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Unnao News: हसनगंज पुलिस पर 14 लाख की लूट का आरोप
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हसनगंज। कोतवाली पुलिस पर पूर्व विधायक के भाई ने अवैध हिरासत में रखने का आरोप है। इसके अलावा पुलिस पर लगभग 14 लाख रुपये के जेवर और नकदी लूटने का भी आरोप लगाया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से जांच करने के निर्देश दिए हैं।
पूर्व विधायक दिवंगत रामखेलावन रावत के छोटे भाई राम कुमार ने क्रिमिनल मिसलेनियस रिट याचिका दाखिल की थी। इसमें आरोप लगाया कि दरोगा कल्लू राम यादव और 8 से 10 पुलिसकर्मियों ने उन्हें 27 से 30 जुलाई तक बिना किसी कानूनी कार्रवाई के हिरासत में रखा। याचिकाकर्ता ने पुलिसकर्मियों और विपक्षी पक्ष पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। करीब 14 लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवर, 35 हजार रुपये, दो मोबाइल फोन और 15 कारतूस भी पुलिस पर लूटने का आरोप लगाया है। रामकुमार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। हालांकि ये सभी आरोप याचिका में लगाए हैं।
कोतवाल शरद कुमार ने कहा कि राम कुमार के आरोप निराधार हैं। कहा कि न्यायालय के आदेश पर जांच की जा रही है। बताया कि रामकुमार की बहू अनामिका ने 18 मई को प्रार्थनापत्र दिया था। इस पर पति, सास, ससुर और देवर सहित चार लोगों पर उत्पीड़न की प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। अनामिका ने ससुर रामकुमार पर अपने दो बच्चों को न देने का भी आरोप लगाया था। पुलिस इसी मामले की जांच करने रामकुमार के घर गई थी।
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सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के आदेश
न्यायमूर्ति रजनीश कुमार और न्यायमूर्ति बबिता रानी की खंडपीठ ने हसनगंज कोतवाली परिसर के 27 से 30 जुलाई तक के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के लिए कहा है। इसे अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए भी कहा है। हाईकोर्ट ने पुलिस अधीक्षक को मामले की विस्तृत जांच करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि यदि किसी पुलिसकर्मी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ विधिक और विभागीय कार्रवाई की जाए। राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर अदालत में हलफनामा दाखिल करना होगा। इसमें पुलिस अधीक्षक का व्यक्तिगत हलफनामा, जांच रिपोर्ट और जवाबी हलफनामा शामिल होगा।
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पूर्व विधायक दिवंगत रामखेलावन रावत के छोटे भाई राम कुमार ने क्रिमिनल मिसलेनियस रिट याचिका दाखिल की थी। इसमें आरोप लगाया कि दरोगा कल्लू राम यादव और 8 से 10 पुलिसकर्मियों ने उन्हें 27 से 30 जुलाई तक बिना किसी कानूनी कार्रवाई के हिरासत में रखा। याचिकाकर्ता ने पुलिसकर्मियों और विपक्षी पक्ष पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। करीब 14 लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवर, 35 हजार रुपये, दो मोबाइल फोन और 15 कारतूस भी पुलिस पर लूटने का आरोप लगाया है। रामकुमार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। हालांकि ये सभी आरोप याचिका में लगाए हैं।
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कोतवाल शरद कुमार ने कहा कि राम कुमार के आरोप निराधार हैं। कहा कि न्यायालय के आदेश पर जांच की जा रही है। बताया कि रामकुमार की बहू अनामिका ने 18 मई को प्रार्थनापत्र दिया था। इस पर पति, सास, ससुर और देवर सहित चार लोगों पर उत्पीड़न की प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। अनामिका ने ससुर रामकुमार पर अपने दो बच्चों को न देने का भी आरोप लगाया था। पुलिस इसी मामले की जांच करने रामकुमार के घर गई थी।
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सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के आदेश
न्यायमूर्ति रजनीश कुमार और न्यायमूर्ति बबिता रानी की खंडपीठ ने हसनगंज कोतवाली परिसर के 27 से 30 जुलाई तक के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के लिए कहा है। इसे अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए भी कहा है। हाईकोर्ट ने पुलिस अधीक्षक को मामले की विस्तृत जांच करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि यदि किसी पुलिसकर्मी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ विधिक और विभागीय कार्रवाई की जाए। राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर अदालत में हलफनामा दाखिल करना होगा। इसमें पुलिस अधीक्षक का व्यक्तिगत हलफनामा, जांच रिपोर्ट और जवाबी हलफनामा शामिल होगा।