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महाशिवरात्रि से पहले उमड़े श्रद्धालु, चरमाराई व्यवस्था
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वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ के दर्शन के लिए आए श्रद्धालु रविवार को पानी के लिए तरस गए। तमाम दुश्वारियों, गंदगी और अव्यवस्था के बीच घंटो मशक्कत के बाद श्रद्धालु बाबा के दरबार पहुंचे, लेकिन अपार भीड़ के कारण बाबा को जल भी अर्पित नहीं कर सके। वहीं, रोक के बाद भी गोदौलिया से बांस फाटक तक भारी वाहनों का प्रवेश जारी रहा।
महाशिवरात्रि से पहले ही काशी में भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। लक्सा से लेकर गौदौलिया और मैदागिन से लेकर बांस फाटक तक श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं, जिससे सारी व्यवस्थाएं चरमरा गईं। लाइन में लगे श्रद्धालु पानी के लिए तरस गए। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए न तो सिविल डिफेंस के कर्मी नजर आए और न ही सामाजिक संगठन। पांच-छह घंटे के बाद श्रद्धालुओं को बाबा दरबार पहुंचने का मौका मिला।
दिन चढ़ने के साथ श्रद्धालुओं का दबाव बढ़ा तो मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल और न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने व्यवस्था की कमान संभाली। दो बजे के बाद मंदिर में झांकी दर्शन शुरू कराए गए। बांस फाटक से शापुरी माल तक स्कूली वाहन और चार पहिया वाहनों के प्रवेश के कारण स्थिति बिगड़ी तो अधिकारियों ने ऐसे वाहनों के चालान के निर्देश दिए। देर रात तक दर्शन के लिए कतारें लगी रही।
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खुली दावों की पोल, निराश हुए भक्त
देहरादून से परिवार के साथ आए आशुतोष पांच घंटे की मशक्कत के बाद बाबा दरबार पहुंचे तो झांकी दर्शन के बाद उन्हें बाहर निकाल दिया गया। उन्होंने कहा कि इतनी दूर से आने के बाद भी हम बाबा को जल अर्पण नहीं कर सके। पंजाब से आई रत्नेश कुमार भी बाबा को जल नहीं चढ़ा पाने से असंतुष्ट दिखीं। उन्होंने कि मंदिर प्रशासन ने सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन हकीकत यहां आकर पता चली।
धड़ल्ले से हो रहा प्लास्टिक का इस्तेमाल
मंदिर परिक्षेत्र और रेड जोन में प्रतिबंध के बाद भी प्लास्टिक और थर्मोकोल का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। आसपास की दुकानों में प्लास्टिक और थर्मोकोल के गिलास में दूध और पानी चढ़ाने के लिए बिक रहा है। रविवार को गर्भगृह से काफी संख्या में थर्मोकोल के गिलास निकाले गए।
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महाशिवरात्रि से पहले ही काशी में भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। लक्सा से लेकर गौदौलिया और मैदागिन से लेकर बांस फाटक तक श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं, जिससे सारी व्यवस्थाएं चरमरा गईं। लाइन में लगे श्रद्धालु पानी के लिए तरस गए। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए न तो सिविल डिफेंस के कर्मी नजर आए और न ही सामाजिक संगठन। पांच-छह घंटे के बाद श्रद्धालुओं को बाबा दरबार पहुंचने का मौका मिला।
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दिन चढ़ने के साथ श्रद्धालुओं का दबाव बढ़ा तो मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल और न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने व्यवस्था की कमान संभाली। दो बजे के बाद मंदिर में झांकी दर्शन शुरू कराए गए। बांस फाटक से शापुरी माल तक स्कूली वाहन और चार पहिया वाहनों के प्रवेश के कारण स्थिति बिगड़ी तो अधिकारियों ने ऐसे वाहनों के चालान के निर्देश दिए। देर रात तक दर्शन के लिए कतारें लगी रही।
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खुली दावों की पोल, निराश हुए भक्त
देहरादून से परिवार के साथ आए आशुतोष पांच घंटे की मशक्कत के बाद बाबा दरबार पहुंचे तो झांकी दर्शन के बाद उन्हें बाहर निकाल दिया गया। उन्होंने कहा कि इतनी दूर से आने के बाद भी हम बाबा को जल अर्पण नहीं कर सके। पंजाब से आई रत्नेश कुमार भी बाबा को जल नहीं चढ़ा पाने से असंतुष्ट दिखीं। उन्होंने कि मंदिर प्रशासन ने सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन हकीकत यहां आकर पता चली।
धड़ल्ले से हो रहा प्लास्टिक का इस्तेमाल
मंदिर परिक्षेत्र और रेड जोन में प्रतिबंध के बाद भी प्लास्टिक और थर्मोकोल का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। आसपास की दुकानों में प्लास्टिक और थर्मोकोल के गिलास में दूध और पानी चढ़ाने के लिए बिक रहा है। रविवार को गर्भगृह से काफी संख्या में थर्मोकोल के गिलास निकाले गए।