए। 2014 का चुनाव रमाकांत के राजनैतिक कैरियर में सबसे अहम रहा। जिस पार्टी के टिकट पर वह पहली बार संसद पहुंचे थे, उसी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के खिलाफ उन्होंने भाजपा प्रत्याशी के रूप में ताल ठोंकी।
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कुछ पूर्व सांसदों व विधायकों से विचार-विमर्श कर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की है। फिलहाल, राहुल गांधी व सोनिया गांधी के हाथों को मजबूत करने का प्रयास करूंगा। पार्टी के दिशानिर्देशों के अनुरूप आगे की रणनीति तय करूंगा। - रमाकांत यादव, पूर्व सांसद, आजमगढ़
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1996 में सपा के टिकट पर रमाकांत यादव पहली बार लोकसभा पहुंचे। उन्होंने बसपा के रामकृष्ण यादव को हराया। 1998 में ये पुन: सपा के टिकट पर मैदान में उतरे लेकिन बसपा के अकबर अहमद डंपी के हाथों इन्हें हार का सामना करना पड़ा। 1999 के चुनाव में पुन: सपा के टिकट पर सांसद बने। 2004 में वह बसपा में शामिल हो गए और सपा प्रत्याशी दुर्गा प्रसाद यादव को हराया।
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2009 में बसपा से इनका मोह भंग हुआ और वह भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने इन्हें आजमगढ़ से प्रत्याशी घोषित कर दिया। बसपा के अकबर अहमद डंपी को हरा कर रमाकांत चौथी पर सांसद चुने गए। 2014 का चुनाव रमाकांत के राजनैतिक कैरियर में सबसे अहम रहा। जिस पार्टी के टिकट पर वह पहली बार संसद पहुंचे थे, उसी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के खिलाफ उन्होंने भाजपा प्रत्याशी के रूप में ताल ठोंकी।
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कुछ पूर्व सांसदों व विधायकों से विचार-विमर्श कर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की है। फिलहाल, राहुल गांधी व सोनिया गांधी के हाथों को मजबूत करने का प्रयास करूंगा। पार्टी के दिशानिर्देशों के अनुरूप आगे की रणनीति तय करूंगा। - रमाकांत यादव, पूर्व सांसद, आजमगढ़