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जल्द मिलेगी यूरिया की एक और रैक

Mon, 02 Feb 2015 12:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव Updated Mon, 02 Feb 2015 12:02 AM IST
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urea
उन्नाव। खाद के लिए जूझ रहे किसानों के लिए राहत की खबर है। यूरिया की जबरदस्त मारामारी को देखते हुए कृषि विभाग ने एक नई रैक का मांगपत्र शासन को भेजा है।
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विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, एक सप्ताह में नई रैक आने की उम्मीद है। इसके बाद जनपद में खाद के चल रही मारामारी कम हो जाएगी।

जनपद को अब तक 28785 मीट्रिक टन यूरिया मिल चुकी है। मार्च तक का लक्ष्य 31325 एमटी है। मौजूदा समय में जो खाद जिले को मिली है वह किसानों के बीच पर्याप्त नहीं है। पिछले हफ्ते लगभग 2600 मीट्रिक टन की आई नई रैक भी किसानों के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुई। दो दिन में ही समितियों से खाद गायब हो गई।
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इसके बाद से किसान लगातार परेशान हैं और खाद के लिए समितियों के चक्कर लगा रहे हैं। कुछ साधन सहकारी समितियों के सचिवों ने दबी जुबान में स्वीकार किया है कि अधिकांश जगहों पर मात्र एक ट्रक ही खाद भेजी गई। समिति के सदस्यों की संख्या को देखते हुए यह नाकाफी साबित हुई।
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किसी तरह से सदस्यों को एक-दो बोरी दी गई। यूरिया के लिए हो रही मारामारी को देखते हुए कृषि विभाग ने एक अन्य रैक की मांग शासन से की है।

जिला कृषि अधिकारी ओपी मिश्र ने बताया कि 2600 मीट्रिक टन यूरिया (इफ्को फर्टिलाइजर) की एक अन्य रैक का मांगपत्र शासन को भेजा गया है। उम्मीद है कि एक सप्ताह में नई रैक मिल जाएगी। इसके बाद इसे समितियों को भेजकर किसानों के बीच वितरण कराया जाएगा।

यूरिया और पानी के घोल का करें छिड़काव
मौसम के अचानक पलटने से फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। कृषि के जानकारों का कहना है कि जिस तरह से तेज धूप निकल रही है उससे रबी फसलों मसलन गेहूं, तिलहनी व दलहनी को बचाने की आवश्यकता है। जिला कृषि अधिकारी ओपी मिश्र के मुताबिक, रबी की सभी फसलों में जलविलय घोल का छिड़काव करें। इसके लिए उर्वरक (17:44, 18:18:18 और 19:19:19 तीनों में से कोई एक) लें।


एक हेक्टेअर के लिए 5 किलोग्राम उर्वरक लेकर 500-600 लीटर पानी में घोल लें। इसके बाद इसका फसलों पर छिड़काव करें। कृषि अधिकारी के अनुसार, इस घोल का छिड़काव करने से फसल हरी-भरी रहेंगी। साथ ही उत्पादन भी ज्यादा होगा। इसके छिड़काव से यूरिया का प्रयोग करीब 50 प्रतिशत कम हो जाएगा। कृषि अधिकारी का कहना है कि यह घोल रबी की सभी फसलों में कर सकते हैं।
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