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साठे के जुलूस में उमड़ा अजादारों का हुजूम
Updated Wed, 29 Nov 2017 02:06 AM IST
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वाराणसी। अजा-ए-हुसैन के आखिरी दिन की याद मनाने को मंगलवार को सड़कों पर अजादारों का हुजूम उमड़ा। आठ रबी-उल-अव्वल के तारीखी जुलूस में ग्यारहवें इमाम हसन असकरी का ताबूत उठा। ‘...आई जेहरा की सदा, ए हुसैन अलविदा’ के नारों के साथ नौहा व मातम करता ये जुलूस शब्बीर और सफदर के इमामबाड़े दालमंडी से उठाया गया। जुलूस जब नई सड़क चौराहे पर पहुंचा तो अजादारों ने जंजीर, कमा और खंजर का मातम कर शहीदाने करबला को लहू का नजराना पेश किया।
जुलूस अपनी पूरी शान के साथ जब काली महल पहुंचा तो यहां सैकड़ों की तादाद में मौजूद मर्द, ख्वातीन, बुजुर्ग, नौजवान, बच्चे और बच्चियों ने आमारी का इस्तकबाल किया। यहां मौलाना नदीम असगर रिजवी ने तकरीर में कहा कि हुसैनियत के रास्ते पर चलें। इस मौके पर हैदर केरतपुरी, शोएब देहलवी, गुलशन बिजनौरी, शाद सिवानी ने अपने कलाम से लोगाें की आंखें नम कर दीं। अंजुमन हैदरी के नौजवान नौहा व मातम करते चल रहे थे। शराफत अली, वफा बुतराबी, लियाकत अली, शराफत नकवी, अंसार बनारसी, साहब जैदी, मजाहिर अली ने नौहे पेश किए। जुलूस के पितरकुंडा पहुंचने पर मौलाना कैसर आजमी ने मजलिस पढ़ी। अतहर बनारसी ने कलाम पेश किए।
नई पोखरी पहुंचने पर अंजुमन जव्वादिया ने जुलूस का इस्तकबाल किया। मौलाना अब्बास इरशाद नकवी ने तकरीर की। फातमान पहुंचने पर हजारों की तादाद में पर्दानशीं ख्वातीन ने आमारी का इस्तकबाल किया। अजादारों ने अलम, दुलदुल, ताबूत को अकीदत के साथ बोसा दिया। संयोजन अनवर काजिम व हैदर हुसैन का रहा। असबरी रजा सई व अब्बास शफक रिजवी ने शुक्रिया अदा किया। संचालन फरमान हैदर ने किया।
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जुलूस अपनी पूरी शान के साथ जब काली महल पहुंचा तो यहां सैकड़ों की तादाद में मौजूद मर्द, ख्वातीन, बुजुर्ग, नौजवान, बच्चे और बच्चियों ने आमारी का इस्तकबाल किया। यहां मौलाना नदीम असगर रिजवी ने तकरीर में कहा कि हुसैनियत के रास्ते पर चलें। इस मौके पर हैदर केरतपुरी, शोएब देहलवी, गुलशन बिजनौरी, शाद सिवानी ने अपने कलाम से लोगाें की आंखें नम कर दीं। अंजुमन हैदरी के नौजवान नौहा व मातम करते चल रहे थे। शराफत अली, वफा बुतराबी, लियाकत अली, शराफत नकवी, अंसार बनारसी, साहब जैदी, मजाहिर अली ने नौहे पेश किए। जुलूस के पितरकुंडा पहुंचने पर मौलाना कैसर आजमी ने मजलिस पढ़ी। अतहर बनारसी ने कलाम पेश किए।
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नई पोखरी पहुंचने पर अंजुमन जव्वादिया ने जुलूस का इस्तकबाल किया। मौलाना अब्बास इरशाद नकवी ने तकरीर की। फातमान पहुंचने पर हजारों की तादाद में पर्दानशीं ख्वातीन ने आमारी का इस्तकबाल किया। अजादारों ने अलम, दुलदुल, ताबूत को अकीदत के साथ बोसा दिया। संयोजन अनवर काजिम व हैदर हुसैन का रहा। असबरी रजा सई व अब्बास शफक रिजवी ने शुक्रिया अदा किया। संचालन फरमान हैदर ने किया।
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