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मजदूरी न मिलने से बेरंग होगी कामगारों की होली
अमर उजाला ब्यूरो/उन्नाव
Updated Tue, 22 Mar 2016 01:10 AM IST
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मनरेगा काम के लिए खड़े मजदूर।
- फोटो : अमर उजाला
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महीनों मजदूरी कर पसीना बहाने के बाद जब मेहनताना मिलने की बारी आई तो पता चला कि खाते में पैसा ही नहीं आया। होली के मद्देनजर जिले के 40,000 मजदूरों को मजदूरी नहीं मिल पाई। कामगारों के बच्चों की होली इस बार बेरंग ही रहेगी।
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त्योहार मनाने के लिए मजदूरी पेशा लोग घर में रखा अनाज बेचने को मजबूर हैं तो कोई महाजन के आगे हाथ फैला रहा है तो कोई परिवार और रिश्तेदारों से उधार मांगकर त्योहार की खरीदारी कर रहा है। कुछ ग्राम पंचायतों के मजदूरों को प्रधानों ने पैसा उधार देने का आश्वासन दिया है। हालांकि इसके बाद भी मजदूरों के एक बड़े तबके का त्योहार बेरंग रहेगी।
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जिले के 40000 मनरेगा मजदूर एक माह से मजदूरी को तरस रहे हैं। मनरेगा खाता खाली पड़ा है। ऐसे में मनरेगा मजदूर मजदूरी को परेशान हैं। चिंता की बात यह है कि एक दिन बाद होली का त्योहार है। ऐसे में मजदूरी न मिलना कामगारों के लिए चिंता का विषय बनी है। बच्चे लगातार पिचकारी व रंगों की मांग कर रहे हैं, लेकिन जेब में फूटी कौड़ी न होने से मजदूरों के चेहरे लटके हुए हैं।
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ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, खाते में पैसा न होने से जिले के मनरेगा मजदूरों का भुगतान नहीं हो पा रहा है। 16 करोड़ रुपये का भुगतान फंस गया है। मजदूर प्रधान और सेक्रेटरी के चक्कर लगा रहे हैं। मजदूरी के लिए मजदूर प्रधान के घर दस्तक दे रहे हैं। सबसे ज्यादा भुगतान नवाबगंज ब्लाक का फंसा है।
बांगरमऊ, मियागंज, फतेहपुर चौरासी, गंजमुरादाबाद में लाखों रुपये का भुगतान अभी तक नहीं हो पाया है। वैसे मजदूरों को काम करने के सात दिन के अंदर पैसा मिलना चाहिए, लेकिन एक माह बीतने के बाद भी जॉबकार्डधारक मजदूरी के लिए भटक रहे हैं।