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सात वार, नौ त्योहार का शहर है बनारस
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वाराणसी। आईआईटी बीएचयू में काशी कथा के तत्वावधान में चल रही 14 दिवसीय कार्यशाला के नौवें दिन काशी में मनाए जाने वाले त्योहारों पर मंथन हुआ। पहले सत्र में नारायण द्रविड़ ने कहा कि काशी में त्योहारों की लंबी शृंखला है। उन्होंने प्रतिभागियों को रंगभरी एकादशी, होली, बुढ़वा मंगल, रतजगा से लेकर गणेशोत्सव, गंगा दशहरा, गुड्डे गुड़ियों की पूजा के बारे में विस्तार से बताया।
मालवीय उद्यमिता संवर्धन केंद्र में आयोजित सम्मेलन में द्रविड़ ने कहा कि काशी को सात वार-नौ त्योहार का शहर कहा जाता है। यहां रामलीला, कृष्णलीला, प्रह्लाद लीला के साथ ही सभी त्योहारों की अपनी अलग-अलग विशेषताएं हैं। दूसरे सत्र में काशी के लोकजीवन पर बोलते हुए डॉ. अमिताभ भट्टाचार्य ने कहा कि काशी में 27 धार्मिक संप्रदाय के लोग एक साथ रहते हैं। यह सहअस्तित्व का शहर है जहां लोग मृत्यु के लिए जीते हैं। बनारस में योग्य मृत्यु की तलाश हर धर्म के लोगों को आकर्षित करती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. एसएन उपाध्याय, संचालन प्रो. पीके मिश्र और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अवधेश दीक्षित ने किया। इस दौरान डॉ. सुजीत चौबे, अभिषेक यादव, राम चौबे, अजय कुशवाहा, जयप्रकाश चतुर्वेदी, अरविंद मिश्र आदि मौजूद रहे।
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मालवीय उद्यमिता संवर्धन केंद्र में आयोजित सम्मेलन में द्रविड़ ने कहा कि काशी को सात वार-नौ त्योहार का शहर कहा जाता है। यहां रामलीला, कृष्णलीला, प्रह्लाद लीला के साथ ही सभी त्योहारों की अपनी अलग-अलग विशेषताएं हैं। दूसरे सत्र में काशी के लोकजीवन पर बोलते हुए डॉ. अमिताभ भट्टाचार्य ने कहा कि काशी में 27 धार्मिक संप्रदाय के लोग एक साथ रहते हैं। यह सहअस्तित्व का शहर है जहां लोग मृत्यु के लिए जीते हैं। बनारस में योग्य मृत्यु की तलाश हर धर्म के लोगों को आकर्षित करती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. एसएन उपाध्याय, संचालन प्रो. पीके मिश्र और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अवधेश दीक्षित ने किया। इस दौरान डॉ. सुजीत चौबे, अभिषेक यादव, राम चौबे, अजय कुशवाहा, जयप्रकाश चतुर्वेदी, अरविंद मिश्र आदि मौजूद रहे।
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