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जनरल सेक्रेटरी के फैसले को चार पदाधिकारियों ने चुनौती दी
Updated Sat, 23 Dec 2017 02:17 AM IST
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वाराणसी। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य पद पर जगद्गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के अभिषेक को लेकर निलंबित किए गए भारत धर्म महामंडल के पांच पदाधिकारियों ने इस कार्रवाई के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। कार्यकारी अध्यक्ष शशिनंदन लाल दर समेत चार पदाधिकारियों की ओर से चेतावनी जारी की गई है।
इसमें कहा गया है कि जनरल सेक्रेटरी शंभू उपाध्याय को कौंसिल के किसी सदस्य को निलंबित करने का अधिकार नहीं है। इस संबंध में जारी कारण बताओ नोटिस का जवाब देते हुए कहा गया है कि भविष्य में इस तरह का अनधिकृत कदम उठाने से बाज आएं। जनरल सेक्रेटरी को कारण बताओ नोटिस जारी करने का भी अधिकार नहीं है।
कार्यकारी अध्यक्ष, सहायक मंत्री दिनेशमणि तिवारी, ज्वाइंट जनरल सेक्रेटरी सत्येंद्र मिश्रा और डिपार्टमेंटल सेक्रेटरी की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि जनरल सेक्रेटरी शंभू उपाध्याय महामंडल विरोधी कदम उठाने के दोषी हैं। इस अवैधानिक कदम पर विचार करने के लिए कौंसिल की बैठक बुलाने के लिए पत्र भेजा गया है। यदि कौंसिल की बैठक नहीं बुलाई गई तो सक्षम अधिकारी की ओर से बैठक बुलाकर बहुमत से इस तरह के अवैधानिक कार्यों के विरुद्ध जनरल सेक्रेटरी पर कार्रवाई की जाएगी।
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इन पदाधिकारियों ने जहां अपने साथ बहुमत होने का दावा किया, वहीं शंभू उपाध्याय पर महामंडल को तोड़ने का आरोप लगाया है। उधर, चीफ सेक्रेटरी प्रो. प्यारे सिंह ने कहा कि शकंराचार्य पद पर अभिषेक करने वाला धड़ा मनमानी पर उतारू है। उनके किसी भी एजेंडे पर महामंडल बैठक बुलाने के लिए बाध्य नहीं है। निलंबन की कार्रवाई के विरुद्ध वह अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए स्वतंत्र है। कार्रवाई विधि सम्मत की गई है और इसे वापस नहीं लिया जाएगा।
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इसमें कहा गया है कि जनरल सेक्रेटरी शंभू उपाध्याय को कौंसिल के किसी सदस्य को निलंबित करने का अधिकार नहीं है। इस संबंध में जारी कारण बताओ नोटिस का जवाब देते हुए कहा गया है कि भविष्य में इस तरह का अनधिकृत कदम उठाने से बाज आएं। जनरल सेक्रेटरी को कारण बताओ नोटिस जारी करने का भी अधिकार नहीं है।
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कार्यकारी अध्यक्ष, सहायक मंत्री दिनेशमणि तिवारी, ज्वाइंट जनरल सेक्रेटरी सत्येंद्र मिश्रा और डिपार्टमेंटल सेक्रेटरी की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि जनरल सेक्रेटरी शंभू उपाध्याय महामंडल विरोधी कदम उठाने के दोषी हैं। इस अवैधानिक कदम पर विचार करने के लिए कौंसिल की बैठक बुलाने के लिए पत्र भेजा गया है। यदि कौंसिल की बैठक नहीं बुलाई गई तो सक्षम अधिकारी की ओर से बैठक बुलाकर बहुमत से इस तरह के अवैधानिक कार्यों के विरुद्ध जनरल सेक्रेटरी पर कार्रवाई की जाएगी।
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इन पदाधिकारियों ने जहां अपने साथ बहुमत होने का दावा किया, वहीं शंभू उपाध्याय पर महामंडल को तोड़ने का आरोप लगाया है। उधर, चीफ सेक्रेटरी प्रो. प्यारे सिंह ने कहा कि शकंराचार्य पद पर अभिषेक करने वाला धड़ा मनमानी पर उतारू है। उनके किसी भी एजेंडे पर महामंडल बैठक बुलाने के लिए बाध्य नहीं है। निलंबन की कार्रवाई के विरुद्ध वह अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए स्वतंत्र है। कार्रवाई विधि सम्मत की गई है और इसे वापस नहीं लिया जाएगा।