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स्मारक घोटाले में मायावती बचीं, दूसरे नपे
लखनऊ/ब्यूरो
Updated Mon, 20 May 2013 10:10 PM IST
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उत्तर प्रदेश के स्मारक घोटाले में राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को बड़ी राहत मिली है। लोकायुक्त ने स्मारक घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को क्लीन चिट दी है।
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इस मामले की जांच के बाद लोकायुक्त ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है।
लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा ने मायावती शासन में लखनऊ और नोएडा में अंबेडकर स्मारकों के निर्माण में हुए 14 अरब रुपये से ज्यादा के घोटाले के लिए पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी, बाबू सिंह कुशवाहा समेत 199 लोगों को जिम्मेदार ठहराया है।
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इनमें एक विधायक, दो पूर्व विधायक, दो वकील, खनन विभाग के पांच अधिकारी, राजकीय निर्माण निगम के 57 इंजीनियर व 37 लेखाकार, एलडीए के पांच इंजीनियर, पत्थरों की आपूर्ति करने वाली 60 फर्में व 20 कंसोर्टियम प्रमुख तथा आठ बिचौलिये शामिल हैं।
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लोकायुक्त ने सोमवार को अपनी जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भेज दी है। लोकायुक्त ने नसीमुद्दीन, बाबू सिंह कुशवाहा, राजकीय निर्माण निगम के तत्कालीन एमडी सीपी सिंह, खनन के तत्कालीन संयुक्त निदेशक एसए फारूकी तथा 15 अन्य इंजीनियरों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराकर जांच कराने की सिफारिश की है।
इसके अलावा नसीमुद्दीन और कुशवाहा से घोटाले की राशि का 30 फीसदी तथा सीपी सिंह से 15 व फारूकी से 5 फीसदी वसूली करने के साथ ही पूरे मामले की जांच सीबीआई या स्पेशल टास्क फोर्स गठित करके छह माह के भीतर कराने की भी सिफारिश की है।
लोकायुक्त ने आरोपी अधिकारियों की चल-अचल संपत्ति की जांच कराकर आय से अधिक संपत्ति पाए जाने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने और संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई करने को कहा है। जांच में दोषी पाए गए पत्थरों की आपूर्ति करने वाली 60 फर्मों और 20 कंसोर्टियम से भी वसूली की सिफारिश की गई है।
लोकायुक्त ने पांच अध्याय में 88 पेज की रिपोर्ट के साथ 1285 दस्तावेज, ईओडब्ल्यू की 101 तथा 214 पेज की दो रिपोर्ट तथा 242 लोगों के बयान भी शामिल हैं। न्यायमूर्ति मेहरोत्रा का कहना है कि दोषियों को शीघ्र दंड मिले, इसके लिए रिपोर्ट में स्पेशल टास्क फोर्स या स्पेशल प्रॉसीक्यूटिंग एजेंसी गठित करके विवेचना कराने का सुझाव दिया है।
उनका कहना है कि जांच एजेंसी सरकार के नियंत्रण से मुक्त होनी चाहिए। आरोपियों पर मुकदमा चलाने के लिए हाईकोर्ट से अनुमति लेकर विशेष कोर्ट बनाने की संस्तुति भी की गई है।
रिपोर्ट में लोकायुक्त ने पत्थरों की बाजार दर से 34 फीसदी ज्यादा दर पर खरीद करने से सरकार को हुई 14.10 अरब रुपये क्षति की भरपाई के लिए क्रिमिनल लॉ एमेडमेंट ऑर्डिनेंस 1944 की धारा 3 के तहत न्यायालय से अनुमति लेकर आरोपियों की संपत्ति कुर्क करके वसूली की सिफारिश की है।
इसके अलावा आरएनएन के 15 इंजीनियरों से कुल 15 प्रतिशत धनराशि की वसूली की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आरएनएन के जिन लेखाकारों पर आय से अधिक संपत्ति पाई जाए उनसे शेष हानि का पांच प्रतिशत वसूल किया जाए।
सरकारी खजाने को लगी 14.10 अरब की चपत
रिपोर्ट के अनुसार स्मारकों के निर्माण के लिए राजकीय निर्माण निगम, आवास एवं शहरी नियोजन विभाग, लोक निर्माण विभाग, नोएडा अथॉरिटी, लखनऊ विकास प्राधिकरण, संस्कृति तथा सिंचाई विभाग द्वारा कुल 42,76,83,43,000 रुपये जारी किए।
इसमें से 41,48,54,80,000 रुपये खर्च किए गए। शेष 1,28,28,59,000 रुपये वापस कर दिए गए। स्मारकों के निर्माण पर खर्च की गई कुल धनराशि का लगभग 34 फीसदी ज्यादा व्यय करके सरकार को 14,10,50,63,200 रुपये की क्षति पहुंचाई गई।
जांच का निष्कर्ष
लोकायुक्त का निष्कर्ष है कि स्मारकों के निर्माण को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने भले ही पवित्र कार्य की संज्ञा दी हो लेकिन उनके दो मंत्री जो लोक निर्माण विभाग व खनन विभाग के प्रभारी थे, ने अपने विभागों के जरिये तत्कालीन मुख्यमंत्री के तथाकथित पवित्र कार्य में भ्रष्टाचार के जरिए अवैध कमाई की।
इसके लिए अपने अधीन विभाग और निगमों के अधिकारियों का इस्तेमाल किया। इसका निष्कर्ष आज यह निकलकर सामने आया है कि कुल व्यय बजट 41,48,54,80,000 रुपये का लगभग 34 प्रतिशत भ्रष्टाचार में चला गया।
इन मंत्रियों के अधीन कार्यरत राजकीय निर्माण निगम और खनन विभाग के अधिकारियों ने इन कार्यों के क्रियान्वयन में अवैध तरीके से अवैध कमाई करके धन अर्जित किया है। इसलिए जितना कार्य का क्रियान्वयन कराने के लिए राजकीय निर्माण व खनन विभाग के अधिकारी दोषी हैं उतने ही इन दोनों विभागों के तत्कालीन मंत्री नसीमुद्दीन व बाबू सिंह कुशवाहा भी उत्तरदायी हैं।
‘हमने मुख्यमंत्री को अपनी जांच रिपोर्ट भेज दी है। तीन महीने में सरकार से इस बारे में की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी मांगी गई है। जांच के दौरान साक्ष्य आए थे कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने मंत्रियों को ईमानदारी से पवित्र भावना के साथ काम कराने को कहा था पर इन्होंने पवित्र को अपवित्र कर दिया। मायावती के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिले। वह केवल निर्माण के दौरान देखने आती थीं। पूर्व मुख्यमंत्री के नाम पर उनके मंत्रियों ने लूटमार की और अपनी-अपनी एजेंसी को निर्माण में लगाया।’
- न्यायमूर्ति एन.के. मेहरोत्रा, लोकायुक्त