{"_id":"61b4c6bcf5cd4d0edd008fc7","slug":"up-elections-2022-how-much-will-the-bjp-benefit-from-the-development-of-vishwanath-temple-sp-claim-that-yogi-government-will-be-clear-from-east-to-west","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"UP Elections 2022: विश्वनाथ मंदिर के विकास का भाजपा को कितना लाभ? सपा का दावा- पूरब से लेकर पश्चिम तक साफ हो जाएगी सरकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP Elections 2022: विश्वनाथ मंदिर के विकास का भाजपा को कितना लाभ? सपा का दावा- पूरब से लेकर पश्चिम तक साफ हो जाएगी सरकार
Sat, 11 Dec 2021 09:11 PM IST
अभिषेक दीक्षित
वाराणसी से अमित शर्मा की रिपोर्ट
वाराणसी से अमित शर्मा की रिपोर्ट
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sat, 11 Dec 2021 09:11 PM IST
सार
वाराणसी के गोदौलिया चौराहे से दशाश्वमेध घाट तक जाने का मार्ग काफी चौड़ा किया जा चुका है। इसके लोकार्पण के लिए पीएम मोदी के बनारस आने के पूर्व मार्ग के दोनों तरफ स्थित दुकानों को एकरूपता देने के लिए हल्के लाल-भगवा रंग से रंग दिया गया है। इससे पूरी नगरी खूबसूरत आध्यात्मिक अहसास देती दिखाई पड़ रही है।
विज्ञापन
पीएम नरेंद्र मोदी के आगमन से पूर्व इस तरह दिख रहा वाराणसी।
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अमित शाह ने अहमदाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान कहा है कि नरेंद्र मोदी सरकार आने के बाद हिंदुओं के धार्मिक स्थलों का विकास किया गया है। इसके पहले इनकी उपेक्षा हो रही थी। अयोध्या और काशी विश्वनाथ मंदिर के विकास के रूप में भाजपा अपना यह दावा पूरा करती हुई भी दिखाई पड़ रही है। माना जा रहा है कि उसे इसका उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में लाभ भी मिल सकता है। स्थानीय लोगों से बात करने पर इसका संकेत भी मिलता है। हालांकि, इसके बाद भी समाजवादी पार्टी का दावा है कि प्रयागराज से लेकर बाबा विश्वनाथ की नगरी तक गंगा में कोरोना काल में बहे शव भाजपा के हर विकास के दावे पर भारी पड़ेंगे।
वाराणसी के गोदौलिया चौराहे से दशाश्वमेध घाट तक जाने का मार्ग काफी चौड़ा किया जा चुका है। इसके लोकार्पण के लिए पीएम मोदी के बनारस आने के पूर्व मार्ग के दोनों तरफ स्थित दुकानों को एकरूपता देने के लिए हल्के लाल-भगवा रंग से रंग दिया गया है। इससे पूरी नगरी खूबसूरत आध्यात्मिक अहसास देती दिखाई पड़ रही है। इसी मार्ग पर कपड़े की दुकान चलाने वाले किशन ने अमर उजाला को बताया कि अपने तीन दशक से ज्यादा व्यापारिक अनुभव में उन्होंने विश्वनाथ मंदिर और इस क्षेत्र का विकास होते हुए कभी नहीं देखा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में किया गया अपना वादा निभाया और पूरे वाराणसी का कायाकल्प कर दिया।
किशन बताते हैं कि इस क्षेत्र की जनता मंदिरों के हुए इस विकास से अभिभूत है और दिल खोलकर भाजपा का सहयोग देने को तैयार है। इसका कारण केवल आध्यात्मिक स्थलों का विकास ही नहीं, बल्कि पूरे बनारस के गली, चौराहों, सड़कों और फ्लाईओवर का विकास कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर कोरोना काल के दौर को छोड़ दें तो इस विकास के बाद उनका व्यापार बढ़ चुका है। लोग इस विकास का जबरदस्त स्वागत कर रहे हैं।
विज्ञापन
इसी मार्ग पर एक रेस्टोरेंट चलाने वाले प्रवीण जैन ने कहा कि मार्गों का अच्छे तरीके से विकास करने के कारण यहां आने वाले भक्तों की संख्या बढ़ी है। इससे उन लोगों के कामकाज में वृद्धि हुई है। इसका पूरा श्रेय अगर किसी को दिया जा सकता है तो वह पीएम नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी को ही दिया जा सकता है। यही कारण है कि जनता उनके लिए सकारात्मक दृष्टि रखती है।
हालांकि, कपड़ों के व्यापारी अंकुर तिवारी अभी भी व्यापार के पूरी तरह वापस न होने की बात कहते हैं। उन्होंने कहा कि धर्म नगरी वाराणसी में हमेशा से भारी संख्या में हिंदू श्रद्धालु आते रहते थे। इसमें किसी सरकार के योगदान की को श्रेय नहीं दिया जा सकता। यह इस आध्यात्मिक नगरी का ही प्रभाव है कि देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहां चले आते हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना के कमजोर होने के बाद भक्तों के आने की संख्या यहां पर तेजी से बढ़ी है, लेकिन इसके बाद भी लोग खरीदारी करने से कतरा रहे हैं। यह कोरोना काल की मंदी का असर दिखाई पड़ता है जो लोगों की जेब पर अब भी भारी पड़ रही है।
विज्ञापन
वाराणसी के गोदौलिया चौराहे से दशाश्वमेध घाट तक जाने का मार्ग काफी चौड़ा किया जा चुका है। इसके लोकार्पण के लिए पीएम मोदी के बनारस आने के पूर्व मार्ग के दोनों तरफ स्थित दुकानों को एकरूपता देने के लिए हल्के लाल-भगवा रंग से रंग दिया गया है। इससे पूरी नगरी खूबसूरत आध्यात्मिक अहसास देती दिखाई पड़ रही है। इसी मार्ग पर कपड़े की दुकान चलाने वाले किशन ने अमर उजाला को बताया कि अपने तीन दशक से ज्यादा व्यापारिक अनुभव में उन्होंने विश्वनाथ मंदिर और इस क्षेत्र का विकास होते हुए कभी नहीं देखा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में किया गया अपना वादा निभाया और पूरे वाराणसी का कायाकल्प कर दिया।
विज्ञापन
किशन बताते हैं कि इस क्षेत्र की जनता मंदिरों के हुए इस विकास से अभिभूत है और दिल खोलकर भाजपा का सहयोग देने को तैयार है। इसका कारण केवल आध्यात्मिक स्थलों का विकास ही नहीं, बल्कि पूरे बनारस के गली, चौराहों, सड़कों और फ्लाईओवर का विकास कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर कोरोना काल के दौर को छोड़ दें तो इस विकास के बाद उनका व्यापार बढ़ चुका है। लोग इस विकास का जबरदस्त स्वागत कर रहे हैं।
विज्ञापन
इसी मार्ग पर एक रेस्टोरेंट चलाने वाले प्रवीण जैन ने कहा कि मार्गों का अच्छे तरीके से विकास करने के कारण यहां आने वाले भक्तों की संख्या बढ़ी है। इससे उन लोगों के कामकाज में वृद्धि हुई है। इसका पूरा श्रेय अगर किसी को दिया जा सकता है तो वह पीएम नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी को ही दिया जा सकता है। यही कारण है कि जनता उनके लिए सकारात्मक दृष्टि रखती है।
हालांकि, कपड़ों के व्यापारी अंकुर तिवारी अभी भी व्यापार के पूरी तरह वापस न होने की बात कहते हैं। उन्होंने कहा कि धर्म नगरी वाराणसी में हमेशा से भारी संख्या में हिंदू श्रद्धालु आते रहते थे। इसमें किसी सरकार के योगदान की को श्रेय नहीं दिया जा सकता। यह इस आध्यात्मिक नगरी का ही प्रभाव है कि देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहां चले आते हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना के कमजोर होने के बाद भक्तों के आने की संख्या यहां पर तेजी से बढ़ी है, लेकिन इसके बाद भी लोग खरीदारी करने से कतरा रहे हैं। यह कोरोना काल की मंदी का असर दिखाई पड़ता है जो लोगों की जेब पर अब भी भारी पड़ रही है।
गोताखोरों को नौकरी क्यों नहीं
पीएम मोदी का वाराणसी दौरा
- फोटो : Amar Ujala
गोताखोर सुनील निषाद बताते हैं कि अभी भी विदेशी पर्यटकों को यहां पर आने की अनुमति नहीं मिल पाई है। ओमीक्रोन के बढ़ते खतरे के कारण यहां आने की उनकी संभावनाओं पर दोबारा गहरी चोट पड़ी है। विदेशी पर्यटक ही उनकी कमाई का सबसे बड़ा स्रोत होते थे। उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस होने के कमजोर होने के बाद भी उनके लिए प्रतिदिन 200 से 300 रुपये कमाना भारी पड़ जाता है। उन्होंने बताया कि यहां गंगा में होने वाली किसी दुर्घटना को रोकने के लिए यूपी जल पुलिस तैनात हैं, लेकिन उसमें एक भी गोताखोर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जो सरकार उनके समाज के युवाओं को रोजगार देने का काम नहीं करती, उसे बदला जाना चाहिए।
सुनील निषाद के मुताबिक इस महंगाई के जमाने में उन्हें घर का खर्च चलाना भारी पड़ रहा है। वे चाहते हैं कि व्यवस्था बदले और कामकाज सुधरे। यानी इसी धार्मिक नगरी में रोजगार का मुद्दा युवाओं के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
सुनील निषाद के मुताबिक इस महंगाई के जमाने में उन्हें घर का खर्च चलाना भारी पड़ रहा है। वे चाहते हैं कि व्यवस्था बदले और कामकाज सुधरे। यानी इसी धार्मिक नगरी में रोजगार का मुद्दा युवाओं के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
'झूठे विकास पर भारी पड़ेगे कोरोना काल के शव'
वाराणसी
- फोटो : Amar Ujala
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आईपी सिंह ने अमर उजाला से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अखिलेश सरकार के कार्यों का श्रेय लेने का काम कर रहे हैं। जिस पूर्वांचल एक्सप्रेस सुबह को भाजपा अपना बता रही है उसका समाजवादी पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के नाम से पहले ही फीता काटा जा चुका था। उन्होंने कहा कि भाजपा को यह लगता है कि प्रदेश की जनता उनके विकास के इन झूठे दावों के चलते उन दृश्यों को भूल जाएगी जो उसे करोना काल में प्रयागराज से लेकर बक्सर तक गंगा नदी में उतरती लाशों के रूप में दिखाई पड़े थे।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार जन आकांक्षाओं पर खरा नहीं उतर रही है। लोग आज भी अपना घर न चला पाने के कारण बेहद दबाव में हैं। भाजपा को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। सपा नेता ने दावा किया कि इस बार प्रधानमंत्री मोदी को केवल पश्चिम से ही नहीं, पूर्व से भी करारी हार का सामना करना पड़ेगा जो यूपी की सत्ता तय करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका कारण भाजपा नेताओं का अहंकार, विकास के झूठे दावे और जनहितैषी योजनाओं से दूरी बरतना है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार जन आकांक्षाओं पर खरा नहीं उतर रही है। लोग आज भी अपना घर न चला पाने के कारण बेहद दबाव में हैं। भाजपा को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। सपा नेता ने दावा किया कि इस बार प्रधानमंत्री मोदी को केवल पश्चिम से ही नहीं, पूर्व से भी करारी हार का सामना करना पड़ेगा जो यूपी की सत्ता तय करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका कारण भाजपा नेताओं का अहंकार, विकास के झूठे दावे और जनहितैषी योजनाओं से दूरी बरतना है।