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Varanasi News: तथागत के अस्थि कलश के दर्शन करेंगे आठ देशों के 11 हजार अनुयायी
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- कार्तिक पूर्णिमा पर बौद्ध मठ व मंदिरों में होगी विशेष पूजा और चीवर दान
- हाथी व रथ के साथ कलश को धमेख स्तूप की कराई जाएगी परिक्रमा
माई सिटी रिपोर्टर
सारनाथ (वाराणसी)। कार्तिक पूर्णिमा पर तथागत की उपदेश स्थली बुद्धं शरणं गच्छामि... से गुंजायमान होगी। देश ही नहीं दुनिया भर के बौद्ध अनुयायी तथागत के अस्थि कलश के दर्शन करेंगे। अस्थि कलश के दर्शन के लिए आठ देशों के 11 हजार से अधिक बौद्ध अनुयायी काशी पहुंचेंगे। बौद्ध अनुयायियों के वाराणसी आने का सिलसिला देर शाम से शुरू हो गया।
भगवान बुद्ध की प्रथम धर्म उपदेश स्थली के सभी बौद्ध मठ व मंदिरों में कार्तिक पूर्णिमा पर विशेष पूजा, चीवर दान व भोजन दान होगा। महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के संयुक्त सचिव भिक्षु के सुमितानंद थेरो ने बताया कि 14 व 15 नवंबर को भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेष के दर्शन सुबह छह बजे से पूर्वाह्न 11 बजे तक होंगे। 15 नवंबर को मंदिर का वार्षिक उत्सव मनाया गया। इसमें भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेष कलश को हाथी व रथ के साथ धमेख स्तूप की परिक्रमा कराई जाएगी।
धम्म शिक्षण संस्थान के संस्थापक भिक्षु चंदिमा महाथेरो ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान बुद्ध ने 61 भिक्षुओं को ज्ञान देने के उपरांत सारनाथ से सर्वसाधारण को शिक्षा व ज्ञान का प्रवचन देने के लिए प्रस्थान किया था। इस दिन सभी बौद्ध विहार में बौद्ध भिक्षुओं को चीवरदान और भोजन दान किया जाता है। इस बार देश व विदेश के लगभग 11 हजार से अधिक बौद्ध भिक्षु व अनुयायियों के आने का अनुमान है। कंबोडिया, लावोस, थाईलैंड, बर्मा, श्रीलंका, जापान के साथ ही भारत के हर कोने से लोग कार्तिक पूर्णिमा के आयोजन पर सारनाथ आएंगे। धम्म लर्निंग सेंटर पर 14 नवंबर की पूरी रात महा परित्राण पाठ होगा। कार्तिक पूर्णिमा वाले दिन मूल गंध कुटी बौद्ध मंदिर में दीप दान का आयोजन होगा।
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- हाथी व रथ के साथ कलश को धमेख स्तूप की कराई जाएगी परिक्रमा
माई सिटी रिपोर्टर
सारनाथ (वाराणसी)। कार्तिक पूर्णिमा पर तथागत की उपदेश स्थली बुद्धं शरणं गच्छामि... से गुंजायमान होगी। देश ही नहीं दुनिया भर के बौद्ध अनुयायी तथागत के अस्थि कलश के दर्शन करेंगे। अस्थि कलश के दर्शन के लिए आठ देशों के 11 हजार से अधिक बौद्ध अनुयायी काशी पहुंचेंगे। बौद्ध अनुयायियों के वाराणसी आने का सिलसिला देर शाम से शुरू हो गया।
भगवान बुद्ध की प्रथम धर्म उपदेश स्थली के सभी बौद्ध मठ व मंदिरों में कार्तिक पूर्णिमा पर विशेष पूजा, चीवर दान व भोजन दान होगा। महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के संयुक्त सचिव भिक्षु के सुमितानंद थेरो ने बताया कि 14 व 15 नवंबर को भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेष के दर्शन सुबह छह बजे से पूर्वाह्न 11 बजे तक होंगे। 15 नवंबर को मंदिर का वार्षिक उत्सव मनाया गया। इसमें भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेष कलश को हाथी व रथ के साथ धमेख स्तूप की परिक्रमा कराई जाएगी।
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धम्म शिक्षण संस्थान के संस्थापक भिक्षु चंदिमा महाथेरो ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान बुद्ध ने 61 भिक्षुओं को ज्ञान देने के उपरांत सारनाथ से सर्वसाधारण को शिक्षा व ज्ञान का प्रवचन देने के लिए प्रस्थान किया था। इस दिन सभी बौद्ध विहार में बौद्ध भिक्षुओं को चीवरदान और भोजन दान किया जाता है। इस बार देश व विदेश के लगभग 11 हजार से अधिक बौद्ध भिक्षु व अनुयायियों के आने का अनुमान है। कंबोडिया, लावोस, थाईलैंड, बर्मा, श्रीलंका, जापान के साथ ही भारत के हर कोने से लोग कार्तिक पूर्णिमा के आयोजन पर सारनाथ आएंगे। धम्म लर्निंग सेंटर पर 14 नवंबर की पूरी रात महा परित्राण पाठ होगा। कार्तिक पूर्णिमा वाले दिन मूल गंध कुटी बौद्ध मंदिर में दीप दान का आयोजन होगा।
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