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प्रदूषण इतना कि गंगा में ही दम तोड़ रही मछलियां
Updated Fri, 20 Apr 2018 02:32 AM IST
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वाराणसी। मोक्षदायिनी गंगा में प्रदूषण अब खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। शहर के कुंडों के बाद जल प्रदूषण ने गंगा के जलचरों के जीवन पर संकट खड़ा कर दिया है। गुरुवार को ललिता घाट और आसपास के कुछ घाटों पर दर्जनों की संख्या में मछलियां मरी हुई मिलीं। यह देखकर श्रद्धालु ही नहीं, घाट पर रहने वाले भी आश्चर्य में पड़ गए। अप्रैल महीने में तापमान लगातार बढ़ने और गंगा में डिजाल्व आक्सीजन कम होने के कारण यह घटना हुई। वहीं प्रदूषण विभाग के अधिकारी इसे किसी की शरारत मान रहे हैं।
गुरुवार को ललिता घाट के अगल-बगल के घाटों पर दर्जनों की संख्या में मछलियां मरी हुई मिलीं। इसके कारण स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया। माना जा रहा है कि बायो आक्सीजन डिजाल्व और डिजाल्व आक्सीजन की कमी के कारण यह स्थिति पैदा हुई। वर्तमान में गंगा के जलस्तर में भी तेजी से गिरावट आई है। सदानीरा गंगा में नगवां नाले समेत शहर के सीवर की गंदगी के कारण पानी का रंग काला हो चुका है।
बीच गंगा में भी पानी की गहराई पांच फीट से ज्यादा नहीं रह गई है। मछलियों के मरने की वजह बढ़ती गर्मी और प्रदूषण के खतरनाक स्तर को माना जा रहा है। अमूमन पानी में घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा पांच मिलीग्राम प्रतिलीटर से ऊपर होनी चाहिए। वर्तमान में यह आंकड़ा 1.5 मिलीग्राम पहुंच चुका है। ऐसे में गंगा में रहने वाले जलचरों के जीवन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
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गुरुवार को ललिता घाट के अगल-बगल के घाटों पर दर्जनों की संख्या में मछलियां मरी हुई मिलीं। इसके कारण स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया। माना जा रहा है कि बायो आक्सीजन डिजाल्व और डिजाल्व आक्सीजन की कमी के कारण यह स्थिति पैदा हुई। वर्तमान में गंगा के जलस्तर में भी तेजी से गिरावट आई है। सदानीरा गंगा में नगवां नाले समेत शहर के सीवर की गंदगी के कारण पानी का रंग काला हो चुका है।
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बीच गंगा में भी पानी की गहराई पांच फीट से ज्यादा नहीं रह गई है। मछलियों के मरने की वजह बढ़ती गर्मी और प्रदूषण के खतरनाक स्तर को माना जा रहा है। अमूमन पानी में घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा पांच मिलीग्राम प्रतिलीटर से ऊपर होनी चाहिए। वर्तमान में यह आंकड़ा 1.5 मिलीग्राम पहुंच चुका है। ऐसे में गंगा में रहने वाले जलचरों के जीवन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
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