UP Election 2022: मिर्जापुर में गंदगी, शिक्षा और चिकित्सा पर बोलीं महिलाएं, वेब सीरीज पर भी उठाया सवाल
चाय पर चर्चा और युवाओं से बातचीत के बाद 'अमर उजाला' का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' देश की आधी आबादी के बीच पहुंचा। मिर्जापुर में महिलाओं ने खुलकर चुनावी मुद्दों पर चर्चा की।
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उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए 'अमर उजाला' का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' देश की आधी आबादी के बीच मिर्जापुर पहुंचा। इस दौरान यहां कि महिलाओं ने गंदगी, शिक्षा और चिकित्सा के मुद्दे पर खुलकर बात की। इस दौरान कुछ महिलाओं ने वर्तमान सरकार के कामकाज की तारीफ की तो कुछ ने कमियां गिनाई। पढ़िए किसने क्या कहा?
कार्यक्रम की शुरुआत में जयश्री जैन ने कहा कि यहां शिक्षा में कमी है। यहां के जो पैरेंट्स हैं, यहां का जो समाज है वह बहुत शिक्षित नहीं है, इसलिए वो पढ़ाई का मोल बहुत अच्छी तरह से नहीं जानते हैं। वहीं, केंद्रीय विद्यालय की प्रिंसिपल रुपाली परिहार ने कहा कि सरकारी स्कूल को लेकर लोगों में जिस तरह की छवि बनी है, वैसा सरकारी स्कूल का इमेज नहीं है। विभा नाम की महिला ने कहा कि बच्चे शिक्षा लेना चाहते हैं लेकिन यहां उच्च शिक्षा की कमी है। उच्च शिक्षा के लिए लोगों को कहीं न कही बाहर जाना पड़ता है। उन्होंने आगे कहा कि स्वच्छता के क्षेत्र में जो काम हुआ है वो सराहनीय है। गांव की स्थिति पहले से काफी बदल गई है। उन्होंने कहा कि अगर लोग बदलाव चाहते हैं तो उन्हें सोच व मानसिकता बदलने की जरूरत है।
बीबीए की छात्रा स्नेहा सिंह ने कहा कि उच्च शिक्षा के लिहाज से यहां कोई सुविधा नहीं है। बीबीए के अलावा यहां अन्य कोर्स नहीं हैं। मीनू शुक्ला ने कहा कि मिर्जापुर में पहले से ज्यादा बदलाव हुआ है। पहले लोग अपनी बेटियों को स्कूल नहीं भेजते थे लेकिन अब लोग बेटियों को पढ़ा रहे हैं। अध्यापिका रातरै चटर्जी ने कहा कि जब मैंने कॉलेज में पढ़ाना शुरू किया था उस समय लड़कियों की संख्या काफी कम थी लेकिन अब कॉलेज में लड़कियों की संख्या काफी बढ़ गई है।
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ रेखा पाठक ने कहा कि मिर्जापुर में हम 1984 से हैं। जब मैंने ज्वाइन किया था जब पांच लड़कियां पढ़ने आती थीं। अभी ज्यादा आती हैं। यहां के लोगों में लड़कियों को लेकर अलग सोच है। वह चाहते हैं कि उनकी लड़की जल्दी से बीए कर ले फिर उनकी शादी करा दी जाए। मेकअप आर्टिस्ट सिमरन ने कहा कि यहां लड़के और लड़कियों में भेदभाव है। आप चाहे अच्छा काम करो या बुरा। यहां लोगों को गलत तरीके से ही जज किया जाता है। हालांकि, पहले से चीजें बेहतर हुई हैं लेकिन अभी भी बहुत कमियां हैं।
रुपाली परिहार ने कहा कि मिर्जापुर वेब सीरीज देखने के बाद मैं यहां आने से डर रही थी लेकिन यहां आने के बाद मैंने पाया कि यहां के लोग बहुत अच्छे हैं। यहां शांति है। यहां की महिलाएं बहुत ही सुरक्षित हैं। हां, यहां गंदगी, संकरी सड़कें और ट्रैफिक की समस्या है। वहीं, मीनू शुक्ला ने कहा कि यहां सबसे बड़ी समस्या मेडिकल सुविधा की है। रेखा मौर्या ने कहा कि यहां लोग गंदगी की बात करते हैं। अगर सबलोग अपने अपने घरों के आसपास साफ सफाई रखेंगे तो गंदगी नहीं होगी लेकिन लोग केवल सरकार के ही भरोसे रहते हैं। वहीं, उन्होंने बेटियों की शिक्षा को लेकर कहा कि अगर हम एक बेटी को शिक्षित करते हैं तो पूरा परिवार शिक्षित होता है। उन्होंने कहा कि अगर महिलाएं शिक्षित होंगी तभी सशक्त होंगी। समाज में महिलाएं जितना अधिक शिक्षित होगी। वह समाज उतना ही अधिक शिक्षित होगा।
शिवांगी ने कहा कि यहां की सड़कों पर गाय खुलेआम घूम रही हैं, जिससे ट्रैफिक जाम की समस्या होती है। पूजा सिंह ने खेल की व्यवस्था पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि यहां कोई मैदान नहीं है। वहीं उन्होंने कहा कि यहां 14-15 साल के लड़कियों की शादी करा दी जाती है। यहां पर लोगों में मानसिकता की कमी है। वहीं, अंबिका ने कहा कि मिर्जापुर वेब सीरीज पर सवाल उठाते हुए कहा कि कहीं भी जाते हैं तो वहां जब हम अपना परिचय देते हैं तो लोग यही कहने लगते हैं कि वही मिर्जापुर, क्या सच में वहां ऐसा होता है? असल में मिर्जापुर वैसा नहीं है जैसा कि वेब सीरीज में दिखाया गया है। इस सीरीज के चलते कहीं न कहीं मिर्जापुर की गलत इमेज बनी है।