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Unnao News: तापमान के उतार-चढ़ाव से प्रभावित हुई आम की फसल, आंधी ने बढ़ाई समस्या
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फोटो-17- पेड़ों में कम मात्रा में लगी अमिया। संवाद
गंजमुरादाबाद। पिछले दो महीनों से तापमान के उतार-ेचढ़ाव के कारण आम की फसल पर प्रतिकूल असर पड़ा है। साथ ही आंधी आने से भी बड़े पैमाने में अमिया गिर गई है। भारी नुकसान होने से बागवानों के चेहरे मुरझाए हुए हैं।
आम के पेड़ों में बौर आते ही मार्च महीने में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाने के कारण अमिया में ब्लासम ब्लाइट नामक रोग लग गया। जिससे डंठल कमजोर होने से बड़े पैमाने में अमियां गिर गईं। इसके अलावा अप्रैल के पहले सप्ताह में ओलावृष्टि होने से तापमान लुढ़क कर 17 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा। बार-बार तापमान गिरने और बढ़ने से आम की फसल पर बुरा असर पड़ा है। मौजूदा समय में करीब 30 फीसदी तक आम की फसल गिर गई है। जिससे बागवानों को भारी नुकसान पहुंचा है। पैदावार काफी कम होने से इस बार आम का भाव चढ़ा रह सकता है। आम की कम फसल के कारण बागवानों के चेहरे मुरझाए हुए हैं।
कृषि सलाहकार देवी सिंह ने बताया कि रासायनिक खाद और कीटनाशक का अधिक प्रयोग करने से आम की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसके अलावा तापमान गिरने व बढ़ने से अमियां का गिरना स्वाभाविक है। इससे इस बार आम की पैदावार काफी कम हो सकती है। बागवानों को बौर आने से दो माह पहले ही आम के पेड़ों की देखभाल कर उसमें पोषक तत्व बढ़ाने के लिए प्रयास करने चाहिए।
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आम के पेड़ों में बौर आते ही मार्च महीने में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाने के कारण अमिया में ब्लासम ब्लाइट नामक रोग लग गया। जिससे डंठल कमजोर होने से बड़े पैमाने में अमियां गिर गईं। इसके अलावा अप्रैल के पहले सप्ताह में ओलावृष्टि होने से तापमान लुढ़क कर 17 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा। बार-बार तापमान गिरने और बढ़ने से आम की फसल पर बुरा असर पड़ा है। मौजूदा समय में करीब 30 फीसदी तक आम की फसल गिर गई है। जिससे बागवानों को भारी नुकसान पहुंचा है। पैदावार काफी कम होने से इस बार आम का भाव चढ़ा रह सकता है। आम की कम फसल के कारण बागवानों के चेहरे मुरझाए हुए हैं।
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कृषि सलाहकार देवी सिंह ने बताया कि रासायनिक खाद और कीटनाशक का अधिक प्रयोग करने से आम की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसके अलावा तापमान गिरने व बढ़ने से अमियां का गिरना स्वाभाविक है। इससे इस बार आम की पैदावार काफी कम हो सकती है। बागवानों को बौर आने से दो माह पहले ही आम के पेड़ों की देखभाल कर उसमें पोषक तत्व बढ़ाने के लिए प्रयास करने चाहिए।
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