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यूपी पुलिस को है छह लाख लोगों की तलाश
योगेंद्र मिश्र/इलाहाबाद
Updated Fri, 31 May 2013 12:03 PM IST
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उत्तर प्रदेश की अदालतों में चल रहे आपराधिक मुकदमों में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद से छह लाख 20 हजार 104 अभियुक्त लापता हैं। न तो पुलिस उन्हें गिरफ्तार करके ला सकी और न खुद कोर्ट में हाजिर हुए।
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इनमें लगभग एक लाख 64 हजार ऐसे मुल्जिम हैं जो चार्जशीट आने के दो साल बाद भी गायब हैं। हाईकोर्ट ने इस स्थिति पर हैरानी जताई है और प्रदेश पुलिस तथा अधीनस्थ अदालतों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
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कोर्ट ने कुछ सुझाव भी सरकार को दिए हैं जिन पर अमल करके मुकदमों के ट्रायल में लगने वाले समय को कम किया जा सकता है। अ
अगर सुझाव लागू किए जाते हैं तो पीड़ितों को जल्दी न्याय मिलने की उम्मीद की जा सकती है।
हाईकोर्ट के निर्देश पर 71 जिला अदालतों द्वारा भेजे गए आंकड़ों से पता चला कि 6,20,104 मुकदमों में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद अभियुक्त अदालतों में नहीं पहुंचे।
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कोर्ट ने तीन माह के भीतर इन्हें अदालतों में हाजिर करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति अमर सरन और न्यायमूर्ति दिनेश गुप्ता की खंडपीठ ने आरोपपत्र दाखिल करते समय अभियुक्त की उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
प्रमुख सचिव गृह को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। डीजीपी द्वारा सात मार्च 2013 को इस संबंध में सरकुलर भी जारी किया गया है।
इसी प्रकार से आरोपपत्र की प्रति और अन्य कागजात पुलिस द्वारा सीधे अभियुक्तों को उपलब्ध कराने को कहा गया है क्योंकि कोर्ट से नकल जारी करने में साल भर तक समय लग जाता है और अनावश्यक भार भी बढ़ता है।
गृह सचिव को इसके लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। सीआरपीसी की धारा 309 के तहत दिन प्रति दिन के आधार पर मुकदमों की सुनवाई करने के लिए प्रभावी सरकुलर जारी करने का निर्देश दिया है।
खंडपीठ ने केंद्र सरकार को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 209 में संशोधन का सुझाव दिया है। इसके अनुसार पुलिस को निर्देशित किया गया है कि वह सेशन कोर्ट द्वारा विचारणीय मुकदमों की चार्जशीट मजिस्ट्रेट की कोर्ट में प्रस्तुत करने के बजाए सीधे सेशन कोर्ट में प्रस्तुत करे। इससे समय बच सकेगा। इस मामले पर कोर्ट 19 जुलाई को फिर सुनवाई करेगी।
इस तरह जल्दी पूरा हो सकता है ट्रायल
- पुलिस ही दे अभियुक्तों को मुकदमे से संबंधित कागजात, गृह सचिव उपलब्ध कराएं पुलिस को इससे संबंधित सुविधाएं
- आरोपपत्र दाखिल करते समय अभियुक्त की अदालत में मौजूदगी सुनिश्चित की जाए।
- केंद्र सरकार सीआरपीसी की धारा 209 में संशोधन करे ताकि सेशन द्वारा विचारणीय मुकदमों में आरोपपत्र सीधे सेशन कोर्ट में दाखिल हो सके।
आरोपपत्र आने के
तीन माह बाद तक 10,371
छह माह बाद तक 95,385
नौ माह बाद तक 97,948
12 माह बाद तक 96,155
दो वर्ष के बाद तक 1,64,313
दो वर्ष से अधिक 62602