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पोस्टमार्टम हाउस पर मरीज के परिजनों का हंगामा
Updated Mon, 22 Oct 2018 01:52 AM IST
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वाराणसी। बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती मरीज के ऑपरेशन को लेकर शनिवार रात करीब दो बजे तक धरना चला। इस दौरान मरीज की मौत की जानकारी मिली तो परिजनों का गुस्सा भड़क उठा। किसी तरह पुलिस ने मामला शांत कराया लेकिन रविवार की शाम पोस्टमार्टम हाउस पर शव पोस्टमार्टम कराने को लेकर परिजनों ने दोबारा हंगामा किया। उनकी मांग थी कि वीडियोरिकार्डिंग कराई जाए। पुलिस के समझाने पर माने।
ट्रामा सेंटर के रेड जोन में शुक्रवार को सड़क दुर्घटना में घायल जंसा निवासी धीरज को भर्ती कराया गया था। शनिवार शाम को उसका आपरेशन हुआ तो परिवारीजन पहले यह आरोप लगा रहे थे कि सीनियर डॉक्टर नहीं आए, बाद में यह भी बताया कि कई बार कहने के बाद भी मरीज से मिलने नहीं दिया गया। ट्रामा सेंटर के मोर्चरी हाउस पर धीरज के भाई विकास सिंह ने आरोप लगाया कि ओटी के बाहर खड़े रहने पर जब दवा लेेने के लिए बुलाया गया तो वह गया लेकिन दवा का पर्चा उसके हाथ में ही रहा और एक दूसरे युवक से दवा मंगाई गई। इधर रविवार शाम को पोस्टमार्टम प्रक्रिया की वीडियो रिकार्डिंग कराने की मांग की जब रिपोर्ट बनने में देरी हुई तो परिजनों ने धांधली का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। लंका पुलिस ने किसी तरह समझाबुझाकर मामला शांत कराया और शव को हरिश्चंद्रघाट तक भेजा।
परिजनों की ओर से किसी तरह की कोई शिकायत नहीं मिली है। अगर शिकायत मिलती है तो इसकी जांच कराई जाएगी। कभी-कभी ऑपरेशन शुरू होने के बाद अंदर रखी दवा का प्रयोग कर लिया जाता है, बाद में दवा आने पर उसे बदल लेते हैं।-डॉ. संजीव गुप्ता, प्रोफेसर इंचार्ज, ट्रामा सेंटर
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ट्रामा सेंटर के रेड जोन में शुक्रवार को सड़क दुर्घटना में घायल जंसा निवासी धीरज को भर्ती कराया गया था। शनिवार शाम को उसका आपरेशन हुआ तो परिवारीजन पहले यह आरोप लगा रहे थे कि सीनियर डॉक्टर नहीं आए, बाद में यह भी बताया कि कई बार कहने के बाद भी मरीज से मिलने नहीं दिया गया। ट्रामा सेंटर के मोर्चरी हाउस पर धीरज के भाई विकास सिंह ने आरोप लगाया कि ओटी के बाहर खड़े रहने पर जब दवा लेेने के लिए बुलाया गया तो वह गया लेकिन दवा का पर्चा उसके हाथ में ही रहा और एक दूसरे युवक से दवा मंगाई गई। इधर रविवार शाम को पोस्टमार्टम प्रक्रिया की वीडियो रिकार्डिंग कराने की मांग की जब रिपोर्ट बनने में देरी हुई तो परिजनों ने धांधली का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। लंका पुलिस ने किसी तरह समझाबुझाकर मामला शांत कराया और शव को हरिश्चंद्रघाट तक भेजा।
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परिजनों की ओर से किसी तरह की कोई शिकायत नहीं मिली है। अगर शिकायत मिलती है तो इसकी जांच कराई जाएगी। कभी-कभी ऑपरेशन शुरू होने के बाद अंदर रखी दवा का प्रयोग कर लिया जाता है, बाद में दवा आने पर उसे बदल लेते हैं।-डॉ. संजीव गुप्ता, प्रोफेसर इंचार्ज, ट्रामा सेंटर
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