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बीएसटी सड़क मार्ग पर कटान का मंडरा रहा खतरा
Updated Sun, 16 Jul 2017 10:42 PM IST
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कटान से बचाने के लिए 2008-09 में 200 करोड़ से ज्यादा रकम खर्च की जा चुकी है
बैरिया। करोड़ों खर्च करने के बावजूद मांझी- बलिया एनएच 31 व चांददीयर-जयप्रकाश नगर बीएसटी मार्ग पर गंगा और घाघरा के कटान का खतरा मंडरा रहा है। लोगों का कहना है कि आखिर कब तक कटान से बचाने के नाम पर धन लूटने की आजादी रहेगी? यहां के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो एनएच 31 व बीएसटी बंधे को गंगा और घाघरा के कटान से बचाने के लिए वर्ष 2008-09 से अब तक 200 करोड़ से भी ज्यादा की रकम खर्च हो चुकी है। इसके बावजूद लोग अपने को सुरक्षित नहीं मानते हैं।
पार्कों पाईन, बंबू क्रेट पाईलिंग और जीईओ बैग रिवेटमेंट वर्क के रूप में यहां 2008 से अब तक कटानरोधी कार्य कराए जाते रहे हैं, लेकिन गंगा व घाघरा ने दर्जनों गांवों को अपने पेटे में समा लिया है। अब भी गंगा व घाघरा गांव की ओर ही बढ़ती जा रही हैं। किसानों के सैकड़ों एकड़ उपजाऊ खेत गंगा व घाघरा में समाहित तो होते जा रहे हैं, अब देखते ही देखते गंगा व घाघरा एनएच 31 व बीएसटी बंधे के साथ ही गांव की आबादी को मिटाने पर भी आमादा हो गई। यहां बड़ा सवाल यह है कि गंगा व घाघरा के कटान को रोकने के बड़े-बड़े दावे करने वाले जल संसाधन विभाग के अधिकारी भी तब कुछ नहीं कर पाते जब गंगा व घाघरा अपना रूख अख्तियार करती है।
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बैरिया। करोड़ों खर्च करने के बावजूद मांझी- बलिया एनएच 31 व चांददीयर-जयप्रकाश नगर बीएसटी मार्ग पर गंगा और घाघरा के कटान का खतरा मंडरा रहा है। लोगों का कहना है कि आखिर कब तक कटान से बचाने के नाम पर धन लूटने की आजादी रहेगी? यहां के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो एनएच 31 व बीएसटी बंधे को गंगा और घाघरा के कटान से बचाने के लिए वर्ष 2008-09 से अब तक 200 करोड़ से भी ज्यादा की रकम खर्च हो चुकी है। इसके बावजूद लोग अपने को सुरक्षित नहीं मानते हैं।
पार्कों पाईन, बंबू क्रेट पाईलिंग और जीईओ बैग रिवेटमेंट वर्क के रूप में यहां 2008 से अब तक कटानरोधी कार्य कराए जाते रहे हैं, लेकिन गंगा व घाघरा ने दर्जनों गांवों को अपने पेटे में समा लिया है। अब भी गंगा व घाघरा गांव की ओर ही बढ़ती जा रही हैं। किसानों के सैकड़ों एकड़ उपजाऊ खेत गंगा व घाघरा में समाहित तो होते जा रहे हैं, अब देखते ही देखते गंगा व घाघरा एनएच 31 व बीएसटी बंधे के साथ ही गांव की आबादी को मिटाने पर भी आमादा हो गई। यहां बड़ा सवाल यह है कि गंगा व घाघरा के कटान को रोकने के बड़े-बड़े दावे करने वाले जल संसाधन विभाग के अधिकारी भी तब कुछ नहीं कर पाते जब गंगा व घाघरा अपना रूख अख्तियार करती है।
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