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रोप-वे नहीं, मेट्रो ही सुगम साधन
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वाराणसी। रोपवे की जगह शहर में लाइट मेट्रो और मेट्रो ही सुगम साधन हैं। यह रिपोर्ट मेट्रो, लाइट मेट्रो और रोपवे के लिए सर्वे करने वाली कंपनी राइ्टस ने सोमवार शाम वीडीए को सौंपी है। 300 पेज की इस रिपोर्ट को यातायात व्यवस्था सुगम बनाने और भविष्य में इसकी उपयोगिता के आधार पर तैयार किया गया है। अब वीडीए इस रिपोर्ट को शासन को भेजेगा, ताकि इस पर निर्णय हो सके।
शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए वीडीए ने चार करोड़ रुपये खर्च करके मेट्रो का सर्वे कराया था। सर्वे के बाद जो रिपोर्ट राइट्स ने भेजी, वह बहुत खर्चीली थी। इसे देखते हुए वीडीए ने कम खर्च वाली रिपोर्ट तैयार करने को कहा। इसके बदले 84 लाख रुपये फिर से वीडीए ने राइट्स को दिए। राइट्स ने सर्वे शुरू किया। इसी बीच शासन ने रोप-वे का सुझाव देते हुए राइट्स को फिजिबिलटी सर्वे करने के लिए कहा। सर्वे करने के बाद राइट्स ने रिपोर्ट वीडीए को सौंप दी है। इसमें रोपवे की अपेक्षा लाइट मेट्रो या मेट्रो को ही प्राथमिकता देने की बात कही गई है। वीडीए के अधिकारी इसका अध्ययन करने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजेंगे, ताकि इस पर शासन निर्णय ले सके। नगर नियोजक मनोज कुमार ने बताया कि रिपोर्ट पर विचार करने के लिए शासन को भेजा जाएगा।
मेट्रो के लिए पहले किया गया सर्वे
पहला कॉरिडोर
बीएचयू से भेल तक बनना था। इसमें बीएचयू, तुलसी मानस मंदिर, रत्नाकर पार्क, बंगाली टोला, काशी विश्वनाथ (चितरंजन पार्क), बेनियाबाग, रथयात्रा, काशी विद्यापीठ, कैंट, नदेसर, कलक्ट्रेट, भोजूबीर, गिलट बाजार, संगम कालोनी, शिवपुर, तरना और भेल स्टेशन बनना था। इसकी लंबाई 19.3 किलोमीटर है और अनुमानित लागत 8,418 करोड़ तय की गई थी। परियोजना में भूमिगत रूट 15.68 किमी और उपरगामी रूट की लंबाई 3.63 किमी तय की गई थी।
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दूसरा कॉरिडोर
बेनियाबाग से सारनाथ तक बनना था। इसमें बेनियाबाग से कोतवाली, मछोदरी पार्क, बस डिपो, जलालीपुरा, पंचक्रोशी चौराहा, आशापुर, हवेलिया और सारनाथ स्टेशन बनाने की योजना थी। इसकी लंबाई 9.9 किमी, स्टेशनों की संख्या-9, अनुमानित लागत 3,838 करोड़ रुपये थी। इस कॉरिडोर में भूमिगत रूट की लंबाई 8.33 किमी और उपरगामी रूट की लंबाई 1.6 किमी तय की गई थी।
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शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए वीडीए ने चार करोड़ रुपये खर्च करके मेट्रो का सर्वे कराया था। सर्वे के बाद जो रिपोर्ट राइट्स ने भेजी, वह बहुत खर्चीली थी। इसे देखते हुए वीडीए ने कम खर्च वाली रिपोर्ट तैयार करने को कहा। इसके बदले 84 लाख रुपये फिर से वीडीए ने राइट्स को दिए। राइट्स ने सर्वे शुरू किया। इसी बीच शासन ने रोप-वे का सुझाव देते हुए राइट्स को फिजिबिलटी सर्वे करने के लिए कहा। सर्वे करने के बाद राइट्स ने रिपोर्ट वीडीए को सौंप दी है। इसमें रोपवे की अपेक्षा लाइट मेट्रो या मेट्रो को ही प्राथमिकता देने की बात कही गई है। वीडीए के अधिकारी इसका अध्ययन करने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजेंगे, ताकि इस पर शासन निर्णय ले सके। नगर नियोजक मनोज कुमार ने बताया कि रिपोर्ट पर विचार करने के लिए शासन को भेजा जाएगा।
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मेट्रो के लिए पहले किया गया सर्वे
पहला कॉरिडोर
बीएचयू से भेल तक बनना था। इसमें बीएचयू, तुलसी मानस मंदिर, रत्नाकर पार्क, बंगाली टोला, काशी विश्वनाथ (चितरंजन पार्क), बेनियाबाग, रथयात्रा, काशी विद्यापीठ, कैंट, नदेसर, कलक्ट्रेट, भोजूबीर, गिलट बाजार, संगम कालोनी, शिवपुर, तरना और भेल स्टेशन बनना था। इसकी लंबाई 19.3 किलोमीटर है और अनुमानित लागत 8,418 करोड़ तय की गई थी। परियोजना में भूमिगत रूट 15.68 किमी और उपरगामी रूट की लंबाई 3.63 किमी तय की गई थी।
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दूसरा कॉरिडोर
बेनियाबाग से सारनाथ तक बनना था। इसमें बेनियाबाग से कोतवाली, मछोदरी पार्क, बस डिपो, जलालीपुरा, पंचक्रोशी चौराहा, आशापुर, हवेलिया और सारनाथ स्टेशन बनाने की योजना थी। इसकी लंबाई 9.9 किमी, स्टेशनों की संख्या-9, अनुमानित लागत 3,838 करोड़ रुपये थी। इस कॉरिडोर में भूमिगत रूट की लंबाई 8.33 किमी और उपरगामी रूट की लंबाई 1.6 किमी तय की गई थी।