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Unnao News: 20 लाख के गबन का आरोपी लापता, पुलिस की जांच पर सवाल

Sun, 27 Sep 2026 01:09 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 27 Sep 2026 01:09 AM IST
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उन्नाव। जिला अस्पताल की रोगी कल्याण समिति के खाते से करीब 19.98 लाख रुपये का गबन हुआ है। इस मामले का आरोपी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी विनय यादव एक साल बाद भी पुलिस की गिरफ्त से दूर है। पुलिस अब तक न तो गबन की रकम बरामद कर सकी है और न ही उसके सहयोगियों का पता कर सकी है। इससे पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
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विनय यादव सदर कोतवाली क्षेत्र के जुराखनखेड़ा मोहल्ला का निवासी है। वह जिला अस्पताल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर तैनात था। 18 मार्च वह अस्पताल जाने की बात कहकर घर से निकला था। इसके बाद वह नहीं लौटा। परिजनों ने उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई। इसी बीच, तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधीक्षक रियाज अली मिर्जा ने रोगी कल्याण समिति के बैंक खाते की जांच कराई। जांच में अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के बीच खाते से 19,98,607 रुपये गायब पाए गए।
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जांच से सामने आया कि विनय ने अधिकारियों और अस्पताल के कर्मचारियों को गुमराह किया। उसने बैंक की फर्जी मोहर तैयार कराई थी। वह रकम जमा किए बिना फर्जी मोहर लगी पर्चियां संबंधित पटल पर दे देता था। इस तरह उसने लाखों रुपये का गबन किया। मामले की जानकारी होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने 28 मार्च 2025 को सदर कोतवाली में आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी की तलाश का दावा किया था लेकिन एक साल बाद भी उसका पुख्ता सुराग नहीं मिल सका है। कोतवाल चंद्रकांत मिश्रा का कहना है कि आरोपी की तलाश के लिए प्रयास जारी हैं। उन्होंने बताया कि कुछ महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं और जल्द कार्रवाई की जाएगी।
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अपहरण की आशंका जता चुके परिजन
विनय का सुराग न मिलने पर मां फूलकेश ने 20 मार्च 2025 को पुलिस को तहरीर देकर गुमशुदगी दर्ज कराई थी। परिजनों ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से मिलकर बेटे को फंसाने के लिए अपहरण की आशंका जताई। आरोप है कि अस्पताल में तैनात लोग विनय से रुपये लेते थे। परिजनों के मुताबिक राजफाश से पहले ही उसका अपहरण कर गबन का आरोपी बना दिया गया।


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एक साल से बन रही थी पटकथा
अस्पताल में मरीजों का पर्चा, ईसीजी, प्लास्टर, ऑपरेशन और मेडिकल फीस का जो रुपया आता है, उसे रोग कल्याण समिति के खाते में जमा किया जाता है। इस धनराशि को रोगियों की सुविधाएं बढ़ाने लिए खर्च किया जाता है। इसके लिए हर माह बैठक भी होती है। हालांकि अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक रोगी कल्याण समिति की एक भी बैठक नहीं की गई थी। इस दौरान आरोपी ने गबन की पटकथा तैयार की थी।
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