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क्या अखिलेश के पास है इन सवालों का जवाब

Wed, 20 Feb 2013 10:24 AM IST
लखनऊ/ब्यूरो/इंटरनेट डेस्क
लखनऊ/ब्यूरो/इंटरनेट डेस्क Updated Wed, 20 Feb 2013 10:24 AM IST
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up cm seeks to fulfil poll promises in budget for 2013-14

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंगलवार को विधानसभा में वर्ष 2013-14 के लिए 2,21,201 करोड़ रुपए का बजट पेश किया। वित्तमंत्री के रूप में महज सात महीने बाद पेश किया गया अखिलेश यादव का यह दूसरा बजट है। पिछले साल के बजट के मुकाबले यह 10.5 फीसदी अधिक है।

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प्रदेश में कृषि, औद्योगिक विकास, ढांचागत सुविधाओं और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर मौन यह बजट समाजवादी पार्टी का चुनावी घोषणा पत्र अधिक लग रहा है। सरकार ने लोकसभा चुनावों का एजेंडा तय करते हुए बजट में गरीबों, किसानों, नौजवानों, मुसलमानों और महिलाओं के लिए तोहफों की बरसात कर दी है।
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आर्थिक विशेषज्ञ प्रो. मुजम्मिल के मुताबिक, भले ही मौद्रिक आंकड़ों में यह बजट पिछले साल तुलना में दस फीसदी बढ़ा है लेकिन वास्तव में इसमें कोई वृद्धि नहीं हुई है। महंगाई के लिहाज से बजट का आकार पहले जैसा ही है।
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से पेश बजट के मुताबिक प्रदेश के हर नागरिक पर 11,993 रुपए का कर्ज है। जून में पेश किए गए बजट में यह आंकड़ा 10,965 रुपए पर था। मुख्यमंत्री ने बजट पेश करते हुए वादा किया है कि प्रदेश सरकार पर कर्ज को घटाने की हर संभव कोशिश की जा रही है।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दावा किया है कि यह बजट विकास को तेज करेगा। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश की विकास दर को 8.5 फीसदी के स्तर पर लाने में पूरी तरह कामयाब होगा। हालांकि प्रदेश के विकास से जुड़े ये पांच सवाल ऐसे हैं, जिन पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का बजट मौन है-  

क्या बजट प्रदेश के आर्थिक हालात को बेहतर बनाएगा?

भारी कर्ज और केंद्रीय सहायता पर आधारित बजट होने के नाते यह अखिलेश सरकार के लिए गंभीर चुनौती है। इसके लिए सरकार के पास संसाधन बढ़ाने के विकल्प हैं, वहीं अनावश्यक सरकारी खर्च में कटौती एक बड़ी चुनौती है। प्रदेश सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और कठोर फैसले से ही यह मुमकिन है।

क्या यह प्रदेश के आम लोगों की जिंदगी को राहत देगा?

दूसरे प्रदेश के मुकाबले अधिक वैट दर को कम करने की मांग कर रहे प्रदेश वासियों के लिए यह सपने से कम नहीं। सरकार के सामने अपने चुनावी वादे पूरा करने के लिए भारी धन इकट्ठा करने की चुनौती है। और ऐसी हालत में वह कर के जरिए ही आय बढ़ाने के  विकल्प पर जोर दे रही है।

क्या किसान इससे किसी बेहतरी की उम्मीद कर सकते हैं?
किसानों के लिए बनी योजनाओं का लाभ उनतक पहुंचाने की इच्छाशक्ति कम दिख रही है। कर्ज माफी का दायरा भी सीमित है यानी इसका लाभ केवल 50 हजार तक के कर्जदार ही उठा पाएंगे। इसके अलावा किसानों को सस्ते बीज और सिंचाई की सुविधा नहीं मिल पा रही है।

क्या इससे प्रदेश में शिक्षा के माहौल में बदलाव दिखेगा?
केवल उद्घोषणा से काम नहीं बनेगा। प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में सुविधा का अभाव स्तरीय और प्रतिस्पर्धी शिक्षा दे पाने में विफल साबित हो रही है। शिक्षा क्षेत्र का बहुत सारा बजट इससे जु़ड़े कर्मचारियों पर ही खर्च हो रहा है।


क्या इस बजट में नौजवनों की बेरोजगारी दूर होगी?
प्रदेश सरकार ने आईटी उद्योग की स्थापना का संकल्प दिखाया है। लेकिन इसके लिए वह निजी क्षेत्र की सहभागिता पर पूरी तरह निर्भर दिख रही है। निजी क्षेत्र का सहयोग तभी मिल सकता है जबकि उनको अच्छी सहुलियतें और बुनियादी सुविधाएं हासिल हों।

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