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Unnao News: बारिश में बढ़ा संक्रमण, तीन की मौत, 53 भर्ती
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उन्नाव। बारिश के मौसम में दूषित पेयजल, खानपान लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है। जिले में संक्रामक बीमारियों के बढ़ते प्रकोप के बीच सोमवार को गंभीर हालत में जिला अस्पताल पहुंचे तीन मरीजों को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। उधर, 24 घंटे में इमरजेंसी वार्ड में 53 मरीज भर्ती किए गए हैं।
बुखार, उल्टी-दस्त, पेट दर्द और कमजोरी जैसी शिकायतों वाले मरीज जिला अस्पताल की इमरजेंसी में रोजाना पहुंच रहे हैं। सोमवार सुबह पुरवा क्षेत्र के गढ़ेवा निवासी सतीश चंद्र (52) को परिजन गंभीर हालत में जिला अस्पताल की इमरजेंसी लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। इसके अलावा हरदोई जिले के मल्लावां निवासी अंशुल (15) और पुरवा के गदोरवा गांव निवासी रामरानी (53) को भी परिजन गंभीर हालत में अस्पताल लाए। चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। फिजीशियन डॉ. कौशलेंद्र प्रकाश ने बताया कि बारिश का मौसम बैक्टीरिया के पनपने और संक्रमण फैलने के लिए अनुकूल होता है। दूषित भोजन व पेयजल के सेवन से लोग तेजी से बीमार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआत में हल्के लक्षणों को नजरअंदाज करना स्थिति को गंभीर बना सकता है।
आंकड़े छिपा रहा संक्रामक रोग विभाग
बारिश के बाद संक्रामक बीमारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ा है। रोजाना ओपीडी से लेकर इमरजेंसी वार्ड तक संक्रामक बीमारियों से पीड़ित मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। इसके बावजूद संक्रामक रोग विभाग इन मरीजों की जानकारी नहीं दे रहा है। विभाग के मुताबिक मानसून के मौसम में इस साल सिर्फ तीन मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है जबकि निजी अस्पतालों में ऐसे मरीजों की भीड़ उमड़ रही है जो प्लेटलेट्स कम होने जैसी समस्याओं से पीड़ित हैं।
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ओपीडी से डायग्नोस्टिक तक मरीजों की भीड़
रक्षाबंधन के चलते पिछले कुछ दिनों से अस्पताल में मरीजों की संख्या कम रही थी। सोमवार को अस्पताल खुलते ही मरीजों की भीड़ लग गई। पर्चा काउंटर पर कई बार जल्दी पंजीकरण को लेकर मरीजों के बीच गहमागहमी हुई। सोमवार को 2442 मरीजों ने ओपीडी पंजीकरण कराया। इसमें 788 पुरुष, 643 महिलाएं, 580 किशोर व 431 किशोरियां शामिल हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने से ओपीडी पहुंचे मरीज भी हलकान रहे। कई घंटों के बाद नंबर आने पर उन्होंने राहत की सांस ली। यही हाल डायग्नोस्टिक विंग का भी रहा। यहां भी जांच के लिए पहुंचे मरीज कतार में खड़े रहे। सोमवार को 312 मरीजों ने खून की जांच कराई तो 234 मरीज एक्सरे जांच के लिए पहुंचे।
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बुखार, उल्टी-दस्त, पेट दर्द और कमजोरी जैसी शिकायतों वाले मरीज जिला अस्पताल की इमरजेंसी में रोजाना पहुंच रहे हैं। सोमवार सुबह पुरवा क्षेत्र के गढ़ेवा निवासी सतीश चंद्र (52) को परिजन गंभीर हालत में जिला अस्पताल की इमरजेंसी लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। इसके अलावा हरदोई जिले के मल्लावां निवासी अंशुल (15) और पुरवा के गदोरवा गांव निवासी रामरानी (53) को भी परिजन गंभीर हालत में अस्पताल लाए। चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। फिजीशियन डॉ. कौशलेंद्र प्रकाश ने बताया कि बारिश का मौसम बैक्टीरिया के पनपने और संक्रमण फैलने के लिए अनुकूल होता है। दूषित भोजन व पेयजल के सेवन से लोग तेजी से बीमार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआत में हल्के लक्षणों को नजरअंदाज करना स्थिति को गंभीर बना सकता है।
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आंकड़े छिपा रहा संक्रामक रोग विभाग
बारिश के बाद संक्रामक बीमारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ा है। रोजाना ओपीडी से लेकर इमरजेंसी वार्ड तक संक्रामक बीमारियों से पीड़ित मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। इसके बावजूद संक्रामक रोग विभाग इन मरीजों की जानकारी नहीं दे रहा है। विभाग के मुताबिक मानसून के मौसम में इस साल सिर्फ तीन मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है जबकि निजी अस्पतालों में ऐसे मरीजों की भीड़ उमड़ रही है जो प्लेटलेट्स कम होने जैसी समस्याओं से पीड़ित हैं।
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ओपीडी से डायग्नोस्टिक तक मरीजों की भीड़
रक्षाबंधन के चलते पिछले कुछ दिनों से अस्पताल में मरीजों की संख्या कम रही थी। सोमवार को अस्पताल खुलते ही मरीजों की भीड़ लग गई। पर्चा काउंटर पर कई बार जल्दी पंजीकरण को लेकर मरीजों के बीच गहमागहमी हुई। सोमवार को 2442 मरीजों ने ओपीडी पंजीकरण कराया। इसमें 788 पुरुष, 643 महिलाएं, 580 किशोर व 431 किशोरियां शामिल हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने से ओपीडी पहुंचे मरीज भी हलकान रहे। कई घंटों के बाद नंबर आने पर उन्होंने राहत की सांस ली। यही हाल डायग्नोस्टिक विंग का भी रहा। यहां भी जांच के लिए पहुंचे मरीज कतार में खड़े रहे। सोमवार को 312 मरीजों ने खून की जांच कराई तो 234 मरीज एक्सरे जांच के लिए पहुंचे।