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कागजी हेराफेरी कर वाराणसी नगर निगम की 10 एकड़ जमीन पर कब्जा,प्रशासन बना रहा अनजान 

Fri, 06 Dec 2019 05:26 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी शशांक मिश्र, अमर उजाला, वाराणसी
शशांक मिश्र, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Fri, 06 Dec 2019 05:26 PM IST
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10 acres land of Varanasi Municipal Corporation occupied By rigging the paper
logo - फोटो : a

सरकारी जमीनों के संरक्षण के लिए शासन भले ही गंभीर है, मगर अफसरों की मिलीभगत से बेशकीमती जमीनों पर कब्जा किया जा रहा है। वर्षों पहले वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) की ओर से अधिग्रहित 10 एकड़ से ज्यादा जमीन पर कागजी हेराफेरी कर कब्जा कर लिया गया। 

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पार्कों के लिए चिह्नित यह जमीन तत्कालीन महानगर पालिका को स्थानांतरित की गई थी, मगर तहसील से जारी होने वाले परवाना को फाइलों में दबाकर खसरा खतौनी तक विकास प्राधिकरण और नगर निगम को नहीं पहुंचने दिया गया। मामला संज्ञान में आने के बाद मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल की जांच में इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। जांच के आधार पर बृहस्पतिवार को इस जमीन की खतौनी में महानगर पालिका को मालिकाना हक दिलाया गया।
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रविंद्रपुरी की गुरुधाम कॉलोनी में 10.071 एकड़ जमीन वर्ष 2002 के बाद विकास प्राधिकरण ने अधिग्रहित की। मुआवजा जारी कर विकास प्राधिकरण ने जमीन पर कब्जा ले लिया। अधिग्रहण के बाद विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलओ) की ओर से तहसील में जाने वाले परवाने को फाइलों में ही दबा दिया गया।
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2005 में विकास प्राधिकरण ने एसएलओ को पत्र लिखकर जमीन के मालिकाना हक में बदलाव की प्रक्रिया की याद दिलाई। इस बीच वीडीए ने यह जमीन तत्कालीन महानगर पालिका वाराणसी को हस्तांतरित कर दी, मगर कागजी हेराफेरी के कारण खसरा खतौनी से लेकर तहसील के दस्तावेजों में मालिकाना हक नहीं मिल पाया। इसके बाद जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद शुरू हुआ और अधिकारी अपनी जमीन को लेकर अनजान बन गए।
 

10 acres land of Varanasi Municipal Corporation occupied By rigging the paper
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वीडीए के पत्र से खुला फर्जीवाड़ा

जमीन को लेकर कई सालों से विवाद चल रहा है। एक पक्ष इस जमीन पर मालिकाना हक का दावा करता है। लिहाजा, मंडलायुक्त ने तहसील से फाइल तलब कराई। इसमें पता चला कि विकास प्राधिकरण ने अधिग्रहण की सूचना का एक पत्र वर्ष 2005 में तहसील भेजा था। इस पत्र के आधार पर विकास प्राधिकरण की फाइलें खंगाली गईं तो जमीन के अधिग्रहण की फाइल भी सामने आ गई। इसमें मुआवजा भुगतान कर अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कराने की जानकारी है। 

तहसील और एसएलओ की भूमिका की जांच

जमीन के इस खेल में विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय और सदर तहसील की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। अधिग्रहण के बाद जमीन को कागजों में अंकित नहीं करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच होगी। इसके लिए मंडलायुक्त ने अपर मंडलायुक्त प्रशासन को जांच सौंपी है। माना जा रहा है कि 2002 से लेकर 2005 के बीच इस जमीन पर फर्जीवाड़े का खेल किया गया है। 

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सुबह जारी हुआ परवाना, रात में दर्ज हुआ नाम

जांच में जमीन के मालिकाना हक में फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद मंडलायुक्त के निर्देश पर महानगर पालिका वाराणसी को जमीन का मालिकाना हक दिया गया है। बृहस्पतिवार सुबह परवाना जारी कराकर उसे तहसील भिजवाया गया और रात में खसरा खतौनी में इसे दर्ज कराया गया। इसी आधार पर अब परवानों की जांच कराई जा रही है। इसमें बड़े फर्जीवाड़े के खुलासे की संभावना है।

                                                                                                                                 
                                                

                                                                                                                                 
                                                रविंद्रपुरी की गुरुधाम कॉलोनी में 10 एकड़ से ज्यादा जमीन को विकास प्राधिकरण ने अधिग्रहित किया था, मगर कागजी हेराफेरी कर इस पर मालिकाना हक नहीं बदला गया। जांच में इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। पूरे मामले की विस्तृत जांच कर इसमें शामिल लोगों पर कार्रवाई होगी।
                                                                                                                                 
                                                

                                                                                                                                 
                                                दीपक अग्रवाल, मंडलायुक्त
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