{"_id":"5a8f2b314f1c1b514a8bac4c","slug":"11519332145-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मां कहती थी नयन तुम्हारे राजीव नैना...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मां कहती थी नयन तुम्हारे राजीव नैना...
Updated Fri, 23 Feb 2018 02:16 AM IST
विज्ञापन
वाराणसी। मां कहती थी नयन तुम्हारे राजीव नैना... के साथ जब राम मां दुर्गा को अपनी आंखों को नीलकमल की जगह चढ़ाने के लिए तत्पर होते हैं तो मां स्वयं प्रकट होती हैं। वह भगवान राम को जीत का आशीर्वाद देती हैं। इसके साथ ही, मंच पर हर्ष, उल्लास और जीत का वातावरण जीवंत हो उठता है। ढोल, मृदंग, मजीरे और नगाड़ों की उत्साह ध्वनि दर्शकों में मंचन के दौरान विभिन्न भावों का संचार कर रही थीं। विजय के जयघोष के साथ ही सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता पर आधारित नाटक राम की शक्ति पूजा और चार दिवसीय रस बनारस के पारंपरिक लोक महोत्सव का समापन होता है।
गुरुवार की शाम को अस्सी घाट के मुक्ताकाशीय मंच पर राम की शक्ति पूजा के मंचन के दौरान कलाकारों की बेहतरीन कलाकारी और भाव भंगिमाओं ने दर्शकों को बांध लिया। शास्त्रीय संगीत और नृत्य पर आधारित नाटक में मात्र कलाकारों के भाव ही दर्शकों का ध्यान बांधे हुए थे। नाटक के जरिए कलाकारों ने राम की अलग छवि को पेश किया। राम रावण का युद्ध चल रहा है। राम निराश हैं और हार का अनुभव कर रहे हैं। उनकी सेना भी खिन्न है। प्रिया सीता की याद में अवसाद को और घना बना रही है।
शक्ति भी रावण के साथ हैं। देवी स्वयं रावण की ओर से लड़ रही हैं। जामवंत उन्हें शक्ति की आराधना की सलाह देते हैं। रूपवाणी की ओर से आयोजित नाटक का मंचन देख दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। राम की भूमिका में स्वाति, सीता की भूमिका में नंदिनी, हनुमान की भूमिका में तापस, जामवंत की भूमिका में जय, लक्ष्मण की भूमिका में काजोल, सुग्रीव की भूमिका में अश्वनी, विभीषण की भूमिका में विशाल, बाल हनुमान की भूमिका में साखी ने बेहतरीन अभिनय किया। मार्गदर्शन एवं वस्त्र परिकल्पना डॉ. शकुंतला शुक्ल, जितेंद्र मोहन, संगीत निर्देशन जेपी शर्मा, गायन आशीष मिश्र, मंच व्यवस्था टी एन विश्वकर्मा, प्रकाश परिकल्पना धीरेंद्र मोहन और निर्देशन व्योमेश शुक्ला का रहा। इसके पूर्व छह से अधिक लोकसंगीत की प्रस्तुति की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
गुरुवार की शाम को अस्सी घाट के मुक्ताकाशीय मंच पर राम की शक्ति पूजा के मंचन के दौरान कलाकारों की बेहतरीन कलाकारी और भाव भंगिमाओं ने दर्शकों को बांध लिया। शास्त्रीय संगीत और नृत्य पर आधारित नाटक में मात्र कलाकारों के भाव ही दर्शकों का ध्यान बांधे हुए थे। नाटक के जरिए कलाकारों ने राम की अलग छवि को पेश किया। राम रावण का युद्ध चल रहा है। राम निराश हैं और हार का अनुभव कर रहे हैं। उनकी सेना भी खिन्न है। प्रिया सीता की याद में अवसाद को और घना बना रही है।
विज्ञापन
शक्ति भी रावण के साथ हैं। देवी स्वयं रावण की ओर से लड़ रही हैं। जामवंत उन्हें शक्ति की आराधना की सलाह देते हैं। रूपवाणी की ओर से आयोजित नाटक का मंचन देख दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। राम की भूमिका में स्वाति, सीता की भूमिका में नंदिनी, हनुमान की भूमिका में तापस, जामवंत की भूमिका में जय, लक्ष्मण की भूमिका में काजोल, सुग्रीव की भूमिका में अश्वनी, विभीषण की भूमिका में विशाल, बाल हनुमान की भूमिका में साखी ने बेहतरीन अभिनय किया। मार्गदर्शन एवं वस्त्र परिकल्पना डॉ. शकुंतला शुक्ल, जितेंद्र मोहन, संगीत निर्देशन जेपी शर्मा, गायन आशीष मिश्र, मंच व्यवस्था टी एन विश्वकर्मा, प्रकाश परिकल्पना धीरेंद्र मोहन और निर्देशन व्योमेश शुक्ला का रहा। इसके पूर्व छह से अधिक लोकसंगीत की प्रस्तुति की गई।
विज्ञापन