UP: वाराणसी में एक साल में 10 ब्लैक स्पॉट खत्म, तीन प्रतिशत दुर्घनाएं, 14 फीसदी कम हुईं मौतें
वाराणसी में जिला सड़क सुरक्षा समिति ने रिपोर्ट जारी की। इसके तहत जिले में वहीं एक साल में 10 ब्लैक स्पॉट खत्म किए गए। दुर्घटनाओं में 3 फीसदी कमी आई तो 14 फीसदी मौतें कम हुईं। मौजूदा समय में नौ ब्लैक स्पॉट हैं, जो 2023 में 19 थे।
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बीते एक साल में जिले की सड़कों के 10 ब्लैक स्पॉट कम हुए हैं। इससे सड़क दुर्घटना और दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में कमी आई है। हालांकि, यह आंकड़ा बहुत बड़ा नहीं है मगर संख्या में कमी जरूर आई है। मौजूदा समय में जिले में सिर्फ नौ ब्लैक स्पॉट ही बचे हैं। 2023 में इनकी संख्या 19 थी।
जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में इस साल जनवरी से जुलाई माह तक हुई दुर्घटनाओं के आंकड़े जारी किए गए। इसकी तुलना भी पिछले साल के आंकड़ों से की गई। रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2023 से जुलाई 2023 तक 333 सड़क दुर्घटनाएं हुईं जबकि जनवरी 2024 से जुलाई 2024 तक 324 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। यानी दुर्घटनाओं में 2.70 फीसदी की कमी आई।
वहीं, जनवरी 2023 से जुलाई 2023 तक मृतकों की 202 थी जो जनवरी 2024 से जुलाई 2024 के बीच घटकर 172 हो गई। यानी इसका आंकड़ा करीब 14.85 फीसदी घट गया। सिर्फ 2023 और 2024 के जुलाई महीने की तुलना की जाए तो पिछले साल जुलाई में 37 लोगों की मौत हुई थी और इस साल 25 लोगों की मौत हुई। इसी तरह जुलाई में सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी देखने को मिली। जुलाई 2023 में 60 दुर्घटनाएं हुईं थीं और 2024 में 48 दुर्घटनाएं हुईं।
ब्लैक स्पॉट कम करने का मिला फायदा
आरटीओ प्रवर्तन श्यामलाल ने बताया कि एक साल में विभागों के समन्वय से 10 ब्लैक स्पॉट खत्म किए गए हैं। इसमें मोहनसराय से कैंट के तीन और पड़ाव से रामनगर तक सात ब्लैक स्पॉट खत्म किए गए। इसके अलावा जागरूकता कार्यक्रम चलाने से लोगों ने हेलमेट और सीट बेल्ट लगाना शुरू किया। इससे भी सुधार हुआ है।
टेबल टॉप ब्रेकर बनाने के निर्देश
एडीएम सिटी आलोक वर्मा ने एनएचएआई के अफसरों को निर्देश दिए कि 15 दिन के अंदर हरहुआ चौराहे के दोनों तरफ टेबल टॉप ब्रेकर बनाएं। इसके अलावा 18 जगहों पर रोड साइनेज लगाने का काम 18 दिन में पूरा करके रिपोर्ट करें।
कैसे बनते हैं ब्लैक स्पॉट और कैसे खत्म होते हैं
जेब्रा क्रॉसिंग, साइड रोड पर ब्रेकर, सफेद पट्टी, सोलर लाइट और हाईमास्ट लाइट लगाए जाते हैं। वहीं लॉन्ग टर्म में ब्लैक स्पॉट को खत्म करने के लिए दुर्घटनाओं पर शोध करने के बाद सर्विस रोड, अंडरपास, फ्लाईओवर, फुटओवर ब्रिज का निर्माण किया जाता है। इसके बाद तीन साल तक इसकी निगरानी की जाती है। वहां हादसों की संख्या कम हुई हो तो उस स्पॉट को खत्म मान लिया जाता है।