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Unnao News: बारूद के विस्फोट से झुलसी महिला की इलाज के दौरान मौत

Sat, 31 Aug 2024 05:09 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 31 Aug 2024 05:09 AM IST
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Woman burnt due to gunpowder explosion dies during treatment
बीघापुर। करनाईपुर गांव के बाहर पटाखे बनाते समय हुए विस्फोट से झुलसने और जमींदोज हुए मकान के मलबे में दबी महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। आतिशबाजी बनाने वाले उसके पति और नौकर की हालत गंभीर होने से लखनऊ केजीएमयू रेफर किया गया है। देर शाम मृतका का शव गांव पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। घटना में एसआई ने विस्फोटक अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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बारासगवर थानाक्षेत्र के करनाईपुर गांव के बाहर गुरुवार को आतिशबाज सुनील रैदास के मकान में अवैध रूप से पटाखे बनाने के दौरान विस्फोट हो गया था। घर में भारी मात्रा में रखे पटाखे जलने से उसका दो मंजिला मकान 20 मिनट में ही खंडहर में तब्दील हो गया था। हादसे में सुनील रैदास (45) उसकी पत्नी बीना (40) और काम करने वाला गांव निवासी सर्वेश उर्फ पतलू (40) झुलस गए थे। मलबे में दबी सुनील की पत्नी बीना को करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद अग्शिमन जवानों ने निकाला था। फेफड़ों में बारूद का धुआं और मुंह में मलबा भरने से उसकी हालत सबसे ज्यादा गंभीर थी। तीनों को पुलिस ने कानपुर हैलट में भर्ती कराया था, जहां गुरुवार देर रात बीना की मौत हो गई। वहीं सुनील और सर्वेश की हालत गंभीर देख डॉक्टर ने दोनों को लखनऊ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
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कानपुर में पोस्टमार्टम के बाद भाई नीरज, रिशु और बड़ी बहन शुक्रवार शाम करीब 4:30 बजे बीना का शव लेकर सुनील के पैतृक गांव भवानी खेड़ा पहुंचे तो परिवार में कोहराम मच गया। मां का शव देख बेटी खुशी, बेटा मयंक और प्रियांश बिलख पड़े। सुनील मूल रूप से भवानी खेड़ा का रहने वाला था। करीब 20 साल से करनईपुर में मकान बनाकर रह रहा है। मृतका की मां सुंदारा, पिता भानु प्रसाद भी बेहाल हैं। देर गढ़ेवा घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। वहीं बारासगवर थाने में तैनात एसएसआई मानिकराम वर्मा ने विस्फोटक अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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अवैध तरीके से अधिक कमाई के लालच में बिखर गया परिवार
बीघापुर। अवैध काम करके ज्यादा कमाई के लालच में 2007 में पिता नन्हेलाल की जान गई। इसके बाद सुनील ने भी वही रास्ता पकड़ लिया। उसके पैतृक गांव भवानीखेड़ा में किसी को उसके इस गैरकानूनी काम की भनक न लगे, इसलिए उसने करनाईपुर गांव में पक्का मकान बनवाया। वह पटाखे बनाने के साथ ही थोक में पटाखे खरीदकर दुकानों में सप्लाई कराता था। ग्रामीणों में चर्चा थी कि वह खूब पैसा कमाना चाहता था, इसी लालच ने पूरा परिवार तबाह कर दिया। पत्नी की मौत और खुद गंभीर हालत में होने से बच्चों का भविष्य दांव पर लग गया है। मां की मौत और पिता की हालत गंभीर होने से बच्चों की देखभाल फिलहाल नाना-नानी कर रहे हैं।
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