UP Election 2022: वाराणसी के युवाओं के क्या हैं चुनावी मुद्दे, पढ़िए किसने क्या कहा?
चाय पर चर्चा के बाद 'अमर उजाला' का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' युवाओं के बीच पहुंचा। यहां बनारस हिंदू विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं ने शिरकत की। इस दौरान युवाओं ने रोजगार, शिक्षा और पीएचडी में नामांकन के मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी।
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आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए वाराणसी में आयोजित 'सत्ता का संग्राम' कार्यक्रम में युवाओं ने खुलकर अपनी बात रखी। इस कार्यक्रम में रोजगार, शिक्षा और पीएचडी में नामांकन प्रक्रिया के मुद्दों पर जमकर चर्चा हुई। बाबा काशी विश्वनाथ की नगरी में कई युवाओं ने मोदी-योगी सरकार पर सवालिया निशान उठाए तो वहीं कुछ ने वर्तमान सरकार के कामकाज की तारीफ की। पढ़िए युवाओं ने और क्या कहा?
कार्यक्रम की शुरुआत में संध्या राव ने कहा कि शिक्षा के लिए बनारस अच्छा है। मोदी जी अच्छा काम कर रहे हैं। सोनल कुमारी ने कहा कि पहले से तो काफी बदलाव हुआ है। शिक्षा को लेकर सोनल ने कहा कि बीएचयू में सीटें कम हैं लेकिन बच्चे ज्यादा हैं। ऐसे में सरकार को इस पर ध्यान देने की दरकार है। रतन कुमार सिंह ने कहा कि बनारस भारत की सांस्कृतिक राजधानी है। यहां जो हमारी सांस्कृतिक विरासत है, जो हमारी प्राचीनता है, उसको नवीनता के साथ संजो कर जिस तरीके से आज की तारीख में हिंदुस्तान के पटल पर पेश किया जा रहा है, यह हम सभी काशी वासियों के लिए गौरव की बात है। काशी शिक्षा का प्राचीनतम केंद्र है। यहां तीन तीन विश्वविद्यालय है। ऐसा नहीं है हम किसी भी मामले में पीछे हैं।
नीतीश ने कहा कि बीएचयू पिछले दो साल से बंद है। यहां मोदी जी की बड़ी बड़ी रैलियां हो रही हैं लेकिन विश्वविद्यालय खोलने में इनलोगों को कोरोना फैलने का डर लग रहा है। जितने लोग यहां हैं, एक क्लास में लगभग इतने ही लोग बैठते हैं लेकिन कोरोना का हवाला देकर विश्वविद्यालय को नहीं खोला जा रहा है। यहां पर पीएचडी में नामांकन की प्रक्रिया भ्रष्ट है। यहां गिरोह चलता है, यहां आरएसएस का भी बोलबाला है, जाति के आधार पर पीएचडी में नामांकन होता है। इसके जवाब में रतन कुमार सिंह ने पूछा कि अगर बीएचयू में जातिगत आधार पर नामांकन होता है तो आपका नामांकन कैसे हुआ?
वहीं, अभिषेक सिंह ने कहा कि जाति, धर्म और मजहब के आधार पर विश्वविद्यालय में नामांकन किया जाता है, यह कहना सर्वथा अनुचित है। विश्वविद्यालय के किसी प्रशासनिक अधिकारी की लापरवाही के चलते आप सरकार को दोष नहीं दे सकते हैं। डॉ अमरेंद्र राय ने कहा कि जाति और धर्म के आधार विश्वविद्यालय में नामांकन नहीं होता है। वहीं, एक छात्र ने कहा कि हम जाति, धर्म और मजहब पर बात करने यहां नहीं आए हैं। हम शिक्षा, रोजगार, महंगाई और स्वास्थ्य व्यवस्था के मुद्दे पर बात करने आए हैं। शुभांशी पांडे (छात्रा) ने कहा कि भाजपा ने दो एम्स बनवाए हैं। योगी और मोदी की सरकार ने 25 से अधिक मेडिकल कॉलेज बनवाए हैं। प्रदेश में पांच अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट हैं। भाजपा की सरकार में काम हुआ है। उधर, धीरज कुमार तिवारी ने भोजपुरी गाना गाकर क्लास को ऑफलाइन करने की मांग की। उन्होंने गाने के माध्यम से कहा कि विश्वविद्यालय में ऑनलाइन क्लास कोई नहीं चाहता है। सब ऑफलाइन की डिमांड कर रहा है।
दिव्याशु ने कहा कि पिछले दो साल में जितने मेडिकल कॉलेज बने हैं, वहां पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक नहीं है। केवल बिल्डिंग बन गई है। भाजपा के लोग केवल आंकड़ों के जरिए बता देते हैं कि हमने इतने मेडिकल कॉलेज बनवा दिए। इसके अलावा युवाओं ने रोजगार का भी मुद्दा जमकर उठाया। शिवराज शर्मा ने कहा कि जब आप रोजगार की बात करेंगे तो भाजपा वाले 'भारत माता की जय' करेंगे और जब आप शिक्षा की बात करेंगे तो ये 'महादेव महादेव' करेंगे। वहीं, एक छात्रा ने इस पर कहा कि हमारे देश की जितनी आबादी, सबको सरकारी नौकरी नहीं मिल सकती। वहीं, योगेश नाम के एक छात्र ने कहा कि बीएचयू में लड़कियों का खुलेआम शोषण किया जाता है। इस पर वहां मौजूद लड़कियों ने मिली जुली प्रतिक्रिया दी।