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उत्तर प्रदेश चुनाव: सूबे में हैं प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री शाह, अगड़ों और पिछड़ों को इस रणनीति से साध रही भाजपा

Thu, 30 Dec 2021 03:07 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Thu, 30 Dec 2021 03:07 PM IST
सार

भाजपा के नेताओं, कार्यकर्ताओं को खंगालने के बाद कुछ बड़ी चुनौतियां सामने आईं। जातिगत आधार पर भाजपा के लिए 2022 का चुनाव अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसके रणनीतिकारों ने इसका संदेश देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के साथ योगी का और शाह के साथ केशव प्रसाद का युग्म बनाया है...

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UP Election 2022: caste equation remains a big challenge for BJP, strategists paired Yogi with PM Modi and Keshav Prasad with Shah
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को सुल्तानपुर में जनसभा को संबोधित करके भदोही जाना था। मौसम खराब था तो बनारस चले गए। संकटमोचन मंदिर में दर्शन के उपरांत भाजपा के कार्यकर्ताओं और नेताओं को जीत का मंत्र दिया और दिल्ली चले गए। अगले दिन उन्नाव में थे। उनके साथ लगातार उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या रहते हैं। बनारस के भाजपा नेता तर्क देते हैं कि केशव प्रसाद मौर्या ऐसे ही साथ नहीं हैं, वे पिछड़ी जाति के भाजपा के बड़े नेता हैं। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी मुख्यमंत्री योगी को साथ लेकर उत्तर प्रदेश के लिए उन्हें बहुत उपयोगी बता रहे हैं। कुल मिलाकर भाजपा की कोशिश अगड़ों से लेकर पिछड़ों तक को साथ सहेजने की है। बचा हुआ काम व्हाट्सएप के जरिए पूरा हो रहा है।

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प्रदेश भाजपा के एक बड़े नेता कहते हैं कि अभी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के बाबत राजनीतिक लड़ाई शुरू भी नहीं हुई है। मकर संक्राति आने दीजिए। इसके बाद आपको काफी कुछ बदला-बदला नजर आएगा। लखनऊ से गाड़ी में विदा करते समय उन्होंने बस इतना कहा था कि इस बार का चुनाव हम नहीं, जमीन पर हमारे त्रिदेव लड़ रहे हैं।

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व्हाट्सएप, त्रिदेव और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022

अभी चुनाव के तारीखों की घोषणा नहीं हुई है। भाजपा सूत्रों की मानें तो इसमें अधिक दिन नहीं बचे हैं। लेकिन प्रदेश स्तर तक के पार्टी के सभी प्रयास, अभियान, तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। भाजपा के संगठन से जुड़े सूत्र ने बताया कि तैयारी का यह दूसरा चरण चल रहा है। इसमें जिला स्तर पर अभियान चल रहा है। इसके बाद तहसील, ब्लॉक से लेकर गांव-गांव और घर-घर तक संदेश पहुंचाने का अभियान पूरा कर लिया जाएगा। प्रदेश स्तर पर इसके पूरे संचालन की कमान संगठन मंत्री सुनील बंसल के हाथ में है। पूरे चुनाव प्रचार का अभियान 2017 से कोई बहुत ज्यादा अलग नहीं है।

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केशव प्रसाद मौर्या के करीबियों के कहना है कि गृह मंत्री पूरी सतर्कता से सभी अभियानों पर नजर बनाए हैं और भरोसा है कि चुनाव के पहले चरण के मतदान से पहले विपक्ष का चक्रव्यूह टूट जाएगा। संजय सिंह कहते हैं कि एक महीने पहले गृह मंत्री शाह आए थे। तब कई चिंताएं थीं। अब तो एक-दो ही बची हैं। इसके लिए भाजपा, संघ और संगठन से जुड़े विभिन्न समूह व्हाट्सएप से जुड़े हैं। समूह से जुड़े नेताओं की चेन बूथ प्रभारी से लेकर गांव-गांव में अपने पन्ना प्रमुखों से जुड़ी है। पन्ना-प्रमुखों की जिम्मेदारी मतदाता सूची के एक-एक पन्ने के 80-90 मतदाताओं को खंगालने, उन्हें जोडऩे में है। सिद्धेश्वर सिंह कहते हैं कि हमारे पास बड़ा संगठन है। यह त्रिस्तरीय संगठन ही 2014, 2017, 2019 में भाजपा की राह आसान बनाता आया। इसी त्रिदेव की रणनीति के सहारे हम 2022 भी जीतेंगे।

भाजपा के सामने क्या हैं बड़ी चुनौतियां?

भाजपा के नेताओं, कार्यकर्ताओं को खंगालने के बाद कुछ बड़ी चुनौतियां सामने आईं। जातिगत आधार पर भाजपा के लिए 2022 का चुनाव अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसके रणनीतिकारों ने इसका संदेश देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के साथ योगी का और शाह के साथ केशव प्रसाद का युग्म बनाया है। प्रयागराज के एक नेता नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि हमारा मुख्यमंत्री अगड़ी जाति का है तो प्रधानमंत्री मोदी पिछड़ी जाति से आते हैं। अमित शाह के बारे में बताने की आवश्यकता नहीं है। केशव प्रसाद मौर्या को प्रदेश की जनता बखूबी जानती हैं। ऐसे में भाजपा के पास संशय की गुंजाइश नहीं है। रहा सवाल भावी मुख्यमंत्री का तो प्रधानमंत्री संदेश दे रहे हैं और भाजपा में मुख्यमंत्री या सदन में अपने नेता का निर्णय पार्टी के चुने विधायक लेते हैं। कुल मिलाकर भाजपा ने मुख्यमंत्री के चेहरे पर दोहरी रणनीति अपनाई है। मुख्यमंत्री योगी चेहरे में आगे हैं। महत्व केशव प्रसाद का भी है और मतदाताओं में उनकी स्थिति के हिसाब से भ्रम का संदेश भी बरकरार है। यह स्थिति पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश में ज्यादा है।

UP Election 2022: caste equation remains a big challenge for BJP, strategists paired Yogi with PM Modi and Keshav Prasad with Shah
कानपुर मेट्रो में सफर करते पीएम नरेंद्र मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ - फोटो : Agency

असमंजस में हैं ब्राह्मण

दूसरी बड़ी चुनौती ब्राह्मण मतदाता हैं। उत्तर प्रदेश में 18 फीसदी ब्राह्मण तो इतने ही मुस्लिम मतदाता बताए जाते हैं। संघ से जुड़े अरविंद शुक्ला कहते हैं, ब्राह्मण थोड़ा (40 फीसदी) असमंजस में हैं। ब्राह्मणों को पता है कि ठाकुर से ज्यादा यादव अराजक हो जाते हैं। इसे पटरी पर लाने की कोशिश जारी है। आजमगढ़ से राजभरों की बड़ी संख्या शुरू होती है। मिर्जापुर, बनारस, प्रयागराज, जौनपुर, प्रतापगढ़, रायबरेली के हिस्से में पटेलों की संख्या ठीकठाक है। केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की पार्टी से सुरेंद्र पटेल भी मानते हैं कि पटेल अनुप्रिया के साथ हैं, लेकिन 30-35 फीसदी पटेल इसबार समाजवादी पार्टी के साथ जा सकते हैं। इसी तरह की स्थिति निषादों के साथ है। मनोज सरोज ने पिछली बार भाजपा को वोट दिया था। कभी बसपा के साथ थे। लेकिन इस बार अभी उन्होंने तय नहीं किया है। मनोज कहते हैं कि भाजपा से बड़ी उम्मीद थी। मुख्यमंत्री योगी तो केवल ठाकुरवादी, दलित विरोधी नेता हैं। मायावती ने तो अब बसपा को केवल जाटव की पार्टी बना दिया है।

भाजपा की एक और बड़ी चुनौती छुट्टा गौवंश बन रहे हैं। उत्तर प्रदेश के किसी भी जिले के किसी भी गांव में चले जाइए, गौवंश, नील गाय, जंगली सुअरों से किसान त्रस्त मिलेंगे। गांवों के खेत की बाड़ पर जानवरों को बिजली झटका देने वाला तार जरूर मिलेगा। राम चंद्र किसान हैं। बताते हैं की मक्का, मटर, उड़द, चना, अरहर जैसी फसलें पैदा करने की हिम्मत नहीं होती। कई बार मेड़ और डांड़ पर फिसलकर गिरने से बच्चे, महिलाएं या फिर बुजुर्ग भी इसका झटका खा जाते हैं। फिर इस बार धान के फसल की खरीद भी ढंग से नहीं हुई है और किसान त्रस्त है।

योगी तेरी खैर नहीं, मोदी तुझसे बैर नहीं

वहीं राजस्थान में वसुंधरा राजे की सरकार को हटाने वाला नारा उत्तर प्रदेश में जगह बनाता दिखाई दे रहा है। राज्य में जनता की नाराजगी भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी से कम है। सरकार विरोधी लहर की हवा मुख्यमंत्री योगी के खिलाफ कहीं ज्यादा दिखाई देती है। जौनपुर में गोमती किनारे आरएसएस की शाखा लगती है। सुबह-सवेरे शाखा से लौट रहे भाजपा के नेता योगी के खिलाफ नाराजगी को राजनीति का सामान्य चरित्र बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हैं, इसलिए जिनकी भी नाराजगी होगी, उन्हीं से होगी। लेकिन पिछले तीस साल में प्रदेश की जनता ने विकास देखा है। भारत की अस्मिता, हिन्दुत्व का सम्मान और आदर देखा है। इसलिए चिंता की कोई बात नहीं है। वह कहते हैं कि सब ठीक हो जाएगा। मोदी, शाह, नड्डा, योगी और केशव सब लगे हैं। पूर्व विधायक का कहना है कि जनता के पास भाजपा के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है। बस आप देखते रहिए। कुल मिलाकर भाजपा को अपने तंत्र पर पूरा भरोसा है। उसके भरोसे की सबसे बड़ी उम्मीद प्रधानमंत्री मोदी की छवि और अमित शाह की रणनीति है।

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