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‘हीरो’ में दिखा कलाकार का संघर्ष
Updated Mon, 11 Dec 2017 02:14 AM IST
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वाराणसी। बिना फिल्मी बैकग्राउंड के बॉलीवुड में काम और अपनी पहचान बनाने के लिए एक कलाकार को किस तरह का संघर्ष और समस्याआें को सामना करना पड़ता है, इसकी झलक पेश की ‘हीरो’ ने। इस नाट्यमंचन में भावों में पिरोए दृश्य दिलों को छू गए। रविवार की शाम बनारस थिएटर क्लब की ओर से इस नाटक का मंचन हुआ अस्सी घाट पर।
नाटक की भावमय प्रस्तुति खूब सराही गई। नाटक के जरिए यह दिखाया गया कि हीरो बनने की चाह रखने वाला अभिनेता जब मुंबई पहुंचता है तो उसे किस प्रकार की समस्या झेलनी पड़ती है। सपोर्टिगिं और साइड रोल के अलावा उसे अभाव व अन्य प्रकार की परेशानियों से दो चार होना पड़ा। लोगों के आकर्षण का केंद्र बनने के लिए न जाने कितने जतन करने पड़े। अपनी प्रस्तुति में जीवंतता लाने के लिए वह क्या कुछ नहीं करता। आधे घंटे के इस नाट्यमंचन के निर्देशक अर्पित सिधोरे तथा लेखक निखिल सचान रहे। नाटक में जितेंद्र पाल सिंह, उत्कर्ष उपेंद्र शहस्त्रबुद्धे आदि शामिल रहे।
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नाटक की भावमय प्रस्तुति खूब सराही गई। नाटक के जरिए यह दिखाया गया कि हीरो बनने की चाह रखने वाला अभिनेता जब मुंबई पहुंचता है तो उसे किस प्रकार की समस्या झेलनी पड़ती है। सपोर्टिगिं और साइड रोल के अलावा उसे अभाव व अन्य प्रकार की परेशानियों से दो चार होना पड़ा। लोगों के आकर्षण का केंद्र बनने के लिए न जाने कितने जतन करने पड़े। अपनी प्रस्तुति में जीवंतता लाने के लिए वह क्या कुछ नहीं करता। आधे घंटे के इस नाट्यमंचन के निर्देशक अर्पित सिधोरे तथा लेखक निखिल सचान रहे। नाटक में जितेंद्र पाल सिंह, उत्कर्ष उपेंद्र शहस्त्रबुद्धे आदि शामिल रहे।
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