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महामना की बगिया में खिखिलाया फूलों का संसार
Updated Tue, 26 Dec 2017 02:17 AM IST
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वाराणसी। फूलों के मोहक संसार ने सोमवार की शाम अपनी निराली मुस्कान से हर किसी को मोह लिया। युवतियां हों या बच्चे या फिर बुजुर्ग, हर किसी के कदम दोपहर बाद से ही मालवीय भवन की फुलवारी की ओर बढ़ने लगे थे। भवन के द्वार के दोनों ओर सड़क की पटरियों पर प्रतीक्षारत लोगों की भीड़ बढ़ने पर उनको संभालने की जद्दोजहद करनी पड़ी। मौका था महामना जयंती पर आयोजित पुष्प प्रदर्शनी का। इस प्रदर्शनी में उम्मीदों से भरे शोभाकार, सज्जाकार, कांटेवाले खुशबूदार फूलों की विविधता निहारने के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा।
शाम करीब चार बजे कार्यवाहक कुलपति नीरज त्रिपाठी समेत कई विभागाध्यक्षों ने महामना की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस औपचारिकता के बाद प्रदर्शनी जैसे ही आम लोगों के लिए खोली गई, मालवीय भवन की बगिया में इठलाने वालों का रेला उमड़ पड़ा। सबसे अधिक गुलदावदी की प्रजातियों के गमले लोगों का ध्यान खींच रहे थे। सफेद, पीले, नीले, हरे, गुलाबी, धानी, केसरिया समेत 40 से अधिक रंगों के शोभाकार सजावजी फूलों की कहीं कतारें सजाई गई थीं, तो कहीं अल्पनाओं का रूप रचा गया था।
गेंदा, कटे गुलाब, रजनीगंधा, बोगनबेलिया, मिली, ग्लाइडोलस, लिलियस, वर्डापैराडाइज, कार्नेसन, जरबेरा का फूलों की मुस्कान लोगों के लिए यादगार बन गई। करीब 10 हजार से अधिक गमलों में सजाए गए फूलों की प्रजातियां बीएचयू के अलग-अलग विभागों के अलावा डीरेका, उत्तर रेलवे, 39 जीटीसी, जिला उद्यान विभाग, सेंट्रल जेल के अलावा शहर की 50 से अधिक नर्सरियों से लाए गए थे। इस प्रदर्शनी में पूर्वांचल के जौनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, आजमगढ़, बलिया समेत कई जिलों के किसानों, मालियों ने भी अपने पुष्प प्रदर्शित किए। उद्यान विभाग के प्रोफेसर इंचार्ज एके सिंह ने बताया कि 12 महीने की मालियों की कड़ी मेहनत के बाद गमले में इन फूलों को तैयार किया जा सका है। महामना की जयंती पर उन्हीं फूलों की प्रजातियां प्रदर्शित की गईं जो लंबी अवधि तक टिकाऊ होती हैं।
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शाम करीब चार बजे कार्यवाहक कुलपति नीरज त्रिपाठी समेत कई विभागाध्यक्षों ने महामना की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस औपचारिकता के बाद प्रदर्शनी जैसे ही आम लोगों के लिए खोली गई, मालवीय भवन की बगिया में इठलाने वालों का रेला उमड़ पड़ा। सबसे अधिक गुलदावदी की प्रजातियों के गमले लोगों का ध्यान खींच रहे थे। सफेद, पीले, नीले, हरे, गुलाबी, धानी, केसरिया समेत 40 से अधिक रंगों के शोभाकार सजावजी फूलों की कहीं कतारें सजाई गई थीं, तो कहीं अल्पनाओं का रूप रचा गया था।
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गेंदा, कटे गुलाब, रजनीगंधा, बोगनबेलिया, मिली, ग्लाइडोलस, लिलियस, वर्डापैराडाइज, कार्नेसन, जरबेरा का फूलों की मुस्कान लोगों के लिए यादगार बन गई। करीब 10 हजार से अधिक गमलों में सजाए गए फूलों की प्रजातियां बीएचयू के अलग-अलग विभागों के अलावा डीरेका, उत्तर रेलवे, 39 जीटीसी, जिला उद्यान विभाग, सेंट्रल जेल के अलावा शहर की 50 से अधिक नर्सरियों से लाए गए थे। इस प्रदर्शनी में पूर्वांचल के जौनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, आजमगढ़, बलिया समेत कई जिलों के किसानों, मालियों ने भी अपने पुष्प प्रदर्शित किए। उद्यान विभाग के प्रोफेसर इंचार्ज एके सिंह ने बताया कि 12 महीने की मालियों की कड़ी मेहनत के बाद गमले में इन फूलों को तैयार किया जा सका है। महामना की जयंती पर उन्हीं फूलों की प्रजातियां प्रदर्शित की गईं जो लंबी अवधि तक टिकाऊ होती हैं।
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