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ये लो, दस हजार में बिकने लगा सपा का लैपटॉप
लखनऊ/ब्यूरो
Updated Wed, 13 Mar 2013 08:41 AM IST
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव 12वीं पास विद्यार्थियों को लैपटॉप बांटकर ‘डिजिटल डिवाइड’ की खाई पाटने का सपना देख रहे हों। लेकिन लैपटॉप वितरण समारोह के बाद कुछ विद्यार्थी लैपटॉप बेचने सीधे नाजा मार्केट पहुंच गए।
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मंगलवार को भी कई छात्र दिन भर कम्प्यूटर मार्केट में लैपटॉप बेचने के लिए चक्कर काटते रहे। ऐसे में अब सरकार और शासन में बैठे लोगों के सामने नई चुनौती है कि वे लैपटॉप को बाजार में बिकने से कैसे बचाएं?
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हजरतगंज स्थित नाजा मार्केट के एक दुकानदार ने बताया कि सोमवार व मंगलवार दोपहर कुछ छात्र दस हजार रुपये में एचपी का लैपटॉप बेचने की बात कर रहे थे, हालांकि उसने किसी सरकारी लैपटॉप के बेचे जाने की पुष्टि नहीं की है। वैसे सरकार ने विद्यार्थियों को जो लैपटॉप दिए हैं वह सामान्य लैपटॉप से अलग है।
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विद्यार्थियों को दिए गए लैपटॉप की कवर पर सरकारी लोगो लगा है। लैपटॉप को ऑन करते ही यह लोगो स्क्रीन पर भी दिखाई देता है। ऐसे में इस लैपटॉप की असानी से पहचान की जा सकती है। यही नहीं कंपनी में हर लैपटॉप का अपना एक अलग मशीन नंबर देती है।
सरकार ने मशीन नंबर के आधार पर ही विद्यार्थियों में लैपटॉप वितरित किए हैं। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए लैपटॉप बेचना आसान नहीं होगा। किस मशीन नंबर का लैपटॉप किस विद्यार्थी को दिया गया है इसका पूरा रिकॉर्ड विभाग के पास है।
यही नहीं लैपटॉप देने से पहले विद्यार्थियों से निजी उपयोग में लेने संबंधित सहमति पत्र भी भरवाया जा रहा है। सहमति पत्र में संबंधित लैपटॉप का विस्तृत विवरण दर्ज है। ऐसे में यह आसानी से पता लगया जा सकता है कि बाजार में बेचा गया लैपटॉप किस विद्यार्थी का है।
खरीदने-बेचने वाले दोनों पर कार्रवाई
लैपटॉप बांटने को लेकर विद्यार्थियों से भरवाए जा रहे आवेदन पत्र में दुरुपयोग रोकने को लेकर प्रावधान किया गया है। अगर कोई विद्यार्थी बेचता है या फिर कोई खरीदता है तो ऐसी स्थिति में दोनों कार्रवाई की जद में आएंगे।
पार्थसारथी सेन शर्मा, सचिव, माध्यमिक शिक्षा विभाग