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आम की पेड़ से कहीं झरे बौर तो कहीं टूटा टिकोरा 0
Updated Mon, 02 Apr 2018 02:11 AM IST
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वाराणसी। आंधी के चलते बनारसी लंगड़ा आम की पैदावार पर असर पड़ा है। कई पेड़ों पर लगे बौर फल बनने लगे थे। तेज आंधी ने इन टिकोरों को नुकसान पहुंचाया है।
चोलापुर, आराजीलाइन, बड़ागांव, सेवापुरी, चिरईगांव, हरहुआ आदि ब्लॉकों में आम की पैदावार होती है। इन जगहों पर आंधी के चलते कहीं आम की बौर झर गई है तो कहीं छोटे टिकोरे टूटकर गिर गए हैं। इस बार पेड़ों पर बौर की बहार रही। आम के बाग मालिकों को उम्मीद थी कि इस बार पहले से अच्छी पैदावार होगी लेकिन बीते दिनों आंधी आई तो उनके अरमानों पर थोड़ा पानी फिरा है। जिला उद्यान अधिकारी संदीप गुप्ता ने बताया कि शहरीकरण के चलते रकबा कम हो रहा है। तकरीबन 1500 हेक्टेयर है। इस बार 15 से 20 मीट्रिक टन आम की पैदावार की उम्मीद है।
चूंकि आम बड़ा नहीं था। कहीं पेड़ों पर बौर तो कहीं पेड़ों पर मटर के दाने के बराबर टिकोरा लगे थे। आंधी के चलते 10 से 15 प्रतिशत क्षति का अनुमान लगाया गया है। क्षति का आकलन करने के लिए बाग के सर्वेयर लगाए गए हैं। फल जब बड़ा होता है तो आंधी का प्रभाव अधिक पड़ता है। फल छोटा होने के कारण नुकसान कम हुआ है। जिन लोगों के पेड़ों में टिकोरा मटर के दाने के बराबर है वे सिंचाई कर दें। जिनके पेड़ों में बौर लगे हैं वे अभी सिंचाई न करें। टिकोरा आने के बाद सिंचाई करेंगे। इससे और नुकसान कम होगा।
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चोलापुर, आराजीलाइन, बड़ागांव, सेवापुरी, चिरईगांव, हरहुआ आदि ब्लॉकों में आम की पैदावार होती है। इन जगहों पर आंधी के चलते कहीं आम की बौर झर गई है तो कहीं छोटे टिकोरे टूटकर गिर गए हैं। इस बार पेड़ों पर बौर की बहार रही। आम के बाग मालिकों को उम्मीद थी कि इस बार पहले से अच्छी पैदावार होगी लेकिन बीते दिनों आंधी आई तो उनके अरमानों पर थोड़ा पानी फिरा है। जिला उद्यान अधिकारी संदीप गुप्ता ने बताया कि शहरीकरण के चलते रकबा कम हो रहा है। तकरीबन 1500 हेक्टेयर है। इस बार 15 से 20 मीट्रिक टन आम की पैदावार की उम्मीद है।
चूंकि आम बड़ा नहीं था। कहीं पेड़ों पर बौर तो कहीं पेड़ों पर मटर के दाने के बराबर टिकोरा लगे थे। आंधी के चलते 10 से 15 प्रतिशत क्षति का अनुमान लगाया गया है। क्षति का आकलन करने के लिए बाग के सर्वेयर लगाए गए हैं। फल जब बड़ा होता है तो आंधी का प्रभाव अधिक पड़ता है। फल छोटा होने के कारण नुकसान कम हुआ है। जिन लोगों के पेड़ों में टिकोरा मटर के दाने के बराबर है वे सिंचाई कर दें। जिनके पेड़ों में बौर लगे हैं वे अभी सिंचाई न करें। टिकोरा आने के बाद सिंचाई करेंगे। इससे और नुकसान कम होगा।
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